"Surrender Certificate" का सच: निकोबार में आदिवासियों की जमीन छिनने की तैयारी?

आज हम आपको भारत के उस हिस्से में ले चलेंगे जो मुख्य जमीन से दूर, समंदर के बीच बसा है—अंडमान और निकोबार द्वीप समूह। यहाँ के आदिवासियों ने 2004 की सुनामी का कहर देखा था, लेकिन आज 22 साल बाद, उनके सामने सुनामी से भी बड़ी चुनौती खड़ी है। और इस बार यह खतरा कुदरत नहीं, बल्कि प्रशासन लेकर आया है। खबर आ रही है कि निकोबार के आदिवासियों पर उनकी ही पुश्तैनी जमीन को छोड़ने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उनसे एक 'Surrender Certificate' साइन करने को कहा जा रहा है। आखिर क्या है ये सरेंडर सर्टिफिकेट? और क्यों सरकार आदिवासियों से उनकी जमीन का त्याग चाहती है? आज के वीडियो में हम इसी बड़ी साजिश और कानूनी पेचीदगियों का पर्दाफाश करेंगे।"

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक की मदद करें

‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.

यहां सपोर्ट करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com