जानिए क्यों उत्तराखंड सरकार कर रही है दलितों के साथ भेदभाव वाली जगहों की लिस्टिंग?

उत्तराखंड राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष मुकेश कुमार ने दिए निर्देश, तीन जिलों का सर्वे शुरू, जातीय भेदभाव को समाप्त करने के लिए की जा रही कार्रवाई।
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उत्तरकाशी। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में जातिगत भेदभाव की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कभी चंपावत में छात्र दलित भोजनमाता के हाथ से बना खाना खाने से इनकार कर देते हैं तो कभी दलित दूल्हे को घोड़े से उतरने के लिए मजबूर किया जाता है। गत 9 जनवरी को उत्तरकाशी में एक 22 साल के लड़के की जलती लकड़ियों से पिटाई कर दी गई। दलित युवक एक मंदिर में दाखिल होने की कोशिश कर रहा था। यही बात सवर्णों को अखर गई और पांच युवकों ने दलित युवक को पीटना शुरू कर दिया। मामले का केन्द्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भी संज्ञान लिया। वहीं आयोग की विशेष टीम ने घटनास्थल का दौरा किया।

पीड़ित के पिता की शिकायत के बाद पुलिस ने पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। इस घटना का संज्ञान लेते हुए अब उत्तराखंड के सभी जिलों में ऐसे मंदिरों और धार्मिक स्थलों की सूची तैयार की जा रही है, जहां दलितों के साथ भेदभाव होता है।

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लोकल मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार, उत्तराखंड राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष मुकेश कुमार ने इसके निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी मामले के बाद उन्होंने अधिकारियों संग बैठक की। जिसमें अधिकारियों को समाज में भेदभाव और रूढ़िवादिता को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

सभी जिलों के एसपी और डीएम को भी पत्र भेज दिया गया हैं। उनसे ऐसे मंदिरों और धार्मिक स्थलों की सूची मांगी गई है, जहां दलितों के प्रवेश पर रोक लगाई जाती हो। ऐसी स्थिति में लोगों को समझाने और न मानने पर मुकदमा दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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जातिगत भेदभाव वाले 3 जिले चिन्हित किए गए हैं। मुकेश कुमार कहते हैं कि अगर किसी मंदिर में कुछ परंपराओं के कारण सभी भक्तों पर प्रतिबंध लागू होता है, तो वह स्वीकार है। लेकिन अगर यह केवल दलित या निचली जाति के भक्तों पर लागू होता हो तो बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।

उत्तराखंड में जातिगत भेदभाव की बड़ी घटनाओं की बात करें तो मई 2018 के मामले का जिक्र करना जरूरी है। उस दौरान कफल्टा में 14 दलित बारातियों को जिंदा जलाकर मार दिया गया था। दिसंबर 2021 में चंपावत में सामान्य छात्रों ने दलित भोजन माता के हाथ का बना खाना खाने से इंकार कर दिया था।

मई 2022 में अल्मोड़ा में दलित दूल्हे को घोड़े से उतरने पर मजबूर किया गया। सितंबर 2022 में चंपावत में विवाह समारोह में ऊंची जाति के लोगों के साथ भोजन करने पर दलित की पीटकर हत्या करने का आरोप लगा था। 9 जनवरी 2023 को उत्तरकाशी के एक मंदिर में प्रवेश करने पर दलित युवक को बुरी तरह पीटा गया। इस मामले में 5 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।

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