तिरुवनंतपुरम। केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने सोमवार को एक बड़ा आश्वासन दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि एर्नाकुलम जिले के परियाथुकावु निवासियों से जुड़े लंबे समय से लंबित भूमि विवाद को सुलझाने की प्रक्रिया में किसी भी दलित परिवार को बेघर नहीं होने दिया जाएगा।
कैबिनेट बैठक के बाद इस संवेदनशील मुद्दे पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने वामपंथी दलों की आलोचनाओं का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य ध्यान प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर है, भले ही कानूनी मजबूरी के कारण बेदखली की कार्रवाई करनी पड़े।
दरअसल, एक निजी पक्ष द्वारा सुप्रीम कोर्ट से बेदखली का आदेश हासिल किया गया था, जिसके बाद केरल हाई कोर्ट ने भी जमीन खाली कराने का निर्देश दिया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सतीशन ने कहा कि अदालत के आदेश पर अमल होने की स्थिति में सरकार इन परिवारों को वैकल्पिक जमीन और घर मुहैया कराएगी, ताकि उन्हें सड़कों पर न भटकना पड़े।
इस दिशा में सरकार ने पहले ही महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) और वरिष्ठ कानूनी अधिकारियों के साथ बातचीत शुरू कर दी है। इसका मकसद मामले का कोई मानवीय और व्यावहारिक समाधान खोजना है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने महाधिवक्ता को अदालत से थोड़ा और समय मांगने का भी निर्देश दिया है।
परियाथुकावु का यह मामला एर्नाकुलम के किझक्कम्बलम के पास स्थित एक विवादित जमीन से जुड़ा है। यहां कई दशकों से दलित परिवार रह रहे हैं, जबकि कुछ निजी पक्ष इस जमीन पर अपना मालिकाना हक जताते रहे हैं।
अदालत द्वारा स्वामित्व के आधार पर जमीन खाली कराने के आदेश के बाद से यह विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बार-बार बेदखली की नाकाम कोशिशों और परिवारों के पुनर्वास की मांग ने इसे राज्य में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है।
पिछली सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें यह देखकर हैरानी हुई कि पिछली कैबिनेट के दो पूर्व मंत्री वहां विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह सब नई सरकार के शपथ ग्रहण के ठीक अगले दिन हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि निवासियों को हटाने का यह 15वां प्रयास था। पिछली वामपंथी सरकार के कार्यकाल में अदालत के निर्देश पर 14 बार लोगों को बेदखल करने की कोशिश की गई थी, लेकिन पुनर्वास को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था।
सतीशन ने जोर देकर कहा कि यह एक निजी व्यक्ति द्वारा दायर किया गया भूमि विवाद है। उन्होंने आरोप लगाया कि वामपंथी सरकार ने इस समस्या को सुलझाने के लिए एक छोटी सी पहल तक नहीं की, लेकिन हमारी सरकार ने सत्ता में आते ही अगले दिन इस पर संज्ञान लिया।
विवाद को सुलझाने के लिए सरकार ने तुरंत उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन को एर्नाकुलम भेजा ताकि वे विरोध कर रहे परिवार के सदस्यों से सीधे बात कर सकें। मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि सरकार ने सभी विकल्पों की समीक्षा की है और यह तय किया है कि अगर अदालती आदेश लागू भी होता है, तो प्रभावित आठ परिवारों के सिर से छत नहीं छिनेगी।
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