Ground Report: दिन-रात बरसते रहे आँसू गैस के गोले, रबर बुलेट और पानी, किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं किसान

किसानों ने कहा कि सरकार हम पर जितने हमले करेगी हमारा हौसला और बुलंद होगा, हम हंसते हुए हर कार्रवाई का तोड़ निकालेंगे.
सड़क पर तिरपाल बिछाकर बैठे किसान
सड़क पर तिरपाल बिछाकर बैठे किसानफोटो- सौम्या राज, द मूकनायक

शंभु बॉर्डर, चंडीगढ़। किसान आंदोलन का दूसरा दिन पहले दिन की तरह ही संघर्ष भरा रहा। सवेरे से ही किसानों के जत्थे फिर से शंभु बॉर्डर के पार जाने के लिए इकट्ठा होने लगे थे, यहां किसानों की संख्या लगातार बढ़ती रही। कल ही किसानों ने शुरुआती बेरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ना शुरू कर दिया था और अब भी किसान लगातार बेरिकेडिंग के पार जाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं सरकार उन पर कहर ढाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। कल दिनभर किसानों पर आँसू गैस के गोले, रबर बुलेट और कलर घोला हुआ पानी डालकर उन्हें रोकने की कोशिश की गई थी। बीती रात और आज दिनभर भी यह सब लगातार जारी रहा।

कल पुलिस के साथ हुई झड़प में कई किसानों को गंभीर चोटें आईं थीं और बातचीत के मुताबिक आज भी 100 से ज्यादा किसान घायल हुए हैं। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी किसानों को हिरासत में भी लिया गया है। पुलिस द्वारा इस कार्रवाई के बाद भी किसानों के हौसलें बुलंद हैं। यहां मौजूद किसानों ने हमें बताया कि वे मजबूती के साथ यहां डटे रहेंगे और दिल्ली जाकर रहेंगे।

पुलिस द्वारा छोड़े गए गोले और रबर बुलेट से घायल किसान
पुलिस द्वारा छोड़े गए गोले और रबर बुलेट से घायल किसानफोटो- सौम्या राज, द मूकनायक

शंभु बॉर्डर पर किसान आंदोलन में शामिल बलविंदर कौर कहती हैं, "हम इसी देश के नागरिक हैं। हम कोई पाकिस्तानी नहीं हैं जो हमारे साथ सरकार इस तरह का बर्ताव कर रही है। पुलिस चाहे जितने भी गोले हम पर दागे लेकिन हम यहां से नहीं हटेंगे, हम अपनी मांगों को लेकर डटे रहेंगे।” वह कहती है कि हम गुरु गोविंद सिंह के बच्चे हैं, हम हार नहीं मानेंगे।

वहीं मनविन्दर कौर कहती हैं, "कुछ मीडिया वाले हमें खालिस्तानी बताकर बदनाम कर रहे हैं, हम खालिस्तान समर्थक नहीं है। हम इस देश के किसान हैं। हम अन्न उगाते हैं और अपने हक के लिए यहां बैठे हुए हैं।"

आज वसंत पंचमी का दिन है यानी आज किसानों का दिन है। किसान यहां पतंग उड़ा रहे हैं और ड्रोन से पतंग लड़ा रहे हैं। पतंग उड़ा रहे बलवीर हमें बताते हैं, "हम यहां खुशियां मना रहे हैं, सरकार हम पर जितने हमले करेगी हमारा हौसला और बुलंद होगा। हम हंसते हुए उनकी हर कार्रवाई का तोड़ निकालेंगे।"

किसानों को लंगर बांटते लोग
किसानों को लंगर बांटते लोगफोटो- सौम्या राज, द मूकनायक

पुलिस द्वारा लगातार दागे जा रहे आंसू बम के गोले, रबर बुलेट और पेलेट बम से यहां बड़ी संख्या में किसान घायल हुए हैं। आंदोलन में शामिल हरविंदर सिंह अपने हाथों का घाव दिखाते हुए बताते हैं, "हमें रोकने के लिए सरकार तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है। हम यहां शांति से आंदोलन कर रहे हैं और अपनी मांगों को उनके सामने रख रहे हैं लेकिन सरकार हिंसा पर उतर आई है। सरकारों के इस हमले से हम डरने वाले नहीं हैं, हम दिल्ली जाकर रहेंगे।"

इस बीच राहुल गांधी ने आंदोलन में पुलिस प्रताड़ना से गंभीर रूप से घायल हुए पूर्व सैनिक गुरमीत सिंह से फोन पर बात करके उनके स्वास्थ्य के बारे में जाना और हक़ की मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए उन्हें अपना समर्थन जताया। राहुल गांधी से बात करते हुए गुलमीत सिंह ने कहा, “मैं भी सेना में सर्विस देकर रिटायर हुआ हूँ। हम आतंकवादी नहीं अपने देश के ही किसान है।”

इतने लंबे समय तक लगातार आँसू गैस के गोले, रबर बुलेट और कलर घोले हुए पानी से जूझते हुए कई किसानों की तबीयत पर बुरा असर होने लगा है। कई लोगों को देखने और सांस लेने में दिक्कत हो रही है। इससे बचाव के लिए किसान आई ड्रॉप का इस्तेमाल कर रहे हैं। किसानों के ऊपर दागे गए आँसू गैस के कुछ गोले एक साल पहले ही एक्सपायर हो चुके हैं। इनकी कई तसवीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है। जिन लोगों पर इनका इस्तेमाल किया जा रहा है उनके स्वास्थ्य पर इसका क्या असर होगा यह बड़ा सवाल है।

शंभु बॉर्डर पर लगातार आंसू गैस के गोले और रबर बुलेट
शंभु बॉर्डर पर लगातार आंसू गैस के गोले और रबर बुलेटफोटो- सौम्या राज, द मूकनायक

इस आंदोलन में युवाओं के साथ बच्चे, बूढ़े और औरतें भी शामिल है। कई बुजुर्ग किसान इस आंदोलन में आगे बढ़कर हिस्सा ले रहे हैं वहीं बच्चे और औरतें आंदोलनकारियों को खाने-पीने की चीजें बांटने का काम कर रहे हैं।

सरकार इस आंदोलन को कुचलने का पूरा प्रयास कर रही है और किसानों को रोकने के लिए हर तरह की तैयारी की गई है। पंजाब-हरियाणा के शंभु बॉर्डर से लेकर दिल्ली के बॉर्डर तक सड़कों पर जगह-जगह नुकीली कीलें, कंटीले तार, सीमेंट के ब्लॉक, रेत से भरे कंटेनर, लोहे के बेरिकेड लगाए गए हैं तो वहीं कई जगहों पर ट्रकों, बसों और रोड रोलर को बीच सड़क पर खड़ा करके रास्ते में अवरोध बनाए गए हैं। इन सबके साथ भारी संख्या में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के जवानों को भी तैनात किया गया है।

वहीं इन सबसे निपटने के लिए किसान भी अपनी ओर से पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ रहे हैं। बेरिकेडिंग तोड़ने के लिए किसानों के जत्थे में बुलडोजरनुमा ट्रैक्टर भी शामिल किए गए हैं। आँसू गैस के बमों को डिफ्यूज करने के लिए किसान जूट की बोरियां भिगोकर ला रहे हैं और ड्रोन को फंसाने के लिए पतंग भी उड़ा रहे हैं। किसान किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटना चाहते, वह हर हाल में दिल्ली पहुँचना चाहते हैं।

इस बीच ओलंपिक पदक विजेता पहलवान बजरंग पूनिया और साक्षी मलिक आंदोलन करने वाले किसानों के समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर किसानों पर हो रही पुलिस की कार्रवाई को लेकर दुख जताया है साथ ही सरकार से जल्द उनकी मांगे मानने की अपील की है।

किसान आंदोलन की शुरुआत से ही सोशल मीडिया पर सरकार के समर्थकों द्वारा हर बार की तरह इस आंदोलन को देशविरोधी और खालिस्तान समर्थक करार देने की कोशिश भी शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर कई ऐसे फोटोज़ और वीडियो वायरल हो रहे हैं जिन्हें बिना किसी संदर्भ और तथ्यों के तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।

इस आंदोलन को कवर करने के लिए जो पत्रकार ग्राउंड पर हैं और लगातार ग्राउंड के अपडेट्स दे रहे थे उनमें से कुछ लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट्स को सरकार द्वारा प्रतिबंधित किया जा रहा है। इसमें पिछले किसान आंदोलन में चर्चित रहे पत्रकार मनदीप पुनिया का पर्सनल अकाउंट और उनके प्लेटफॉर्म गाँव सवेरा का एक्स अकाउंट शामिल हैं।

शंभु बॉर्डर पर किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली और गाडियां में जरूरत का सारा सामान लेकर पूरी तैयारी के साथ यहां आए हैं। उनके पास महीनों के राशन और जरूरत की हर चीज हैं। उनका कहना हैं कि चाहे हमें सालों तक बैठना पड़े लेकिन हम अपनी मांगों को लेकर डटे रहेंगे।

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