
नई दिल्ली: कांग्रेस ने सोमवार 24 अगस्त, को नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार 'बैक डोर' यानी पिछले दरवाजे से आरक्षण व्यवस्था को खत्म करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने इस दावे के समर्थन में केंद्रीय सरकारी विभागों में खाली पड़े 8.2 लाख से अधिक स्वीकृत पदों का हवाला दिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि ये आंकड़े भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार की नीतियों की पोल खोलते हैं। उन्होंने इसे वंचित समुदायों के संवैधानिक अधिकारों को समाप्त करने की एक साजिश करार दिया। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित आरक्षण को खत्म करने के लिए 'आरक्षण हटाओ' अभियान चलाया जा रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर मंत्रालयों के अनुसार रिक्तियों का ब्यौरा साझा करते हुए खरगे ने कई महत्वपूर्ण आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि साल 2015 में खाली पदों की संख्या 4.21 लाख थी, जो 2024 में बढ़कर 8.24 लाख हो गई है।
कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा पद रेलवे और रक्षा मंत्रालय में खाली हैं। रेलवे में 2.40 लाख पद रिक्त पड़े हैं, जबकि रक्षा मंत्रालय में यह संख्या 2.41 लाख है। इसके अलावा, गृह मंत्रालय में भी 1.10 लाख पद खाली हैं।
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) की स्थिति पर भी उन्होंने गहरी चिंता जाहिर की। खरगे ने आरोप लगाया कि पीएसयू में 5.1 लाख स्थायी नौकरियां खत्म कर दी गई हैं। वहीं दूसरी तरफ, ठेके (संविदा) पर रखे जाने वाले कर्मचारियों की हिस्सेदारी 19 प्रतिशत से बढ़कर 49 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
इस मुद्दे को सिर्फ रोजगार से अलग बताते हुए खरगे ने कहा कि यह सवाल केवल नौकरियों का नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय का है। उनका तर्क है कि सरकारी पदों को जानबूझकर खाली रखने से सीधे तौर पर आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को उनके अवसरों से वंचित किया जा रहा है। इसके साथ ही, पीएसयू की बिक्री और संविदा आधारित नौकरियों के बढ़ने से आरक्षण के दायरे में आने वाले रोजगार के अवसर और भी सिकुड़ रहे हैं।
खरगे ने तंज कसते हुए कहा कि आरक्षण खत्म करने के लिए संविधान में संशोधन करने की कोई जरूरत नहीं है, बल्कि आरक्षण वाली नौकरियों को खत्म कर देना ही इसके लिए काफी है।
कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप है कि बीजेपी का यह रवैया अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए मौजूद संवैधानिक सुरक्षा उपायों को कमजोर करने के इरादे से अपनाया गया है। रोजगार और रिक्तियों के इस मुद्दे को कांग्रेस अब व्यापक सामाजिक न्याय की लड़ाई के रूप में पेश कर रही है।
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