मध्य प्रदेश: विंध्य क्षेत्र में गहराया जल संकट, प्रशासन ने घोषित किया जल अभावग्रस्त क्षेत्र

पिछले साल एक दिन छोड़कर नल में पानी आ जाता था लेकिन इस बार तो पिछले 15 दिनों से एक भी दिन पानी नहीं मिला है।
मध्य प्रदेश: विंध्य क्षेत्र में गहराया जल संकट, प्रशासन ने घोषित किया जल अभावग्रस्त क्षेत्र

भोपाल। "पिछले कई वर्षों से हम पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। खासकर यह समस्या गर्मियों में मार्च के महीने से शुरू हो जाती है। सालभर में मार्च से जून को छोड़कर हमें नल-जल योजना के तहत पानी मिल जाता है। लेकिन इस मौसम में नल से पानी नहीं आता, नगर पालिका के द्वारा पानी के टैंकर आते हैं पर इनसे भी पर्याप्त पानी की सप्लाई नहीं होती। किसी को 4 डब्बा पानी मिलता है, तो किसी को पांच डब्बा। अब इतनी भीषण गर्मी में थोड़े से पानी से गुजरा कैसे करें," मैहर जिले के माता मंदिर वार्ड निवासी कैदीलाल सिंह साहू ने द मूकनायक को बताया कि इस साल पानी की समस्या पहले से और खस्ताहाल हो चुकी है। कैदीलाल ने कहा, "पिछलेली साल तो एक दिन छोड़कर नल में पानी आ जाता था लेकिन इस बार तो पिछले 15 दिनों से एक भी दिन पानी नहीं मिला है।"

मैहर शहरी क्षेत्र के समीप बसे नखतरा गाँव के केशव पटेल ने बताया कि उनका गाँव पानी की समस्या से जूझ रहा है. उन्होंने बताया कि पंचायत द्वारा दिन में एक टैंकर आ रहा है, लेकिन इतना पानी पर्याप्त नहीं है। गाँव में लोगों के पास पालतू पशु भी हैं जिन्हें पानी चाहिए। केशव ने कहा, "गाँव में तीन शासकीय हैंडपंप है, गर्मी के मौसम में दो हैंडपंप सूख चुके हैं। सिर्फ एक हैंडपंप में तीन घण्टे में 5 से 7 बाल्टी पानी आ रहा है। लोगों के निजी ट्यूबवेल भी सूखने की कगार पर हैं।"

मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के सतना और मैहर जिले में तापमान बढ़ते ही पेयजल संकट गहरा गया है। इस क्षेत्र में पानी की समस्या ग्रामीण-शहरी क्षेत्र के रहवासियों के साथ प्रशासन के लिए भी मुसीबत बन चुकी है। पानी की समस्या पर काबू पाने के लिए जिला कलेक्टर ने इसे जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है। 

द मूकनायक से बातचीत करते हुए स्थानीय पत्रकार विक्रम रजक ने बताया कि यहाँ वर्षों से व्याप्त पानी की समस्या से लोग परेशान रहते हैं। पठार क्षेत्र होने के कारण ग्राउंड वाटर इस मौसम में सैकड़ों मीटर नीचे चला जाता है, इसलिए शहर और ग्रामीण क्षेत्र के ट्यूबवेल, हैंडपंप और कुएं सूखने लगते हैं। आसपास के तालाब में अब तक सिर्फ कीचड़ बचता है। कुछ छोटे पोखरों में पानी रहता है, लेकिन वह पीने योग्य नहीं है। राहुल ने कहा, "प्रशासन पानी की समस्या को नियंत्रण में करने का प्रयास कर रहा है, उम्मीद है लोगों को गर्मी में पानी की समस्या से निजात मिल पाए."

सतना और मैहर जिले में भीषण पेय जल संकट की समस्या पर नियंत्रण के लिए मैहर कलेक्टर रानी बाटड ने मध्य प्रदेश पेयजल परीक्षण अधिनियम-1986 की धारा-3 में प्रदत्त शक्तियों के तहत जनहित में मैहर (राजस्व) जिले के समस्त विकासखंडो व नगरीय, शहरी क्षेत्रों को तत्काल प्रभाव से 30 जून 2024 तक की अवधि के लिए मैहर जिले को "जल अभावग्रस्त क्षेत्र" घोषित करने का आदेश जारी किया है।

कलेक्टर कार्यालय के द्वारा जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति के "जल अभावग्रस्त क्षेत्र" में किसी भी शासकीय भूमि पर स्थित जल स्त्रोतों में पेयजल और घरेलू प्रयोजनों को छोड़कर अन्य किसी भी प्रयोजनों के लिये नहरों में प्रवाहित जल के अलावा अन्य स्रोतों का जल दोहन किन्हीं भी साधनों द्वारा जल का उपयोग नहीं करेगा। जिले के समस्त नदी, नालों, स्टापडैम, सार्वजनिक कुओं तथा अन्य जल स्त्रोतों का उपयोग घरेलू प्रयोजन के लिये किया जायेगा। जल अभावग्रस्त क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति स्वयं अथवा प्राईवेट ठेकेदार अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के पूर्व अनुज्ञा प्राप्त किए बिना किसी भी प्रयोजन के लिये नवीन नलकूप का निर्माण नहीं करेगा। यह आदेश शासकीय नलकूप खनन पर लागू नहीं होगा।

इसी प्रकार जिन व्यक्तियों को अपनी निजी भूमि पर नलकूप खनन कार्य कराना है, उन्हें ऐसा करने के लिये निर्धारित प्रारूप में निर्धारित शुल्क के साथ संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को आवेदन करना होगा।

इस काम के लिए समस्त अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को उनके क्षेत्राधिकार के अंतर्गत सक्षम अधिकारी प्राधिकृत किया गया है। अनुविभागीय अधिकारी अनुमति देने के पूर्व आवश्यक जांच एवं परीक्षण की कार्यवाही पूर्ण करेंगे तथा अनुमति दिए जाने के बारे में संबंधित क्षेत्र के सहायक यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से अभिमत या अनुशंसा प्राप्त करनी होगी।

जारी आदेशानुसार सार्वजनिक पेयजल स्रोत सूख जाने के कारण वैकल्पिक रूप से दूसरा कोई सार्वजनिक पेयजल स्त्रोत उपलब्ध नहीं होने पर जनहित में संबंधित अनुविभागीय अधिकारी  उस क्षेत्र के निजी पेयजल स्त्रोत को पेयजल परिरक्षण संशोधित अधिनियम 2002 के सेक्सन 4 (ए) तथा 4 (बी) के प्रावधानों के अधीन निश्चित अवधि के लिये अधिग्रहण कर सकेगें। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित के विरूद्ध म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 9 एवं भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 के तहत दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी।

तमस नदी सूखने से गहराया जल संकट

मैहर और सतना से गुजरने वाली तमस नदी सूख चुकी है, यह नदी इन दोनों जिलों की लाइफलाइन है। नदी के सूखने के बाद ग्राउंड वाटर पर असर पड़ा है। इसके साथ ही तमस नदी के पानी से ही शहरी और कस्बों की नल जल योजना संचालित होती है, लेकिन नदी सूखने के बाद पिछले 15 दिनों से नलों में पानी नहीं आया।

मैहर के नगर पालिका अध्यक्ष संतोष सोनी ने बताया कि उन्होंने पिछले महीने ही 51 वोरिंग कराई थी, लेकिन इनमें से करीब 25 वोर सफल हुए हैं। नपा अध्यक्ष संतोष सोनी ने कहा, "वर्तमान में 15 टैंकरों से सप्लाई कर रहे हैं, प्रशासन और हम सभी पानी की व्यवस्था के लिए जितना हो सके काम कर रहे हैं, बाकी भगवान के ऊपर है."

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