
बिहार के जमुई में एक नाबालिग लड़की के साथ हुई छेड़छाड़ की घटना ने सूबे का सियासी पारा चढ़ा दिया है। राज्य के मंत्री श्रवण कुमार ने इस गंभीर मामले को महज़ एक 'छिटपुट' घटना करार दिया है, जिसके बाद से वह विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। मंत्री ने अपने बयान का बचाव करते हुए यहाँ तक कह दिया कि दुनिया में कोई भी जगह अपराध से पूरी तरह मुक्त नहीं है।
मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि ऐसी छिटपुट घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन बिहार में ऐसे अपराध करने वाले बच नहीं सकते। उन्होंने दावा किया कि पहले भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की गई है। यह विवादित बयान तब आया जब एक नाबालिग लड़की और उसके दोस्त के साथ हुई बदसलूकी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यह लड़की अपने एक पुरुष मित्र के साथ कोचिंग क्लास से लौट रही थी, तभी मनचलों ने उन्हें घेर लिया।
इस खौफनाक घटना के सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एफआईआर दर्ज कर ली गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है। इसके अलावा, बाकी आरोपियों की पहचान करने और उन्हें जल्द से जल्द पकड़ने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का भी गठन किया गया है।
सिर्फ मंत्री ही नहीं, बल्कि जनता दल (यूनाइटेड) के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने भी इस घटना को 'छिटपुट' ही बताया। अपने बयान से उठे विवाद के बीच कुशवाहा ने सफाई दी कि जब भी ऐसी घटनाएं होती हैं, प्रशासन तुरंत अपना काम करता है। उन्होंने विपक्ष पर पलटवार करते हुए साल 2005 से पहले के दौर की याद दिलाई, जब राज्य में एनडीए की सरकार नहीं थी। कुशवाहा ने दावा किया कि उस समय कानून-व्यवस्था की स्थिति बहुत खराब थी और लोग घरों से बाहर निकलने में डरते थे।
सत्ता पक्ष के इन बयानों पर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने जदयू नेताओं द्वारा इस घटना को 'छिटपुट' कहे जाने की कड़ी निंदा की और इसे बिहार के माथे पर एक 'कलंक' करार दिया। तेजस्वी ने सवाल पूछा कि अगर यही दर्दनाक घटना उनके परिवार के किसी सदस्य के साथ हुई होती, तो क्या सत्ता पक्ष के नेता तब भी ऐसा ही बयान देते।
आरजेडी नेता ने इसे बेहद शर्मनाक बताते हुए राज्य सरकार पर तीखे प्रहार किए। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बिहार में पूरी तरह से 'गुंडाराज' कायम हो चुका है। उनका कहना था कि सरकार दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय ऐसे गंभीर मामलों को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राज्य में महिलाओं की सुरक्षा के दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए और कहा कि जमुई की घटना ने साबित कर दिया है कि दिन-रात निडर होकर घूमने के सरकारी दावों के बावजूद बिहार की बेटियां आज भी सुरक्षित नहीं हैं।
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