बलरामपुर: मिड-डे मील में 11 करोड़ का बड़ा घोटाला उजागर, समन्वयक और मदरसा संचालकों समेत कई लोगों पर FIR दर्ज

BSA की जांच में खुला 13 साल पुराना राज, 2008 से जमे को-ऑर्डिनेटर ने मदरसों और प्रधानों के साथ मिल कर रची थी 11 करोड़ के गबन की साजिश
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लखनऊ/बलरामपुर: बेसिक शिक्षा विभाग के तहत एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। बलरामपुर जिले में मिड-डे मील (एमडीएम) योजना की निधि में लगभग 11 करोड़ रुपये के गबन का पर्दाफाश हुआ है। इसे एक सुनियोजित और वर्षों से चल रहे भ्रष्टाचार के रूप में देखा जा रहा है।

इस मामले में बुधवार देर रात बलरामपुर कोतवाली में जिला एमडीएम समन्वयक फिरोज अहमद खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। फिरोज खान वर्ष 2008 से इस पद पर तैनात थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा किया, भुगतान के नकली दस्तावेज तैयार किए और स्कूल प्रमुखों, मदरसा संचालकों, प्रधानों व खाता संचालकों के एक बड़े नेटवर्क के साथ मिलीभगत कर सरकारी पैसे का गबन किया। एफआईआर में 13 मदरसा प्रधानाचार्यों और 30 अन्य ठेकेदारों व प्रधानों का भी जिक्र है।

कैसे खुला राज?

यह एफआईआर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शुभम शुक्ला की शिकायत पर कोतवाली नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई है। दरअसल, स्कूलों की तरफ से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि उन्हें भोजन तैयार करने के लिए निर्धारित 'कन्वर्जन कॉस्ट' (परिवर्तन लागत) की पूरी राशि नहीं मिल रही है। इन शिकायतों के बाद विभाग ने आंतरिक ऑडिट शुरू किया।

जांच के दौरान, जिले के वित्त एवं लेखा अधिकारी और बीईओ ने संयुक्त रूप से खातों की समीक्षा की। इस प्रक्रिया में समन्वयक फिरोज खान ने ईमेल के जरिए 'प्रिंटेड पेमेंट एडवाइस' (पीपीए) जमा किए और दावा किया कि फंड का पूरा वितरण कर दिया गया है। लेकिन, जब अधिकारियों ने इन पीपीए का मिलान सीधे 'पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम' (पीएफएमएस) से किया, तो चौंकाने वाली विसंगतियां सामने आईं। जांच में पाया गया कि खान द्वारा दिए गए दस्तावेज फर्जी थे और बड़े पैमाने पर हो रहे गबन को छिपाने के लिए वास्तविक ट्रांसफर राशि में हेरफेर किया गया था।

मदरसों और स्कूलों के जरिए पैसों की बंदरबांट

जांच में कम से कम आठ प्रमुख संस्थानों में गड़बड़ी पाई गई, जिनमें कई मदरसे और प्राथमिक स्कूल शामिल हैं। एफआईआर के अनुसार, कागजों पर छात्रों की संख्या के आधार पर स्वीकृत राशि को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। इसके बाद अतिरिक्त धनराशि को स्कूल के प्रधानाचार्यों, मदरसा प्रबंधकों और ग्राम प्रधानों के बैंक खातों के माध्यम से डायवर्ट कर दिया गया, जिन्होंने कथित तौर पर समन्वयक का सहयोग किया।

इन लोगों के नाम हैं शामिल

घोटाले में नामजद लोगों की सूची काफी लंबी है। इसमें मदरसा ऐसा सिद्दीकी की परवीन फातिमा और गुलाम गौसुलवारा, दारुल उलूम फारूकिया के राजा कुमार सैनी और मदरसा फजले रहमानिया की सरिता का नाम प्रमुख है। इसके अलावा प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों का प्रभार संभालने वाले सलीम अहमद, मलिक खुर्शीद अहमद, सुनील सिंह, अशोक कुमार गुप्ता, कुंवर आनंद सिंह और कई अन्य लोग शामिल हैं।

शिकायत में नसीम अहमद, जयप्रकाश मिश्रा और सरिता जैसे ग्राम प्रधानों के साथ-साथ तुलसीपुर और गैंसड़ी क्षेत्र के कई व्यक्तियों का भी नाम है, जो कथित तौर पर फर्जी लेनदेन में शामिल थे। विभाग ने यह आशंका भी जताई है कि इस खेल में कुछ अन्य सरकारी कर्मचारी या डेटा- एंट्री ऑपरेटर भी शामिल हो सकते हैं, जिन्होंने समन्वयक की मदद की होगी। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।

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