केजरीवाल, सोरेन के बाद अखिलेश कितना संभाल पाएंगे जांच एजेंसी की चुनौती?

सपा के शुरुआती शासनकाल में गायत्री प्रजापति से पहले खनिकर्म विभाग के मंत्री पद का दायित्व अखिलेश यादव के पास था। माना जा रहा है कि उस दौरान आवंटित पट्टों को लेकर अखिलेश यादव की भूमिका जांच के घेरे में है।
केजरीवाल, सोरेन के बाद अखिलेश कितना संभाल पाएंगे जांच एजेंसी की चुनौती?

उत्तर प्रदेश: समाजवादी पार्टी (सपा) के शासन में हमीरपुर जिले में हुए खनन घोटाले को लेकर 2 जनवरी 2019 को FIR दर्ज हुई थी। इस FIR में 2008 बैच की IAS अधिकारी बी. चंद्रकला जो तत्कालीन डीएम हमीरपुर थीं, और विधान परिषद सदस्य रमेश मिश्रा समेत 11 नामजद आरोपितों और अन्य अज्ञात के विरुद्ध मामला दर्ज हुआ था। आरोप था कि बिना ई-टेंडर के पट्टे दिए गए और पुराने पट्टों की मियाद भी बढ़ाई गई।

एफआईआर आपराधिक साजिश, चोरी, जबरन वसूली, धोखाधड़ी, अपराध करने के प्रयास और मिस्कंडक्ट जैसे अपराधों के लिए दर्ज की गई थी और मामले में 11 लोगों को नामित किया गया था जिन्होंने खनन पर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) द्वारा प्रतिबंध के बावजूद अवैध खनन की अनुमति दी थी। 2016 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के बाद सीबीआई ने जांच शुरू कर थी।

प्रदेश में एक मजबूत विपक्षी पार्टी के रूप में पहचान रखने वाले अखिलेश यादव को उक्त मामले में सीबीआई से समन प्राप्त हुए थे, जिससे आज 29 फरवरी को उन्हें दिल्ली में पेश होने के लिए कहा गया था. हालांकि, इस मामले में अखिलेश यादव नामजद आरोपित नहीं हैं। लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि खनन पट्टों के आवंटन की प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी को लेकर अखिलेश से बतौर गवाह सवाल-जवाब हो सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार उन्हें सीआरपीसी की धारा-160 के तहत नोटिस जारी किया गया है.

अखिलेश यादव ऐसे पहले नेता नहीं हैं जिन्हें भारत की किसी जांच एजेंसी ने अपने लपेटे में लिया है, इससे पहले भी कई विपक्षी पार्टियों के शीर्ष नेताओं को ED, CBI, NIA जैसी जांच एजेंसियों के कार्रवाइयों का सामना करना पड़ा है. हालांकि, इस बार अलग यह है कि यह कार्रवाई लोकसभा चुनाव के एकदम करीब शुरू हुई है, और प्रदेश सहित केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार है.

अखिलेश ने बुधवार को सीबीआई के समन का जवाब देते हुए कहा कि 2019 का मामला आगामी लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक इरादों से सामने लाया गया। उन्होंने कहा, ''सपा (भाजपा के) सबसे ज्यादा निशाने पर है। 2019 में मुझे किसी मामले पर नोटिस मिला क्योंकि तब लोकसभा चुनाव थे। अब, जब चुनाव फिर से आ रहा है, तो मुझे फिर से नोटिस मिल रहा है.”

पूर्व सीएम ने कहा कि “मुझे मालूम है कि जब चुनाव आते हैं, तो नोटिस भी आएगा।” अखिलेश यादव ने सवाल किया, “यह घबराहट क्यों? अगर पिछले 10 वर्षों में आपने (भाजपा ने) बहुत सारा काम किया है तो आप घबराए हुए क्यों हैं?” विकास के मुद्दे पर भी उन्होंने भाजपा पर निशाना साधा और कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यहां एक्सप्रेसवे पर एक हरक्यूलिस विमान में उतरे थे। इसे समाजवादियों ने बनाया था। आप देश में ऐसा हाईवे क्यों नहीं बना पाए जिस पर हरक्यूलिस विमान उतर सके।”

इस घटनाक्रम पर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि सपा-कांग्रेस गठबंधन से चिढ़ी भाजपा के इशारे पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को सीबीआई का नोटिस भेजा गया है। यह भाजपा की खिसियाहट को बयां कर रहा है। देश में जहां कहीं भी चुनाव हो रहा, वहां के लोगों को तोड़ने के लिए कहीं ईडी, कहीं सीबीआई, तो कहीं इनकम टैक्स का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इसी साल भारत की वित्तीय अपराध एजेंसी ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) पार्टी के हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर लिया है। उनपर भ्रष्टाचार का आरोप था, हालांकि, उन्होंने आरोपों से इनकार किया है. सात घंटे की पूछताछ के उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि, अब उनकी पार्टी ने तत्कालीन परिवहन मंत्री चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री नामित किया है।

वर्तमान में, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अभी भी ED की कार्रवाई से जूझ रहे हैं. उत्पाद शुल्क मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जारी सातवें समन में वह फिर शामिल नहीं हुए। केजरीवाल ने कहा कि वह अदालत के निर्देश पर ही जांच में शामिल होंगे। आशंका जताई जा रही है कि दिल्ली सीएम की भी गिरफ़्तारी कभी भी हो सकती है. 

इससे पहले, 23 दिसंबर 2017 को, चारा घोटाले में गैर-मौजूद पशुओं के लिए चारे, दवाओं और पालन आपूर्ति के लिए बिहार राज्य के खजाने से कथित धोखाधड़ी वाली प्रतिपूर्ति में करोड़ों घोटाले के मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को विशेष सीबीआई अदालत ने दोषी ठहराया था.

बहरहाल, जांच एजेंसियों के रडार पर विपक्ष के कई अन्य बड़े नेताओं के खिलाफ मामले अभी विचाराधीन हैं. लेकिन उन मामलों में कब एक्शन शुरू हो जाए इसका कोई अंदाजा नहीं है. 

हमीरपुर खनन घोटाले पर एक नजर

जांच एजेंसी को इस मामले में सपा सरकार के तत्कालीन खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति की संलिप्तता के साक्ष्य भी मिले थे। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन यूपी सीएम अखिलेश यादव के कार्यालय ने 17 फरवरी 2013 को ई-निविदा नीति का उल्लंघन करके एक ही दिन में 13 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी थी। 

वर्ष 2013 में उनकी जगह गायत्री प्रजापति ने खनन मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था. सपा सरकार में भूतत्व एवं खनिकर्म मंत्री रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति पर चित्रकूट की एक महिला से दुष्कर्म मामले में उन्हें 2017 में गिरफ्तार कर लिया गया था। ईडी ने भी खनन घोटाले में गायत्री प्रजापति से लंबी पूछताछ की थी। सपा के शुरुआती शासनकाल में गायत्री प्रजापति से पहले खनिकर्म विभाग के मंत्री पद का दायित्व अखिलेश यादव के पास था। माना जा रहा है कि उस दौरान आवंटित पट्टों को लेकर अखिलेश यादव की भूमिका जांच के घेरे में है।

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