
भोपाल। केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासियों और ग्रामीणों के अधिकारों की मांग को लेकर पिछले 18 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे जय किसान संगठन के नेता और 'चिता आंदोलन' के प्रमुख संयोजक अमित भटनागर ने गुरुवार को अपना आमरण अनशन स्थगित करने की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन का अंत नहीं, बल्कि संघर्ष के नए चरण की शुरुआत है। उन्होंने ऐलान किया कि अब वे 'न्याय सत्याग्रह' के माध्यम से गांव-गांव जाकर प्रभावित परिवारों के अधिकारों की लड़ाई लड़ेंगे और प्रशासन के हर वादे तथा कार्रवाई की निगरानी करेंगे।
अमित भटनागर ने कहा कि उनका आमरण अनशन अपने उद्देश्य की पहली सफलता प्राप्त करने के बाद स्थगित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने परियोजना से प्रभावित और सर्वे से छूटे हुए लोगों को शामिल करने की दिशा में सकारात्मक पहल की है। प्रशासन की ओर से ऐसा आदेश जारी किया गया है जिसके तहत छतरपुर जिले के सभी प्रभावित गांवों में टीमें जाकर उन लोगों का सर्वे करेंगी जिनके नाम अब तक सूची में शामिल नहीं हो सके हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में जय किसान संगठन के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे ताकि किसी पात्र व्यक्ति का नाम दोबारा न छूटे।
संघर्ष समाप्त नहीं हुआ, अब न्याय सत्याग्रह चलेगा
अनशन स्थगित करने की घोषणा करते हुए अमित भटनागर ने कहा कि 18 दिनों का आमरण अनशन अपने पहले उद्देश्य में सफल रहा है, लेकिन यह अंतिम जीत नहीं है। उन्होंने कहा कि आज से वे 'न्याय सत्याग्रह' का संकल्प लेते हैं और जब तक परियोजना के अंतिम पात्र व्यक्ति को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि वे गांव-गांव जाकर लोगों से मिलेंगे, प्रशासन के सकारात्मक प्रयासों में सहयोग करेंगे, लेकिन यदि किसी भी स्तर पर अन्याय या वादाखिलाफी हुई तो आंदोलन का अगला चरण भी शुरू किया जाएगा।
मां और आदिवासी महिलाओं ने नारियल पानी पिलाकर तुड़वाया अनशन
अमित भटनागर ने बताया कि 18वें दिन उनकी माता और आंदोलन से जुड़ी आदिवासी महिलाओं ने उन्हें नारियल पानी पिलाकर आमरण अनशन स्थगित कराया। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए बेहद भावुक क्षण था। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रशासन के सकारात्मक रुख के साथ-साथ आंदोलन में शामिल आदिवासी महिलाओं का नैतिक आग्रह भी उनके इस निर्णय का बड़ा कारण बना।
उन्होंने कहा कि छतरपुर और पन्ना जिले की कई आदिवासी महिलाओं ने आंदोलन के समर्थन में 'चूल्हा बंदी' की थी और स्वयं भी भोजन नहीं कर रही थीं। इन महिलाओं की पीड़ा और उनके आग्रह ने उन पर गहरा नैतिक दबाव बनाया। ऐसे में उन्होंने अनशन को स्थगित करने का निर्णय लिया, ताकि आंदोलन को नए स्वरूप में आगे बढ़ाया जा सके।
देशभर के सामाजिक कार्यकर्ताओं और कलाकारों ने किया समर्थन
अमित भटनागर ने बताया कि उनके आंदोलन को देशभर के सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरणविदों, किसान नेताओं, अधिवक्ताओं, राजनीतिक नेताओं और फिल्म जगत से व्यापक समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, सौम्या दत्ता, नीलम अलावालिया, कैलाश मीणा सहित कई प्रमुख हस्तियों ने लगातार आंदोलन का समर्थन किया और अनशन समाप्त करने की अपील की। उन्होंने यह भी बताया कि अभिनेत्री पूजा भट्ट सहित लगभग 400 फिल्मी हस्तियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों ने भी आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कई राजनीतिक नेताओं ने भी प्रभावित लोगों की मांगों को जायज बताते हुए आवाज उठाई।
अस्पताल से निकलते ही फिर गांवों का दौरा करेंगे
लगातार 18 दिनों तक आमरण अनशन पर रहने के कारण अमित भटनागर का स्वास्थ्य प्रभावित हुआ है और फिलहाल वे चिकित्सकीय निगरानी में अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की सलाह के अनुसार स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद वे सीधे प्रभावित गांवों का दौरा शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन अब केवल धरना स्थल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांव-गांव जाकर लोगों के अधिकारों की निगरानी और प्रशासनिक कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी।
'जहां सहयोग जरूरी होगा, वहां सहयोग करेंगे; जहां अन्याय होगा, वहां संघर्ष होगा'
अमित भटनागर ने कहा कि उनका संगठन किसी टकराव की राजनीति नहीं करता। यदि प्रशासन प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए ईमानदारी से काम करेगा तो जय किसान संगठन पूरा सहयोग देगा। लेकिन यदि कहीं भी विस्थापितों, आदिवासियों या किसानों के साथ अन्याय हुआ, पुनर्वास कानूनों का उल्लंघन हुआ या किसी पात्र व्यक्ति को उसके अधिकारों से वंचित किया गया, तो संगठन विरोध, प्रदर्शन और जनआंदोलन के लिए पूरी तरह तैयार रहेगा।
परियोजना को लेकर जारी है आंदोलन
गौरतलब है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर छतरपुर और पन्ना जिले के कई गांवों में लंबे समय से विरोध चल रहा है। आंदोलनकारी आरोप लगाते रहे हैं कि परियोजना से प्रभावित कई परिवारों का सही सर्वे नहीं हुआ, अनेक पात्र लोगों के नाम सूची से बाहर रह गए हैं और पुनर्वास, मुआवजा तथा वनाधिकार से जुड़े कई मुद्दे अब भी लंबित हैं। इन्हीं मांगों को लेकर जय किसान संगठन के नेतृत्व में 'चिता आंदोलन' चलाया जा रहा है। अब आमरण अनशन स्थगित होने के बाद यह आंदोलन 'न्याय सत्याग्रह' के रूप में नए चरण में प्रवेश कर गया है, जहां प्रशासनिक वादों की निगरानी और प्रभावित गांवों में जनसंपर्क अभियान प्रमुख रणनीति होगी।
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