
कोयंबटूर: सिक्कलमपालयम में श्मशान घाट की जमीन पर हुए अवैध अतिक्रमण को लेकर दलित समुदाय के एक समूह ने सोमवार को कोयंबटूर के जिला कलेक्टर पवनकुमार जी. गिरियप्पनवार को ज्ञापन सौंपा। समुदाय ने प्रशासन से 74 सेंट (जमीन मापने की इकाई) अतिक्रमित भूमि को जल्द से जल्द मुक्त कराने की अपील की है। यह जमीन सिक्कलमपालयम और वडापुदुर गांवों के अनुसूचित जाति समुदाय के श्मशान घाट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
महज 10 सेंट जमीन पर शव दफनाने को मजबूर
कलेक्टर को दी गई याचिका में दलित समुदाय ने बताया कि इस श्मशान घाट का मूल क्षेत्रफल 84 सेंट हुआ करता था। लेकिन कुछ लोगों द्वारा जमीन के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लेने के बाद, हालात इतने खराब हो गए हैं कि अब समुदाय को शवों को दफनाने के लिए केवल 10 सेंट बची हुई जमीन पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।
एक दशक पुराना है अतिक्रमण का खेल
सोलावमपालयम ग्राम पंचायत के वार्ड नंबर 7 के पूर्व सदस्य पी. नागराज ने इस मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में भी यह जमीन स्पष्ट रूप से श्मशान घाट के तौर पर दर्ज है। उन्होंने बताया कि करीब एक दशक पहले कुछ लोगों ने इस जमीन पर कूड़ा डंप करना शुरू किया था। धीरे-धीरे उन्होंने ट्रकों और अन्य भारी वाहनों के लिए मैकेनिक शेड स्थापित करके वहां अपना कब्जा जमा लिया।
बहानेबाजी करते हैं अतिक्रमणकारी
नागराज ने बताया, "अतिक्रमण करने वाले लोग श्मशान की जमीन पर अपने ट्रक खड़े करते हैं। जब भी दलित समुदाय के लोग उनसे वाहन हटाने का आग्रह करते हैं, तो उनका रटा-रटाया जवाब होता है कि ये गाड़ियां किसी और की हैं। उनके इस रवैये के कारण हमारे लोग केवल बची हुई 10 सेंट जमीन का ही इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।"
2020 में भी हुआ था प्रदर्शन, वादे रहे अधूरे
सिक्कलमपालयम और वडापुदुर गांवों में 500 से अधिक दलित परिवार निवास करते हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर समुदाय ने साल 2020 में एक विरोध प्रदर्शन भी किया था। उस समय खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) ने क्षेत्र का दौरा किया था और वादा किया था कि सरकार पूरी 84 सेंट जमीन के चारों ओर चारदीवारी का निर्माण करेगी ताकि उसे सुरक्षित रखा जा सके।
नागराज ने निराशा जताते हुए कहा, "सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। जब भी हम अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठाते हैं, वाहन मालिक कुछ समय के लिए मैदान से अपने वाहन हटा लेते हैं ताकि यह साबित कर सकें कि उन्होंने कोई जमीन नहीं घेरी है।"
प्रशासन का नया आश्वासन
ज्ञापन सौंपे जाने के बाद, जिला प्रशासन के अधिकारियों ने याचिकाकर्ताओं को भरोसा दिलाया है कि उनकी शिकायत पर गंभीरता से उचित कार्रवाई की जाएगी और जल्द ही श्मशान घाट से अतिक्रमण को हटा दिया जाएगा।
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