नोएडा श्रमिक प्रदर्शन: अपनों को बेगुनाह बता रहे परिवार, जमानत के लिए कर्ज और पाई-पाई मोहताज

नोएडा हिंसक प्रदर्शन के बाद पुलिस की कार्रवाई जारी, गिरफ्तारी से परेशान बिहार के मजदूर परिवार अपनों को बेगुनाह बताकर जमानत के लिए ले रहे कर्ज।
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नोएडा में हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद की एक तस्वीर
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उत्तर प्रदेश: मजदूरी की मांग को लेकर नोएडा में मजदूरों के हुए उग्र प्रदर्शन के बाद पुलिस ने सैकड़ों गिरफ्तारियां की हैं। जिन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है अब उनके परिजन अपनी मुसीबतों को लेकर मीडिया के सामने आ रहे हैं। उन्हीं में से एक हैं मुन्नी देवी। सोमवार को नोएडा जिला अदालत में एक वकील के केबिन से बाहर निकलते हुए उनकी गोद में उनका दो साल का बीमार बेटा था, और चेहरे पर न्याय की आस।

पच्चीस वर्षीय मुन्नी 17 अप्रैल की देर रात बिहार के आरा से बदहवास हालत में ट्रेन पकड़कर नोएडा पहुंची थीं। उनके 30 वर्षीय पति आनंद कुमार राम को 13 अप्रैल को हुए हिंसक श्रमिक प्रदर्शन में कथित संलिप्तता के आरोप में उनके कार्यस्थल से गिरफ्तार कर लिया गया था।

मुन्नी ने बताया कि जब वे अगले दिन 18 अप्रैल को कासना जेल में पति को कपड़े देने गईं, तो आनंद ने उन्हें पूरी बात बताई। आनंद के मुताबिक, कंपनी के एचआर ने उन्हें बुलाया था और वहां पहले से पुलिस मौजूद थी। पुलिस उन्हें दो अन्य मजदूरों के साथ पास के एक बगीचे जैसी जगह पर ले गई और प्रदर्शन का सीसीटीवी फुटेज दिखाकर वीडियो में उनकी पहचान होने का दावा किया।

मुन्नी अपने पति के बेकसूर होने की दुहाई देती हैं। उनका कहना है कि आनंद वहां प्रदर्शन करने क्यों जाएंगे, जबकि वे लोग अपने बेटे के बेहतर इलाज के लिए ही नोएडा आए थे। उनके दो वर्षीय बेटे को पेशाब करने में तकलीफ होती है और अब तक उसकी दो सर्जरी हो चुकी हैं।

यह परिवार अपने तीन बच्चों (जिनकी उम्र 12, 8 और 2 वर्ष है) के साथ लगभग दो साल पहले नोएडा शिफ्ट हुआ था। मुन्नी 8 अप्रैल को एक पारिवारिक कार्यक्रम के लिए बिहार स्थित अपने घर गई हुई थीं।

उनका कहना है कि उनके पति महीने में सिर्फ 11,000 रुपये कमाते हैं और काम से एक दिन की भी छुट्टी लेना उनके लिए बहुत भारी पड़ता है। पति की गिरफ्तारी की खबर उनके एक दोस्त से मिलने के बाद, मुन्नी अपनी मां और दो बच्चों के साथ तुरंत नोएडा वापस लौट आईं।

परिवार के अनुसार, वकील ने उन्हें बताया है कि आनंद पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें हत्या का प्रयास, दंगा करना, सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए चोट या गंभीर चोट पहुंचाना, लोक सेवक को कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग, दूसरों की जान या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालना और आपराधिक साजिश रचना जैसी धाराएं शामिल हैं।

बुधवार सुबह मुन्नी की मां ललिता ने बताया कि वे जमानत याचिका दायर करने के लिए वकील को देने के वास्ते 20,000 रुपये इकट्ठा करने की जद्दोजहद कर रही हैं। उन्होंने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा कि इतनी बड़ी रकम वे कहां से लाएंगे, फिलहाल उन्होंने अपने रिश्तेदारों से मदद मांगी है।

परिवार ने मंगलवार को वकील को 9,000 रुपये दे दिए हैं ताकि जमानत का आवेदन दाखिल किया जा सके। वकील ने उन्हें आश्वासन दिया है कि आनंद एक सप्ताह के भीतर बाहर आ जाएंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें पूरी रकम चुकानी होगी। परिवार अब सिर्फ उम्मीद के सहारे है।

आनंद के अलावा पकड़े गए दो अन्य मजदूरों की पहचान सुनील कुमार और कुंजबिहारी के रूप में हुई है। ये दोनों बिहार के सासाराम के रहने वाले हैं और इनकी उम्र 20 से 25 साल के बीच है।

सुनील के छोटे भाई ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे सभी एक ही कमरे में रहते थे। उनके अनुसार, 13 अप्रैल को शाम 5 बजे जब विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ, तब वे काम पर गए हुए थे और शाम 6:10 बजे वापस लौट आए। इसके बाद वे अपने कमरे से बाहर नहीं गए।

सुनील के भाई का दावा है कि जिन लोगों ने असल में प्रदर्शन किया था, वे पहले ही शहर छोड़कर जा चुके हैं। अब उन बेगुनाह लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है जिन्होंने कुछ किया ही नहीं।

सुनील पिछले चार साल से नोएडा में काम कर रहा है और अपने घर पैसे भेजता है। उसे जेल से बाहर निकालने के लिए उसके भाई ने गांव में खेती करने वाले अपने पिता से 20,000 रुपये भेजने को कहा है। वह इसी साल मार्च में नोएडा में सुनील के साथ रहने आया था।

दूसरी तरफ, इस पूरे मामले पर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि 13 अप्रैल को लगभग 350 से 400 लोगों को हिरासत में लिया गया था। पूछताछ के बाद उनमें से अधिकांश को छोड़ दिया गया। अब पुलिस सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से विश्लेषण कर रही है और केवल उन लोगों को गिरफ्तार कर रही है जो वीडियो में साफ तौर पर नजर आ रहे हैं।

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