महाराष्ट्र में प्याज किसानों का फिर प्रदर्शन: 2,400 रुपये प्रति क्विंटल MSP की मांग, सड़कों पर उतरे एमवीए नेता

महाराष्ट्र के नासिक में प्याज किसानों का 'आक्रोश महामोर्चा', ₹2400 प्रति क्विंटल एमएसपी (MSP) की मांग को लेकर एमवीए नेताओं के साथ किया हाईवे जाम।
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नासिक में प्याज किसानों ने ₹2400 प्रति क्विंटल MSP की मांग को लेकर हाईवे जाम किया। प्रदर्शन में उतरे रोहित पवार समेत कई MVA नेता हिरासत में।
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महाराष्ट्र के नासिक जिले में प्याज किसानों ने अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 24 रुपये प्रति किलो या 2,400 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने की मांग को लेकर किसानों ने 'आक्रोश महामोर्चा' नाम से धरना प्रदर्शन शुरू किया है। इस विरोध प्रदर्शन में विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के कई बड़े नेता भी किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आ रहे हैं।

अपनी उपज के सही दाम न मिलने से नाराज किसानों ने गले में प्याज की मालाएं पहनकर चांदवाड़ में मुंबई-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया। सड़क पर उतरे इन किसानों का साथ देने के लिए एनसीपी-एसपी नेता रोहित पवार, शिवसेना (यूबीटी) के एमएलसी अंबादास दानवे और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल भी धरना स्थल पर मौजूद रहे।

विरोध प्रदर्शन में शामिल बबनराव नामक एक किसान ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि प्याज बेचने के बाद उन्हें उत्पादन की लागत भी वापस नहीं मिल पा रही है। उन्होंने बताया कि प्याज उगाने का खर्च ही 1800 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल आता है, ऐसे में सरकार द्वारा तय किया गया 1580 रुपये का दाम बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। किसान का आरोप है कि सरकार उनकी दुर्दशा को नजरअंदाज कर रही है और महज टुकड़े फेंककर उन्हें शांत करना चाहती है।

गौरतलब है कि बीते सोमवार को ही प्याज की खरीद दर 1,235 रुपये से बढ़ाकर 1,580 रुपये प्रति क्विंटल की गई थी। मंगलवार से यह खरीद भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) और भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ (एनसीसीएफ) के माध्यम से शुरू की गई, लेकिन सरकार का यह कदम किसानों को रास नहीं आया। किसानों ने यह भी मांग रखी है कि केंद्र सरकार की एजेंसियां, नेफेड और एनसीसीएफ, सीधे बाजार समिति में खरीदारी करें और अपनी बिक्री दर्ज करें।

एनसीपी-एसपी नेता रोहित पवार ने कहा कि पिछले विरोध प्रदर्शन के दबाव में सरकार ने दाम 12 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये किए थे, जो एक छोटी जीत है लेकिन नाकाफी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह संघर्ष कम से कम 2,400 रुपये प्रति क्विंटल का भाव पाने के लिए है। पवार ने कहा कि मौसम का मिजाज अप्रत्याशित है और खेती लगातार मुश्किल होती जा रही है, इसलिए सरकार को राजनीति और चुनाव किनारे रखकर किसानों की समस्या सुलझानी चाहिए।

इससे एक हफ्ते पहले भी रोहित पवार ने लासलगांव की सबसे बड़ी प्याज मंडी में 25 रुपये प्रति किलो एमएसपी और अपनी उपज का बेहद कम दाम पाने वाले किसानों के लिए 1500 रुपये मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। उसी के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 12 मई को सतारा में घोषित 1,235 रुपये प्रति क्विंटल की पुरानी दर को बढ़ाया गया था।

साल 2024 से लेकर आज तक के प्याज के अस्थिर दामों का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल ने केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक स्थिर निर्यात नीति न होना सरकारों की घोर अक्षमता को दर्शाता है। उनके मुताबिक, भारत के हाथ से अंतरराष्ट्रीय बाजार खिसक रहा है और बांग्लादेश जैसे देशों ने भी भारत से प्याज का आयात कम कर दिया है। इसका सीधा नुकसान हमारे किसानों को उठाना पड़ रहा है, जबकि सरकार सिर्फ खोखले आश्वासन देने के अलावा कुछ नहीं कर रही है।

प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस वक्त तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर दी और वाहनों की कतारों की तरफ तेजी से बढ़ने लगे। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए धरना दे रहे रोहित पवार, शशिकांत शिंदे, अंबादास दानवे और हर्षवर्धन सपकाल समेत कई राजनीतिक नेताओं को हिरासत में ले लिया।

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