राजस्थानः संविधान की बुनियाद पर विकसित किया हाशिए का नेतृत्व

‘नेतृत्व के रंग उम्मीदों के संग’ ग्रासरूट लीडरशिप फेस्टिवल आयोजित, 150 संस्थाओं के 450 ग्रासरूट लीडर हुए शामिल।
जयपुरः राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में मौजूद प्रतिभागी।
जयपुरः राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में मौजूद प्रतिभागी।The Mooknayak

जयपुर. राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में गत मंगलवार को विभिन्न संस्थाओं और कोरो इंडिया की ओर से ‘नेतृत्व के रंग उम्मीदों के संग’ ग्रासरूट लीडरशिप फेस्टिवल आयोजित किया गया। फेस्टिवल में जोधपुर, अजमेर, कोटा, जैसलमेर सहित कई जिलों में काम कर रही 150 संस्थाओं के 450 ग्रासरूट लीडर शामिल हुए।

कार्यक्रम में लीडर्स ने अनुभव साझा कर संघर्ष को बताया। साथ ही सामाजिक बदलाव से जुड़ी कहानियों का भी जिक्र किया। फेस्टिवल में विभिन्न समुदायों की ओर से जातिगत, सामाजिक, लैंगिक आधार पर होने वाले भेदभाव की कहानियों को कला के माध्यम से साकार किया गया। कलाकारों ने अपनी कला व संस्कृति से संविधान का महत्व, इतिहास व अधिकारों के बारे में बताया।

कार्यक्रम में मौजूद प्रतिभागी।
कार्यक्रम में मौजूद प्रतिभागी।The Mooknayak

कार्यक्रम से जुड़े बाबूलाल नागा ने बताया कि पिछले एक दशक में राजस्थान में जमीनी स्तर पर नए नेतृत्व के साथ एक बड़ी और जीवंत प्रक्रिया उभरी है। इस प्रक्रिया का नेतृत्व करने वाले ऐसे ग्रासरूट लीडर हैं जो हाशिये पर रहने वाले समुदायों में स्थानीय मुद्दों से निपटने के लिए एक समुदाय-आधारित दृष्टिकोण विकसित कर रहे हैं। ये सभी ग्रासरूट लीडर विभिन्न मुद्दों को संबोधित करके व्यापक स्तर पर सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया में पहल कर रहे हैं। इस फेस्टिवल के माध्यम से राजस्थान में हुए ग्रासरूट कार्यों, अनुभवों को एक दूसरे के साथ साझा किया गया।

बाबूलाल नागा ने आगे बताया कि इनमें से कुछ ग्रास रूट लीडर हैं, जिनकी कहानी बहुत प्रेरक है। अजमेर जिला निवासी निरमा ने दिव्यांग होते हुए भी अपने कार्यक्षेत्र में बहुत से बदलाव किए। वार्ड पंच निर्वाचित होकर खुद की पहचान बदल ली। वह वर्तमान में भी दिव्यांगों के मुद्दों पर काम कर रही हैं। साथ ही महिला सशक्तिकरण और संवैधानिक मुद्दों पर मुखर होकर कार्य कर रही हैं।

अजमेर निवासी चीता महारात समुदाय के अत्यंत संवेदनशील मुद्दों से जुड़ी हैं। चिता 2022-23 में अपने कार्यक्षेत्र में धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा देते हुए संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को स्थापित करने हेतु कार्य कर रही हैं। साथ ही साथ थियेटर आफ ऑपरेस्ड एवं संविधान सेंटर के कार्य को बहुत ही खूबसूरती के साथ आगे बढ़ा रही हैं।

सांस्कृतिक प्रस्तुति देते प्रतिभागी।
सांस्कृतिक प्रस्तुति देते प्रतिभागी।The Mooknayak

कोटा के रण सिंह ने अपने क्षेत्र में आदिवासी संगठन बना कर अपने गांव के स्कूल में मिड-डे-मिल में होने वाले भेदभाव को समुदाय और सक्रिय समूह के सहयोग से खत्म किया। अरुणा जोधपुर जिले के शहरी क्षेत्र में काम करती है। उनके कार्यों के द्वारा महिलाओं की लीडरशिप निकलकर आई है। जोधपुर संभाग में इनके काम से एक महिला संगठन भी तैयार हुआ है सावित्रीबाई फुले। अरुणा ने अपनी कार्यो के दौरान दलित मुद्दों व महिला मुद्दों को लेकर भी महिलाओं की लीडरशिप को निकालना और साथ में खुद के अंदर जो बदलाव लाया है, खुद के परिवार में वह बदलाव लाए हैं उसको लेकर आज भी अपने परिवार के साथ संघर्ष कर रही है।

सरकार से दो बीघा जमीन आवंटित कराई

फेस्टिवल में कालबेलिया समुदाय के नारूनाथ ने बताया कि उनके समाज समुदाय में किसी की मृत्यु हो जाने पर अंतिम संस्कार के लिए भूमि नहीं मिलती थी। श्मशान की जगह घर में ही उसका अंतिम संस्कार करना पड़ता था। उन्होंने समुदाय की आवाज को सरकार के समक्ष रखा और दो बीघा जमीन श्मशान भूमि के लिए आवंटित कराई।

कार्यक्रम संयोजन समिति से जुड़े दीपचंद माली ने बताया कि इस फेस्टिवल में ग्रासरूट नेतृत्व के सफर में इस प्रक्रिया से जुड़े संस्था/संगठनों और प्रेरकों एवं समुदाय के लोगों के संघर्षों, बदलाव और सफलता को साझा किया गया। फेस्टिवल में राजस्थान में जातिगत, सामाजिक, लैंगिक आधार पर होने वाले भेदभाव से जुड़ी कहानियों का ग्रासरूट लीडर द्वारा प्रस्तुतिकरण किया जाएगा। विभिन्न समुदाय द्वारा निर्मित ज्ञान और परम्परागत कला व संस्कृति को प्रदर्शित किया गया।

‘‘भेदों को भेदती कहानियां‘‘ पुस्तक का विमोचन

फेस्टिवल में राजस्थान में सामाजिक, जातिगत, लैंगिक आधार पर होने वाले विभिन्न भेदभाव से जुड़ी कहानियों के आधार पर पुस्तक ‘‘भेदों को भेदती कहानियां‘‘ का विमोचन हुआ। यह पुस्तक जमीनी स्तर पर भेदभाव की प्रकृति, प्रथाओं, संरचनाओं और राजनीति की खोज की दिशा में एक कदम है। इस पुस्तक में कुछ सहयोगियों की सच्ची कहानी बताने की कोशिश की है जो कोरो इंडिया के ग्रासरूट लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम (जीएलडीपी) का हिस्सा भी रहे हैं।

जयपुरः राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में मौजूद प्रतिभागी।
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