
दलित समुदायों से जुड़े अहम मुद्दों और उनके अधिकारों की रक्षा को लेकर गुरुवार को जनसंगठनों ने कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। कुला विवक्षा व्यतिरेक पोराटा संघम (केवीपीएस), सीटू और अन्य सहयोगी संगठनों ने एकजुट होकर प्रशासन के सामने अपनी आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि आज भी समाज के एक बड़े वर्ग को बुनियादी सुविधाओं और न्याय के लिए लगातार कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है।
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे केवीपीएस के राज्य महासचिव अंद्रा मालयाद्री ने मौजूदा हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि दलितों को आज भी गंभीर जातीय भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, हिरासत में मौतें, हत्याएं, यौन हिंसा, जातीय दुर्व्यवहार और ऑनर किलिंग जैसी अमानवीय घटनाएं अब भी समाज में लगातार घटित हो रही हैं।
मालयाद्री ने बताया कि केवीपीएस, सीटू और अन्य संगठनों ने हाल ही में 'सामाजिक शंखरावम' कार्यक्रम के तहत राज्य भर में एक महीने का लंबा सर्वेक्षण किया था। इसी सर्वे के जरिए जमीनी स्तर पर दलितों की उन तमाम गंभीर समस्याओं का खुलासा हुआ है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
आंध्र प्रदेश एग्रीकल्चरल वर्कर्स यूनियन के राज्य महासचिव के. लोकनाधम ने सरकारी योजनाओं की विफलता पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट किया कि दलितों के उत्थान के लिए बनी कई कल्याणकारी योजनाएं जमीनी स्तर पर लागू ही नहीं हो रही हैं।
हालात यह हैं कि कई दलित बस्तियां आज भी पीने के पानी, बिजली, पक्की सड़कों और जल निकासी (ड्रेनेज) जैसी मूलभूत सुविधाओं को तरस रही हैं। लोकनाधम ने एक बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि विकास परियोजनाओं की आड़ में उन जमीनों को वापस छीना जा रहा है, जो पहले दलितों को आवंटित की गई थीं।
वहीं, सीटू के विशाखापत्तनम जिला महासचिव आरकेएसवी कुमार ने वित्तीय सहायता और रोजगार के मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि एससी कॉर्पोरेशन के माध्यम से मिलने वाले ऋण अब पूरी तरह से बंद कर दिए गए हैं। इसके अलावा अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देने के लिए मिलने वाली प्रोत्साहन राशि पर भी रोक लगा दी गई है, जो बेहद निराशाजनक है।
इन तमाम समस्याओं को उठाते हुए आंदोलनरत संगठनों ने सरकार से मुफ्त बिजली और बुनियादी सुविधाएं जल्द से जल्द मुहैया कराने की मांग की है। साथ ही एससी/एसटी वर्ग की बैकलॉग रिक्तियों को तत्काल भरने की भी सख्त अपील की गई।
इस महत्वपूर्ण विरोध प्रदर्शन में अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (AIDWA) और भारत की जनवादी नौजवान सभा (DYFI) के प्रतिनिधियों ने भी अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराकर दलित समुदाय की मांगों का पुरजोर समर्थन किया।
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