UP: सीवेज प्लांट में डूबकर हुई मौत के मामले में NHRC ने यूपी सरकार को भेजा नोटिस, जानिए क्या था पूरा मामला?

24 जून को ग्रेटर नोएडा में एक बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में काम करते समय डूबने से तीन कर्मचारियों मोहित, हरगोविंद और अंकित की मौत हो गई थी।
NHRC ने यूपी सरकार को भेजा नोटिस
NHRC ने यूपी सरकार को भेजा नोटिसGraphic- The Mooknayak

नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में हाल ही में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में डूबने से तीन कर्मचारियों की मौत के मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक को नोटिस भेजा है।

आयोग द्वारा शुक्रवार को जारी बयान के मुताबिक, गौतमबुद्ध नगर जिले के ग्रेटर नोएडा में एक बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में गत 24 जून को डूबने से तीन कर्मचारियों की मौत के मामले से संबंधित मीडिया रपट का स्वतः संज्ञान लेते हुए आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

रिपोर्ट में मामले में दर्ज किए गए मुकदमे पर अब तक हुई कार्रवाई की स्थिति, जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के साथ-साथ नियोक्ता और संबंधित अधिकारियों द्वारा मृतक श्रमिकों के परिजनों को प्रदान की गई राहत और पुनर्वास के विषय शामिल करने की अपेक्षा की गई है।

आयोग ने पाया है कि समाचार रिपोर्ट अगर सच है, तो यह पीड़ितों के अधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मुद्दा है। जाहिर है कि अधिकारी सतर्कता और ऐसे खतरनाक कामों की निगरानी का उचित पर्यवेक्षण करने में विफल रहे हैं जिनमें श्रमिकों को ऐसे खतरनाक काम करने के लिए तैनात किया गया था।

बयान में कहा गया है कि आयोग लगातार पर्याप्त और उचित सुरक्षा उपकरणों के बिना खतरनाक सफाई की गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की वकालत करता रहा है। गौरतलब है कि विगत 24 जून को ग्रेटर नोएडा में एक बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में काम करते समय डूबने से तीन कर्मचारियों मोहित, हरगोविंद और अंकित की मौत हो गई थी।

उच्चतम न्यायालय और मानवाधिकार आयोग का है ये आदेश

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 24 सितंबर 2021 को केंद्र, राज्य सरकारों और स्थानीय अधिकारियों के संदर्भ हेतु जोखिमभरे सफाई कार्य में लगे व्यक्तियों के मानव अधिकारों के संरक्षण से संबंधित परामर्शी जारी की थी ताकि इस तरह की प्रथा का पूर्ण उन्मूलन सुनिश्चित किया जा सके।

परामर्शी में उल्लेख किया गया है कि किसी भी स्वच्छता कार्य या जोखिमभरे सफाई कार्य करते समय किसी भी सफाई कर्मचारी की मृत्यु के मामले में स्थानीय प्राधिकारी और ठेकेदार नियोक्ता को जवाबदेह ठहराया जाएगा, भले ही सफाई कर्मचारी की नियुक्ति/कार्य पर रखना किसी भी प्रकार से किया गया हो।

इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा डा बलराम सिंह बनाम भारत संघ (डब्लूपी (सी) संख्या 324/2020) दिनांक 20.10 .2023 को दिए गए निर्णय में स्पष्ट आदेश दिया गया है कि सीवर आदि की सफाई के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करना स्थानीय अधिकारियों और अन्य एजेंसियों का कर्तव्य है।

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