कर्नाटक: रोहित वेमुला बिल जो लगाएगा कैंपस में जातिवाद पर पूरी लगाम!

इस विधेयक को 8 से 19 दिसंबर तक चलने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश किये जाने की उम्मीद है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि विधेयक मौजूदा कानूनों का पूरक बनेगा, न कि उनका विकल्प, और उच्च शिक्षा के संदर्भ में विशेष रूप से लक्षित होगा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि विधेयक मौजूदा कानूनों का पूरक बनेगा, न कि उनका विकल्प, और उच्च शिक्षा के संदर्भ में विशेष रूप से लक्षित होगा।Pic -Gaurilankeshnews
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बेंगलुरु- कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार जल्द ही रोहित वेमुला कानून लाने वाली है जो कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को पूरी तरह खत्म करने का प्रयास करेगा। विधेयक का नाम दस साल पहले हैदराबाद यूनिवर्सिटी के दलित छात्र रोहित वेमुला के नाम पर रखा गया है, जिनकी आत्महत्या ने पूरे देश में जातिवाद के खिलाफ बड़े आंदोलन खड़े कर दिए थे।

बिल का पूरा नाम The Karnataka Rohith Vemula (Prevention of Exclusion or Injustice) (Right to Education and Dignity) Bill, 2025 ( 'कर्नाटक रोहित वेमुला (बहिष्कार या अन्याय रोकथाम) शिक्षा और सम्मान का अधिकार विधेयक) है। यह विधेयक 8 से 19 दिसंबर तक चलने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है। सांसद और लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सपोर्ट के बाद बिल पर तेजी से काम हुआ है, और विशेषज्ञों का कहना है कि कानून बनने के बाद कैंपसों की फिज़ा ही बदल जाएगी।

उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव की समस्या लंबे समय से जड़ें जमाए हुए है, जहां दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़े वर्गों के छात्र-छात्राएं अक्सर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष उत्पीड़न का शिकार होते हैं। रोहित वेमुला की घटना इसका सबसे दर्दनाक उदाहरण थी, जब उन्होंने अपनी सुसाइड नोट में लिखा था कि 'मेरा जन्म ही मेरा घातक हादसा था'। इस विधेयक के पारित होने के बाद ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा बनेगा, जो न केवल व्यक्तिगत अपराधियों को सजा देगा बल्कि संस्थागत जिम्मेदारियों को भी सुनिश्चित करेगा।

विधेयक में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जाति के आधार पर होने वाले प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष और संस्थागत भेदभाव तथा उत्पीड़न को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध माना जाएगा। इसका मतलब है कि कोई भी शिकायत दर्ज होते ही पुलिस कार्रवाई शुरू हो जाएगी, और आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जा सकेगा, जो पारंपरिक कानूनों से कहीं अधिक कठोर है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रावधान कैंपस प्रशासकों को जवाबदेह बनाएगा, जो अक्सर ऐसी शिकायतों को दबा देते हैं या जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।

हर उच्च शिक्षा संस्थान में 'समानता समिति' बनानी होगी, जो यौन उत्पीड़न की शिकायत समिति जैसी काम करेगी। कोई छात्र, टीचर या कर्मचारी भेदभाव किये जाने की स्थिति में समिति में शिकायत कर सकता है। जांच के बाद मामला कोर्ट जा सकता है, जहां माफी, मुआवजा या रोक लगाई जा सकती है। एससी-एसटी लोगों को खास अधिकार मिलेंगे जैसे जातिवादी कार्यक्रमों में न जाना, जातिवादी किताबों को बदलने की मांग करना या अपनी पहचान छिपाने का अधिकार होगा। बहुजन चिंतकों का कहना है कि इससे छात्र बिना डर के जातिवाद के खिलाफ बोल सकेंगे, और नतीजों का डर नहीं रहेगा। कैंपस की संस्कृति धीरे-धीरे बदलेगी।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि विधेयक मौजूदा कानूनों का पूरक बनेगा, न कि उनका विकल्प, और उच्च शिक्षा के संदर्भ में विशेष रूप से लक्षित होगा।
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कौन थे रोहित वेमुला जिसके नाम पर बनेगा कानून

26 वर्षीय दलित छात्र रोहित चक्रवर्ती वेमुला हैदराबाद सेंट्रल युनिवर्सिटी के पीएचडी छात्र थे जिसने 17 जनवरी 2016 को युनिवर्सिटी के होस्टल के एक कमरे में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी थी. उनकी आत्महत्या का मामला लंबे वक़्त तक सुर्खियों में रहा और आज भी इस बारे में बात होती है. रोहित युनिवर्सिटी में आंबेडकर स्टूडेंट्स असोसिएशन के सदस्य थे. वो कैंपस में दलित छात्रों के अधिकार और न्याय के लिए भी लड़ते रहे थे और छात्र राजनीति में काफी सक्रिय थे। कई आंदोलनों में हिस्सा लिया था, लगातार बयानबाजी करते थे।

इसी कड़ी में 2015 में उन पर और उनके कुछ साथियों पर आरोप लगा कि उन्होंने एबीवीपी के सदस्य पर हमला किया। उस हमले को लेकर एक्शन हुआ और इन सभी छात्रों को हॉस्टल से बाहर निकालने का आदेश जारी हुआ। उस आदेश के बाद ही रोहित वेमुला की आत्महत्या की खबर आ गई और पूरे देश में आक्रोश फैल गया। विपक्ष ने तब आरोप लगाया था कि स्मृति ईरानी, सांसद बंगारू दत्तात्रेय और एबीवीपी के कई सदस्यों के उकसाने के बाद ही वेमुला ने इतना बड़ा कदम उठाया।

कर्नाटक में रोहित वेमुला कानून बनाने की पहल यूँ हुई

यह विधेयक कांग्रेस के 2023 चुनावी वादे का हिस्सा था। अप्रैल 2025 में कांग्रेस नेता और सांसद राहुल गांधी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को एक पत्र लिखकर रोहित वेमुला एक्ट लागू करने की मांग की है। 16 अप्रैल को लिखे पत्र में गांधी ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर के अनुभवों का हवाला देते हुए दलित, आदिवासी और ओबीसी छात्रों द्वारा आज भी झेले जा रहे अपमान और भेदभाव को उजागर किया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लिखे जवाबी पत्र में कहा, "मैंने अपने कानूनी सलाहकार और टीम को रोहित वेमुला एक्ट का मसौदा तैयार करने का निर्देश दिया है। यह कानून शिक्षण संस्थानों में भेदभाव के खिलाफ एक सख्त चेतावनी होगा।"

इसके बाद राहुल गांधी ने अन्य कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी पत्र लिखा, जिसमें रोहित के नाम पर ऐसा कानून लाने को कहा।

कर्नाटक कैबिनेट ने अब बिल तैयार कर लिया है जो विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश होने वाला है। समर्थक कहते हैं कि यह रोहित की याद को जीवित रखेगा और कमजोर छात्रों को बचाएगा। भाजपा इसे राजनीति का हथियार बताती है और कहती है कि जातिगत भेदभाव रोकने के लिए पुराने एससी-एसटी कानून पर्याप्त हैं और यह कानून उल्टा भेदभाव ला सकता है। लेकिन कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कानून पुराने कानूनों (खासकर शिक्षा के क्षेत्र में) को प्रभावशाली बनाएगा ।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि विधेयक मौजूदा कानूनों का पूरक बनेगा, न कि उनका विकल्प, और उच्च शिक्षा के संदर्भ में विशेष रूप से लक्षित होगा।
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नये कानून में सजा के सख्त प्रावधान

रोहत वेमुला के नाम पर बने इस बिल में सजा के प्रावधान भी कड़े हैं, जो भेदभाव को मामूली गलती समान ट्रीट नहीं होने देंगे। पहली बार अपराध पर एक साल जेल और 10 हजार जुर्माना, दोबारा करने पर तीन साल जेल और एक लाख जुर्माना। कॉलेजों के लिए तो और सख्ती है - अगर वे जाति, लिंग या अन्य आधार पर भेदभाव करें, तो एक लाख से दस लाख तक जुर्माना। यह फंडिंग या मान्यता पर असर डालेगा, इसलिए संस्थान अपनी पॉलिसी सुधारेंगे।

जानकार कहते हैं कि हॉस्टल, ग्राउंड या क्लास - कहीं भी भेदभाव नहीं चलेगा। प्रशासन बहाने नहीं बना पाएगा। इस विधेयक के पारित होने के बाद संस्थानों को अपनी पाठ्यचर्या, आयोजन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की समीक्षा करनी पड़ेगी ताकि जातिवादी पूर्वाग्रहों को मजबूत करने वाली कोई भी प्रथा न रहे। उच्च शिक्षा विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक कानून बनने पर सभी कॉलेजों को समिति बनानी पड़ेगी और जागरूकता कैंप लगाने होंगे। इससे कैंपस समावेशी और समानता वाले बनेंगे।

एक दलित अधिकार कार्यकर्ता ने कहा कि यह कानून छात्रों को सशक्त बनाएगा जो शिक्षा और पढ़ाई प्रभावित होने के भय से मुक्त होकर अपनी आवाज बुलंद कर सकेंगे। कर्नाटक के कॉलेजों में पहले से ही कुछ समितियां हैं, लेकिन वे प्रभावी नहीं रहीं; नया विधेयक इन्हें पैनापन देगा।

रोहित वेमुला विधेयक से कर्नाटक के कॉलेजों में नई शुरुआत होगी। जाति की रुकावटें टूटेंगी। यह जातिगत मानसिकता वालों में सजा का भय जगायेगा और अच्छे बदलाव लाएगा। शीतकालीन सत्र में बिल पर जोरदार बहस हो सकती है लेकिन अगर ये पास हो गया तो देश के लिए मिसाल बनेगा।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि विधेयक मौजूदा कानूनों का पूरक बनेगा, न कि उनका विकल्प, और उच्च शिक्षा के संदर्भ में विशेष रूप से लक्षित होगा।
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