मानवाधिकार कार्यकर्ता हिमांशु कुमार पर लगाया 5 लाख का जुर्माना, जांच के भी दिए आदेश

हिमांशु कुमार, मानवाधिकार कार्यकर्ता / फोटो स्रोत- सोशल मीडिया
हिमांशु कुमार, मानवाधिकार कार्यकर्ता / फोटो स्रोत- सोशल मीडिया

सुप्रीम कोर्ट ने 13 साल पुराने मामले में बृहस्पतिवार को सुनाया फैसला।

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में काम करने वाले जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता हिमांशु कुमार (Human rights activist Himanshu Kumar) पर सुप्रीम कोर्ट ने पांच लाख का जुर्माना लगा दिया है। यह जुर्माना हिमांशु पर नक्सल विरोधी अभियान के दौरान छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की न्यायेतर हत्या की जांच को लेकर 13 साल पुरानी याचिका को खारिज करते हुए लगाया गया है। इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय ने यह जांच करने की भी इजाजत दी है कि नक्सल चरमपंथियों को बचाने के लिए कोर्ट का इस्तेमाल तो नहीं किया जा रहा है।

बृहस्पतिवार, 14 जुलाई 2022, को 13 साल पुरानी इस बहुचर्चित याचिका का निर्णय आने से पूर्व न्यायिक प्रक्रिया के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हुए हिमांशु कुमार ने गत बुधवार को अपने फेसबुक पेज पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा था कि, "कल सुप्रीम कोर्ट का फैसला आएगा। 16 आदिवासियों का पुलिस ने कत्ल किया था। डेढ़ साल के बच्चे का हाथ काट दिया था। मामला छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के गोमपाड़ गांव का है। मैं और आदिवासियों के रिश्तेदादर 2009 में सुप्रीम कोर्ट में इंसाफ मांगने आए थे। हमने 13 साल इंतजार किया। उम्मीद है कल इंसाफ मिलेगा।"

लेकिन बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता हिमांशु कुमार और 12 अन्य लोगों की तरफ से साल 2019 में दाखिल याचिका पर फैसला सुनाया। साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता कुमार को चार हफ्तों के अंदर पांच लाख रुपए का जुर्माना जमा करने के आदेश दिए।

बता दें कि, याचिकाकर्ता ने दंतेवाड़ा में साल 2009 में 17 आदिवासियों की हत्या के मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस व केन्द्रीय सुरक्षा बलों के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की थी। उन्होंने साल 2009 में दंतेवाड़ा जिले की तीन अलग-अलग घटनाओं में ग्रामीणों की मौत को लेकर अपनी तरफ से रिकार्ड किए गए बयानों के आधार पर याचिका दायर की थी। लगातार सुनवाई के बाद शीर्ष कोर्ट ने बीती 19 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 14 जुलाई को कोर्ट ने अपना यह फैसला सुना दिया।

फैसला आने से पूर्व जहां न्याय की आस में बैठे याचिकाकर्ता ने सकारात्मक निर्णय की उपेक्षा की थी वहीं आज बृहस्पतिवार को जब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया तो हिमांशु लिखते हैं कि, "मारे गए 16 आदिवासियों जिसमें एक डेढ़ साल के बच्चे का हाथ काट दिया गया था के लिए इंसाफ मांगने की वजह से जब सुप्रीम कोर्ट ने मेरा ऊपर पांच लाख का जुर्माना लगाया है, और छत्तीसगढ़ सरकार से कहा है कि वह मेरे खिलाफ धारा 2011 के अधीन मुकदमा दायर करें। मेरे पास पांच लाख तो क्या पांच हजार रूपए भी नहीं है। मेरा जेल जाना तय है।"

हिमांशु कुमार की याचिका को खारिज कर उनके खिलाफ पांच लाख की भारी भरकम राशि का जुर्माना लगाए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय पर सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। इधर, हिमांशु कुमार ने द मूकनायक से बताया कि फैसलों को लेकर वकीलों से कानूनी सलाह ली जा रही है।

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