नई दिल्ली: फिजिशियन लेकिन कर रहा था सर्जरी, मरीज की मौत हुई तो पकड़ा गया!

फर्जी क्लीनिक के 4 डॉक्टर गिरफ्तार, पॉश इलाके में संचालित हो रहा था क्लीनिक।
फोटो साभार- एनबीटी
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नई दिल्ली। डॉक्टर को भगवान का रूप समझा जाता है। हर इंसान अपनी जिंदगी डॉक्टर के हाथों में सौंप देता है, लेकिन अगर डॉक्टर ही फर्जी हो तो क्या किया जाए। यूपी-बिहार के सुदूरवर्ती इलाकों में आपने फर्जी झोलाछाप डॉक्टरों की करतूतों के कई मामले सुने होंगे। गरीब लोग अपनी जान खतरे में डाल कर ऐसे लोगों से इलाज कराने को मजबूर हैं। लेकिन क्या आपने सोचा है कि देश की राजधानी दिल्ली के एक हाईफाई यानी पॉश इलाके में भी ऐसा मेडिकल रैकेट चल सकता है। दिल्ली के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश नगर के एक क्लीनिक में डॉक्टर्स बिना सर्जरी की डिग्री के ही मरीजों का ऑपरेशन कर रहे थे।

आरोप है कि लोग इस क्लीनिक में गॉल ब्लैडर या किसी दूसरी बीमारी का इलाज कराने आते मगर ऑपरेशन के चक्कर में अपनी जान गंवा देते। इस तरह कई लोगों ने इस क्लीनिक में आकर मौत को गले लगा लिया। हालांकि अब इस क्लीनिक के फर्जीवाड़े के बारे में लोगों को पता चल गया है।

फर्जी सर्जन बन करते थे सर्जरी

दिल्ली पुलिस ने 4 जालसाजों को गिरफ्तार किया है। जो फर्जी सर्जन बनकर मरीजों की सर्जरी किया करते थे। मरीजों की जान से खिलवाड़ का ये गोरखधंधा ग्रेटर कैलाश में चल रहा था। हैरानी की बात तो ये है कि पुलिस को इनकी नकेल कसने में 14 महीने का वक्त लग गया। दरअसल पिछले साल इसी कथित अस्पताल में एक व्यक्ति की सर्जरी के दौरान मौत हो गई। इसके बाद मृतक की पत्नी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और फिर मामला यहां तक पहुंच गया। जांच के मुताबिक ये मामला सिर्फ एक शख्स की जान से खिलवाड़ का नहीं है।

दिल्ली पुलिस मांगेगा रिमांड

दिल्ली पुलिस ने कहा है कि ग्रेटर कैलाश हॉस्पिटल डेथ केस में दिल्ली पुलिस पुलिस कोर्ट से आरोपियों की रिमांड मांगेगी। पुलिस इस अस्पताल में 2016 से अबतक लापरवाही से हुई 9 मौतों के मामले की जांच तेजी से बढ़ा रही है। डॉ. नीरज अग्रवाल एक फिजिशियन था, लेकिन वो अपने अस्पताल में अवैध रूप से मेडिकल सर्जरी कर रहे थे।

2022 में भी दर्ज हुई थी शिकायत

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार डीसीपी चंदन चौधरी ने बताया कि 10 अक्टूबर 2022 को संगम विहार की एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके पति ने 19 सितंबर 2022 को अग्रवाल मेडिकल सेंटर में पित्ताशय की पथरी निकलवाई थी। शुरुआत में डॉ. नीरज अग्रवाल ने दावा किया था कि एक प्रसिद्ध सर्जन डॉ. जसप्रीत सिंह सर्जरी करेंगे। हालांकि, सर्जरी से ठीक पहले उन्हें बताया गया कि कुछ आपात स्थिति के कारण डॉ. जसप्रीत सिंह ऑपरेशन नहीं करेंगे।

हाल में भी सामने आया था मामला

डीसीपी ने बताया कि 27 अक्टूबर, 2023 को एक अन्य मरीज जय नारायण की सर्जरी के बाद मौत हो गई। मामले की जांच में एक मेडिकल बोर्ड ने एक नवंबर, 2023 को मेडिकल सेंटर में कमियां पाईं। डॉ. नीरज अग्रवाल द्वारा बार-बार फर्जी दस्तावेज तैयार करने का खुलासा हुआ। मृतक असगर अली की पोस्‍टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी की जटिलताओं के कारण रक्तस्रावी आघात बताया गया। इसके बाद मंगलवार को अयोग्य व्यक्तियों द्वारा नियोजित सर्जरी के पर्याप्त सबूतों के आधार पर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

ये चीजें हुईं बरामद

मौके से 414 प्रिस्क्रिप्शन पर्चियां भी जब्त की हैं, जिनपर शीर्ष पर काफी जगह छोड़ने के बाद केवल डॉक्टरों के हस्ताक्षर थे। इसके अलावा दो रजिस्टरों में उन मरीजों का विवरण था, जिनका गर्भपात अस्पताल में किया गया था। साथ ही कई प्रतिबंधित दवाएं, इंजेक्शन और सर्जिकल ब्लेड सहित विभिन्न मरीजों के मूल नुस्खे की पर्चियां भी बरामद की गईं। इसके अलावा अलग-अलग बैंक के 47 चेक बुक, पासबुक, 56 एटीएम कार्ड अलग छह कार्ड स्वाइपिंग मशीनें बरामद की गईं।

हो सकते हैं और खुलासे

बताया जा रहा है कि आरोपी नीरज अग्रवाल पहले सफदरजंग अस्पताल में नौकरी कर चुका था, जिसके बाद उसने यह मेडिकल सेंटर खोला। इसमें पूजा अग्रवाल बतौर नर्सिंग स्टाफ और महेंद्र बतौर टेक्नीशियन काम करते थे। वहीं जसप्रीत को उनका हेड रखा गया था। सर्जरी के समय प्रिस्क्रिप्शन डॉ. जसप्रीत के नाम से बनती थी, लेकिन ऑपरेशन टेक्नीशियन महेंद्र करता था, जिसके चलते मरीजों की मौतें हुईं। हालांकि जिस तरह से जानकारियां सामने आ रही हैं, मामले में और खुलासे भी हो सकते हैं।

तैयार किए फर्जी दस्तावेज

पुलिस ने इस मामले में धारा 304/196/197/198/201/120बी आईपीसी दिनांक 25/10/22 के तहत मामला एफआईआर संख्या 210/22 पीएस जीके-आई में दर्ज किया गया था। मामले की जांच शुरू कर दी थी। पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि 19 सितंबर 2022 को मृतक असगर अली की सर्जरी के समय डॉ. जसप्रीत सिंह बाजवा ग्रेटर कैलाश-1 में मौजूद नहीं थे। इसके अलावा, यह भी पता चला कि डॉ. जसप्रीत सिंह ने मृतक की सर्जरी के संबंध में फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे।

पूर्व टैक्निशियन फर्जी डिग्री से बना डॉक्टर

पुलिस जांच में जो सबसे अहम खुलासा हुआ है, वह यह कि गिरफ्तार चार में से एक आरोपी महेंद्र दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में कार्यरत वरिष्ठ डॉक्टर के पास टैक्निशियन का काम करता था। उसने डॉक्टर को सर्जरी करते हुए देखकर काम सीखा। जिसके बाद MBBS की फर्जी डिग्री तैयार की और मेडिकल सेंटर में काम करने लगा। मेडिकल सेंटर प्रबंधन, महेंद्र को ऑन कॉल सर्जरी करने के लिए बुलाता था। पुलिस अभी यह भी जांच कर रही है कि महेंद्र ने फर्जी डिग्री कहां से बनवाई और यह कहां-कहां इस डिग्री की मदद से लोगों का इलाज कर रहा था।

डीएमसी नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर होना जरूरी

डॉक्टर प्रताप बताते हैं कि यहां पर वही लोग फंसे हैं, जिन्होंने इन डॉक्टरों से डीएमसी नंबर नहीं जाना और ना ही यह जानने की कोशिश की की इन डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन नंबर क्या है। या यह कितनी क्वालिफाइड हैं। यह सारी जानकारी हर पेशेंट को जानने का हक है। गरीब लोगों सभी डॉक्टर एक समान लगते हैं। यह क्लीनिक अगर पॉश एरिया में है तो इस क्लीनिक की हर तरह से जांच होनी चाहिए।

इन चार डॉक्टर में से, एक डॉक्टर है क्वालिफाइड

आगे डॉक्टर बताते हैं कि इन चारों फर्जी डॉक्टरों में से एक डॉक्टर क्वालिफाइड है, लेकिन वह बहुत ही बेसिक क्वालिफिकेशन है। वह एमबीबीएस तो है, लेकिन वह सर्जरी करने के लायक नहीं है। इसका मतलब यही है कि उसको कहीं और से सपोर्ट मिल रहा था। कभी-कभी यह लोग ऐसा भी करते हैं। यह अपना क्लीनिक खोल लेते हैं। बाहर से सर्जरी करवाने वाले बुला लेते हैं। यह वह डॉक्टर होते हैं जो प्रैक्टिस कर रहे होते हैं या ट्रेनिंग पर होते हैं। उनको कहा जाता है कि आप चुपचाप सर्जरी करके चले जाइए, आपका नाम नहीं आएगा।

पेशेंट और परिजनों को होनी चाहिए पूरी जानकारी

किसी भी क्लीनिक में जाने के बाद पेशेंट को और उसके परिजनों को यह पता होना चाहिए कि डॉक्टर कौन से लेवल के डॉक्टर हैं। क्लीनिक में हर तरह से सुविधा है या नहीं। अगर सर्जरी करते वक्त कोई इमरजेंसी हो जाए तो डॉक्टर कैसे डील करेंगे। इमरजेंसी का सारा सेटअप होना चाहिए। जितनी भी क्लिनिक दिल्ली एनसीआर में है उनका दिल्ली डीएमसी नंबर होना चाहिए। क्योंकि डीएमसी नंबर उन्हें डॉक्टर के पास होता है, जो पूरी तरह से क्वालिफाइड होते हैं। और समय-समय पर डीएमसी को भी हर तरह से इन छोटे-बड़े क्लीनिक की जांच करवानी चाहिए।

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