TM Special: स्वच्छता का श्रेय सरकार को, सफाईकर्मियों को 6-9 हजार वेतन क्यों? एमपी में हड़ताल जारी रखने पर अड़े कर्मचारी

भोपाल में 13 हजार से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल में शामिल, 400 से अधिक कचरा गाड़ियां खड़ी; शुक्रवार को जलप्रदाय बंद करने की चेतावनी। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नियमितीकरण, 25 हजार रुपये वेतन और ठेका प्रथा खत्म करने की मांग उठाई।
TM Special: स्वच्छता का श्रेय सरकार को, सफाईकर्मियों को 6-9 हजार वेतन क्यों? एमपी में हड़ताल जारी रखने पर अड़े कर्मचारी
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भोपाल। मध्यप्रदेश में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब शहरों की सड़कों से लेकर नगर निगमों के कामकाज तक दिखाई देने लगा है। वेतन बढ़ाने, नियमितीकरण, अनुकंपा नियुक्ति और ठेका प्रथा समाप्त करने की चार प्रमुख मांगों को लेकर प्रदेशभर के एक लाख से अधिक कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं। भोपाल में लगातार दूसरे दिन कचरा नहीं उठने से सड़कों, बाजारों और गली-मोहल्लों में कचरे के ढेर लग गए हैं। अब हड़ताल में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी भी शामिल हो गए हैं। इससे शुक्रवार को जलप्रदाय व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा भी पैदा हो गया है।

कर्मचारियों ने शुक्रवार को जलप्रदाय नहीं करने की चेतावनी दी है। भोपाल में सफाई कर्मचारियों के समर्थन में कंप्यूटर ऑपरेटर, बाबू, जलप्रदाय, फायर, विद्युत, उद्यान और अन्य विभागों के कर्मचारी भी हड़ताल पर चले गए हैं। इससे नगर निगम के 85 वार्डों और 21 जोन में कामकाज प्रभावित होने की आशंका है।

भोपाल में 13 हजार से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल पर, 400 कचरा गाड़ियां खड़ी

अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन (7262) के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के मुताबिक, भोपाल में करीब 7 हजार सफाईकर्मी हैं। इनके अलावा लगभग 6 हजार अन्य कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हैं। ये कर्मचारी गुरुवार से काम बंद कर चुके हैं और शुक्रवार को भी काम पर नहीं लौटने की बात कही है।

हड़ताल के कारण घरों से कचरा उठाने वाली 400 से अधिक गाड़ियां गार्बेज स्टेशनों पर खड़ी हैं। सामान्य दिनों में प्रत्येक गाड़ी दो से तीन चक्कर लगाती है। शहर के 17 गार्बेज स्टेशनों पर कचरा एकत्र किया जाता है, जहां से कैप्सूल टैंकरों के जरिए आदमपुर छावनी भेजा जाता है। भोपाल में प्रतिदिन करीब 850 टन कचरा निकलता है। ऐसे में लगातार कचरा नहीं उठने से स्वच्छता व्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

नगर निगम मुख्यालय स्थित अटल भवन में भी कामकाज ठप हो गया है। गुरुवार को कर्मचारी नेता अशोक वर्मा ने मुख्यालय की बिजली सप्लाई बंद कर दी और वहां ताला लगा दिया। कर्मचारी नेताओं ने साफ किया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात और मांगों पर ठोस निर्णय होने के बाद ही हड़ताल समाप्त करने पर विचार किया जाएगा।

मगन झंझोट, प्रदेश अध्यक्ष, अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन ने द मूकनायक से बातचीत में कहा कि सफाई कर्मचारियों की हड़ताल तब तक जारी रहेगी, जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती। कर्मचारी वर्षों से नगरीय निकायों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो सम्मानजनक वेतन मिल रहा है और न ही स्थायी रोजगार की सुरक्षा। हमारी मांग है कि न्यूनतम वेतन 10,500 रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये किया जाए, वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित किया जाए और ठेका एवं आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त की जाए।

उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी शहरों को स्वच्छ रखने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन उनके परिवार आर्थिक तंगी में जीवन गुजार रहे हैं। अनुकंपा नियुक्ति और सुरक्षित रोजगार भी कर्मचारियों का अधिकार है। सरकार केवल आश्वासन देकर आंदोलन खत्म नहीं करा सकती। जब तक मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं होती और मांगों पर लिखित एवं ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक प्रदेशभर में हड़ताल जारी रहेगी।

उमंग सिंघार ने उठाए सवाल, कहा- स्वच्छता का श्रेय सरकार को, कर्मचारियों को अधिकार कब?

सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बुधवार को भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान और स्वच्छता रैंकिंग का श्रेय लेने वाली सरकार शहरों को साफ रखने वाले कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन, स्थायी रोजगार और सुरक्षा देने में विफल रही है।

सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर कर्मचारियों की मांगों का जल्द निराकरण करने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि भोपाल में सफाई कर्मचारियों को 29 दिन काम करने के बाद लगभग 9 हजार रुपये वेतन मिलता है, जबकि प्रदेश के कुछ नगरीय निकायों में कर्मचारियों को 6 से 7 हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं। इतनी कम राशि में महंगाई के दौर में परिवार चलाना मुश्किल है।

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें वर्षों से काम कर रहे दैनिक वेतनभोगी और विनियमित कर्मचारियों को नियमित कर सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम 25 हजार रुपये मासिक वेतन सुनिश्चित करने, ठेका और आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करने तथा सेवाकाल में मृत्यु होने पर परिवार के एक पात्र सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग शामिल है।

सीवर सफाई में मौतों का मुद्दा भी उठाया

सिंघार ने सफाई कर्मचारियों की असुरक्षित कार्य परिस्थितियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि जून 2023 से जुलाई 2026 के बीच ग्वालियर, रीवा, सतना, इंदौर और उज्जैन में सीवर सफाई के दौरान हुई पांच घटनाओं में 8 लोगों की मौत हुई और 4 घायल हुए। उन्होंने मैनुअल स्कैवेंजिंग अधिनियम, 2013 का हवाला देते हुए कहा कि सुरक्षा उपायों के बिना सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई पर रोक है, इसके बावजूद ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

उन्होंने नियमितीकरण को लेकर हाईकोर्ट के निर्देशों का भी उल्लेख किया और सवाल किया कि कर्मचारियों को स्थायी रोजगार देने के बजाय सरकार उनके अधिकारों के खिलाफ अदालत में क्यों लड़ रही है।

शिवपुरी, विदिशा समेत कई शहरों में सफाई व्यवस्था प्रभावित

भोपाल के अलावा शिवपुरी, विदिशा और प्रदेश के अन्य शहरों में भी हड़ताल का असर दिखाई दे रहा है। शिवपुरी नगर पालिका के करीब 350 कर्मचारी हड़ताल पर हैं। कई स्थानों पर कचरा सड़कों और बाजारों में जमा होने लगा है। प्रदेशभर के एक लाख से अधिक कर्मचारी नियमितीकरण, वेतन वृद्धि और ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

इस बीच विदिशा जिले के सिरोंज में विधायक उमाकांत शर्मा ने बुधवार रात खुद सड़क पर उतरकर करीब दो घंटे तक झाड़ू लगाई। उन्होंने सफाई व्यवस्था संभालने की कोशिश की। वहीं राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में कपड़े सिलने की दुकान चलाने वाले दिनेश कुमार नामदेव उर्फ पप्पू ने गुरुवार सुबह दुकान छोड़कर बाजार की सफाई की। वे झाड़ू और हाथ ठेला लेकर सुभाष चौक से सर्राफा बाजार तक पहुंचे और करीब डेढ़ घंटे तक कचरा साफ किया।

शुक्रवार को बढ़ सकता है आंदोलन, सरकार के सामने चुनौती

सफाई कर्मचारियों की हड़ताल अब केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गई है। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के शामिल होने और जलप्रदाय बंद करने की चेतावनी ने नगर निगम प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। यदि शुक्रवार को भी कर्मचारी काम पर नहीं लौटते हैं तो शहर में कचरा प्रबंधन के साथ पेयजल आपूर्ति और अन्य नगरीय सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

कर्मचारी नेता मगनलाल झांझोट ने इसे आर-पार की लड़ाई बताते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा। दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार से कर्मचारियों की मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। अब सवाल यह है कि सरकार हड़ताल समाप्त कराने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाती है या कर्मचारियों का आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।

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