यूपी: थाने में फांसी लगाने वाले दलित युवक की इलाज के दौरान मौत, पुलिस पर थे गंभीर आरोप, जानिए पूरा मामला!

थाने में फांसी लगाने वाले दलित युवक की इलाज के दौरान मौत के बाद पुलिस विभाग सकते में. पुलिस को पैसे न देने पर सप्ताह भर प्रताड़ित करने का लगा था आरोप.
यूपी: थाने में फांसी लगाने वाले दलित युवक की इलाज के दौरान मौत, पुलिस पर थे गंभीर आरोप, जानिए पूरा मामला!

उत्तर प्रदेश। कासगंज जिले में एक दलित युवक ने थाने में फांसी लगा ली थी। आज देर शाम उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई है। पुलिस युवक को एक युवती के लापता होने पर पूछताछ के लिए थाने लेकर गई थी। परिजनों का आरोप था कि युवती को उसी दिन बरामद कर पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया था। इसके बावजूद भी पुलिस ने उसे असंवैधानिक तरीके से हिरासत में रखा था। पुलिस लगातार युवक को प्रताड़ित कर रही थी, साथ ही थाने से छोड़ने के लिए पैसे की मांग कर रही थी।

इस मामले में डीआईजी ने एसएचओ (थाना प्रभारी) और आइओ (जांच अधिकारी) को लापरवाही बरतने पर निलंबित कर दिया था। साथ ही पुलिसकर्मियों सहित अन्य पर मुकदमा भी दर्ज किया गया था। युवक के शव को उसके घर ले जाया जा रहा है। युवक के मौत की खबर से तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। सूत्रों के मुताबिक तनाव की स्थिति को देखते हुए मौके पर एटा और अलीगढ़ जिले से भी पुलिस बुलाई गई है। गांव छावनी में तब्दील हो गया है।

कासगंज जिले के अमांपुर थाना क्षेत्र में बीते 9 फरवरी को रसलुआ सुलहपुर गांव के रहने वाले दलित युवक गौरव ने थाने के शौचालय में फांसी लगा ली थी। पुलिस ने कहा था कि गौरव ने आत्महत्या करने का प्रयास किया था। इसके बाद पुलिस युवक को कासगंज जिला अस्पताल ले गयी थी। गौरव की हालत को नाजुक देखते हुए उसे अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया था। पुलिस के अनुसार तब से उसका इलाज अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में ही चल रहा था। गौरव जाटव के बहनोई मान सिंह ने फोन पर बातचीत में कहा कि बुधवार को गौरव ने अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ दिया।

परिजनों के मुताबिक कासगंज पुलिस ने गौरव जाटव को एक लड़की के अपहरण के आरोप में बीते हिरासत में लिया था। परिजनों का कहना है युवती को उसी दिन बरामद कर उसके परिजनों को सौंप दिया गया था। इसके बावजूद भी पुलिस गौरव को असंवैधानिक रूप से थाने में बैठाये हुई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि पुलिस गौरव को छोड़ने के लिए पैसे की मांग कर रही थी। रकम न देने पर पुलिस ने उसे सप्ताह भर थाने में बैठाये रखा और मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया था।

आरोप है कि पुलिस लगातार युवक को यातनाएं दे रही थी। इससे तंग आकर गौरव ने बीते 9 फरवरी को उसने थाने की टॉयलेट में आत्महत्या की कोशिश की थी। जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसे फंदे से उतारा और इलाज के लिए कासगंज जिला अस्पताल लेकर गए थे। युवक की हालत गंभीर थी। जब पुलिस कस्टडी में सुसाइड की कोशिश की बात गौरव जाटव के परिवार और ग्रामीणों को पता चली, तो भीड़ मौके पर जुट गई थी। इसके बाद भीड़ ने पथराव किया था। इस पथराव में एक पुलिसकर्मी घायल हो गया था। कासगंज में बवाल बढ़ने के कारण कई थानों का पुलिस मौके पर पहुंची थी। पुलिस को बलप्रयोग कर लोगों को खदेड़ना पड़ा था। काफी देर के बाद हालात पर काबू पाया जा सका था।

पुलिकर्मियों पर दर्ज हुआ था मुकदमा

इस मामले में अधिकारियों के आदेश पर पुलिस ने परिजनों कि तहरीर पर वीरपाल, श्याम सिंह और अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ आईपीसी की धारा-323 (जानबूझकर किसी को चोट पहुँचाना) और 343 (तीन दिन से अधिक के लिए कैद में रखना) के तहत मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले में डीआईजी शलभ माथुर ने कार्रवाई करते हुए अमापुर कोतवाली के एसएचओ यतींद्र कुमार और जांच अधिकारी गया प्रसाद को पहले ही सस्पेंड कर दिया था।

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