एमपी के सीहोर में गेहूं खरीदी पर राजनीति गर्म, किसानों के साथ धरने पर बैठे नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कलेक्टर नहीं मिले तो कुत्ते को सौंपा ज्ञापन

खरीदी में देरी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता के आरोप; विरोध प्रदर्शन के दौरान विवादित घटनाक्रम ने भी खींचा ध्यान
एमपी के सीहोर में गेहूं खरीदी पर राजनीति गर्म, नेता प्रतिपक्ष धरने पर बैठे।
एमपी के सीहोर में गेहूं खरीदी पर राजनीति गर्म, नेता प्रतिपक्ष धरने पर बैठे।
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भोपाल। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में गेहूं खरीदी को लेकर किसानों का आक्रोश उस समय उभरकर सामने आया, जब उमंग सिंघार किसानों के साथ सड़कों पर उतर आए और कलेक्टर कार्यालय का घेराव करते हुए धरने पर बैठ गए। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए, जिन्होंने राज्य सरकार की नीतियों को किसान विरोधी बताते हुए जमकर नारेबाजी की। सिंघार ने मौके पर ही किसानों की समस्याओं को सुनते हुए सरकार और प्रशासन पर सीधा हमला बोला और कहा कि प्रदेश के किसान लगातार उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं, जबकि सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है।

अपने संबोधन में सिंघार ने गेहूं खरीदी के आंकड़ों को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में करीब 19 लाख किसानों का पंजीकरण हुआ है और लगभग 1.60 करोड़ मीट्रिक टन गेहूं खरीदी की मांग है, तो अब तक केवल 78 लाख मीट्रिक टन खरीदी होना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बाकी 82 लाख मीट्रिक टन गेहूं के भविष्य को लेकर सरकार के पास कोई स्पष्ट योजना नहीं है। सिंघार ने कहा कि यह देरी जानबूझकर की जा रही है ताकि भाजपा से जुड़े एजेंटों और बिचौलियों को फायदा पहुंचाया जा सके, जिससे किसानों को उनके हक का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

छोटे और सीमांत किसानों को अधिक नुकसान

उन्होंने आगे कहा कि खरीदी में देरी का सबसे ज्यादा नुकसान छोटे और सीमांत किसानों को हुआ है, जिन्हें मजबूरी में अपनी फसल औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ी। सिंघार ने यह भी दावा किया कि सरकार ने समय पर खरीदी शुरू नहीं की और जो खरीदी अब शुरू हुई है, वह भी कांग्रेस के दबाव के कारण संभव हो सकी है। उन्होंने ₹400 प्रति क्विंटल के लाभ में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि यह राशि किसानों के खातों में जाने के बजाय बिचौलियों के पास पहुंच रही है, जो व्यवस्था में गड़बड़ी और पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है।

प्रशासनिक रवैये पर सवाल उठाते हुए सिंघार ने कहा कि जब आम दिनों में जनसुनवाई के दौरान अधिकारी जनता से संवाद की बात करते हैं, तो ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर किसानों की बात क्यों नहीं सुनी जा रही। उन्होंने कहा कि न तो मुख्यमंत्री प्रतिक्रिया दे रहे हैं और न ही स्थानीय प्रशासन जिम्मेदारी निभा रहा है, जिससे किसानों में आक्रोश और निराशा बढ़ती जा रही है। उन्होंने कलेक्टर की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जनता के प्रतिनिधियों और किसानों की बात सुनना प्रशासन की जिम्मेदारी है, जिससे वह पीछे हटता नजर आ रहा है।

कुत्ते को कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान एक विवादित दृश्य भी सामने आया, जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने एक कुत्ते को “कलेक्टर” की पट्टी पहनाकर उसे ज्ञापन सौंपा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इसके बाद इसकी व्यापक आलोचना होने लगी। कई लोगों ने इसे प्रशासनिक पद की गरिमा के खिलाफ और लोकतांत्रिक विरोध की मर्यादा से बाहर बताया, जिससे आंदोलन की गंभीरता पर भी सवाल खड़े हुए।

अपने भाषण में सिंघार ने राज्य सरकार की नीतियों पर व्यापक हमला करते हुए कहा कि सरकार इवेंट और प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन किसानों को राहत देने या उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठा रही। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे कार्यकाल के बावजूद किसानों को खाद, उचित मूल्य और स्थायी समाधान नहीं मिल सका। साथ ही उन्होंने महिलाओं से जुड़ी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि “लाड़ली बहना” जैसी योजनाओं में भी अनियमितताएं सामने आ रही हैं और कई लाभार्थियों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है।

अंत में सिंघार ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी लड़ाई कांग्रेस पार्टी पूरी मजबूती से लड़ेगी और जरूरत पड़ने पर वे किसानों के अधिकारों के लिए सड़क से लेकर जेल तक संघर्ष करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल सीहोर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे प्रदेश में किसानों के मुद्दों को लेकर आवाज उठाई जाएगी, जिससे सरकार को जवाबदेह बनाया जा सके।

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