ग्राउंड रिपोर्ट: रायबरेली में युवक की निर्मम हत्या का वीडियो वायरल, घटना के तीन दिन बाद पुलिस ने करवाया पीड़ितों का मेडिकल!

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो, आरोपियों के हाथ में लाठी डंडे
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो, आरोपियों के हाथ में लाठी डंडे

उत्तर प्रदेश। रायबरेली जिले में पुलिस पर आरोप है कि लापरवाही के कारण मारपीट की घटना में एक शख्स की जान चली गई। इस मामले में पुलिस पर शुरू से ही हीलाहवाली करने के आरोप लग रहे हैं। लगभग तीन सप्ताह पहले मारपीट की इसी प्रकार की एक घटना हुई थी। उसके बाद 8 जुलाई को मारपीट की दूसरी वारदात घटी। इसमें एक व्यक्ति की लोहे के रॉड से पीटकर हत्या कर दी गई। इस मामले में पुलिस ने तीन दिन बाद मृतक के परिजनों का मेडिकल करवाया जिन्हें घटना के दौरान चोटें आई थी। हालांकि इस मामले में पुलिस ने पीड़ित परिवार की तहरीर पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में आरोपियों को बचाने की कोशिश की है। वहीं पुलिस ने घटना के दो घण्टे के भीतर ही आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजने का दावा किया है। 

जनिये क्या है पूरा मामला?

यूपी में रायबरेली के गुरुबख़्सगंज थाना क्षेत्र की अटौरा चौकी क्षेत्र में बजरंग बली मजरे अटौरा खुर्द गांव निवासी मृतक सुनील प्रजापति के भाई रमेश कुमार से द मूकनायक ने बात की। 

रमेश पूरी घटना का जिक्र करते हुए बताते हैं, "मेरे घर के सामने की जमीन को लेकर 1992 से संजय शुक्ला और उनके परिवार से मुकदमा चल रहा है। यह हमारे घर में आने-जाने का रास्ता है। इस जमीन से सटाकर संजय शुक्ला ने भूसा रखने का हाता बना रखा है। वह लगातार इस जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे थे। कई बार इसको लेकर हमने पुलिस और तहसील में प्रार्थना पत्र भी दिया। हम दोनों के बीच इस जमीन को लेकर पहले से ही मुकदमा चल रहा था। लेकिन संजय शुक्ला इस जमीन को जबरन कब्जा करने का प्रयास करते रहते थे।"

रमेश बताते हैं, "बीते 17 जून को संजय शुक्ला जबरन पक्की चरही (छोटे स्थान की ईंट की दीवाल से घेराबंदी) का निर्माण करने का प्रयास कर रहे थे। हमारे परिवार ने यह करने से रोका था। इसे लेकर दोनों पक्षों में मारपीट हुई थी। पुलिस ने आरोपियों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया था। वहीं हमारी तहरीर पर भाजपा नेता के कहने पर 23 जून को मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। पुलिस शुरुआत से ही आरोपियों की मदद कर रही थी। अब भी पुलिस ने 302 की जगह 304 का मुकदमा लिखा है।"

घटना के दिन क्या हुआ था!

रमेश ने बताया, "8 जुलाई को संजय शुक्ला, विनय शुक्ला, अजय शुक्ला और विकास शुक्ला घर के सामने आने-जाने वाले रास्ते को ट्रैक्टर से रौंद रहे थे। मेरे भाई सुनील प्रजापति ने उन्हें ऐसा करने से मना किया तो वह गाली-गलौच करने लगे। उसने जब इसका विरोध किया तो आरोपियों ने उसे दौड़ाकर लाठी-डंडों से पीटा। इसके बाद उनमें से एक ने लोहे की रॉड से उसके सिर पर हमला कर दिया। वह बेसुध होकर जमीन पर गिर गए। शोर- गुल सुनकर पूरा परिवार इकट्ठा होकर उनके इस हमले का विरोध करने लगा। इस पर आरोपियों ने पत्थर बरसाना शुरू कर दिए।"

दोनों पक्षो में हुई लड़ाई के दौरान क्षतिग्रस्त हुई मोटरसाइकिल
दोनों पक्षो में हुई लड़ाई के दौरान क्षतिग्रस्त हुई मोटरसाइकिल

इस मामले में द मूकनायक ने पूर्व प्रधान नन्द कुमार से बात की। वे बताते हैं, "मैं घर से बाजार के लिए निकला था। मेरे घर से सुनील के घर की दूरी 100 मीटर है। मैं जब प्राइमरी स्कूल की मोड़ पर पहुंचा तो देखा भीड़ लगी हुई है। मैं गया तो सुनील जमीन पर पड़ा हुआ था। गांव के लोग बीच-बचाव कर रहे थे।"

पूर्व प्रधान ने आरोप लगाया कि, "संजय शुक्ला ने गांव में खाली पड़ी आबादी की जमीन पर कब्जा कर लिया है। वह हर जगह खाली पड़ी जमीन पर कब्जा जमाने की कोशिश करता है। इसमें एक निजी चैनल का पत्रकार उसका साथ देता है। इस कारण पुलिस से शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती है।" हालांकि, द मूकनायक ने इस मामले में चैनल के पत्रकार से भी बात की, पत्रकार ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है।

घटना के दौरान मौके पर ईंट तोड़कर की गई थी पत्थरबाजी
घटना के दौरान मौके पर ईंट तोड़कर की गई थी पत्थरबाजी

पीड़ित को नहीं जानकारी किसने लिखी तहरीर, बस साइन कर दिया

इस मामले में घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा था। इससे रायबरेली पुलिस के हाथ-पांव फूल गए। अधिकारियों की फटकार के बाद हरकत में आई गुरुबख़्सगंज पुलिस अस्पताल में डटी रही। मृतक के भाई रमेश बताते हैं, "घटना के बाद पुलिस मुझसे मुकदमा लिखने के लिए लगातार दबाव बना रही थी। मेरे सामने पेपर पर तहरीर लिखकर आ गई। तहरीर किसने लिखी इसकी मुझे जानकारी नहीं है। मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था। मैं सदमे था। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। पुलिस ने मेरे सामने तहरीर पढ़वाई लेकिन मैं कोई भी निर्णय ले पाने में असमर्थ था। मुझे तहरीर पर साइन करने को बोला गया। मैंने कर दिया। इस घटना में चार लोगों ने मेरे भाई की पीटकर हत्या की है। बाद में कई और लोग आ गए जिन्होंने पथराव किया था। पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मेरी गुजारिश है कि मामला 304 की जगह 302 में दर्ज किया जाए।"

घटना के तीन दिन बाद गुरुबख़्सगंज थाने में मेडिकल कराने पहुंचे पीड़ित परिजन
घटना के तीन दिन बाद गुरुबख़्सगंज थाने में मेडिकल कराने पहुंचे पीड़ित परिजन

घटना के तीन दिन बाद कराया मेडिकल

इस मामले में द मूकनायक की टीम मंगलवार सुबह गुरुबख़्सगंज थाने पहुंच गई। पीड़ित परिवार थाने पर मौजूद था। घटना 8 जुलाई की थी लेकिन पुलिस ने मंगलवार 11 जुलाई को पीड़ितों को मेडिकल के लिए भेजा है। इस मामले में रमेश ने थानेदार से शिकायत करते हुए कहा, "हमारे परिवार के कई लोग घायल हुए हैं लेकिन पुलिस सिर्फ दो लोगों का मेडिकल करा रही है," मीडियाकर्मियों की मौजूदगी में पीड़ित द्वारा शिकायत करने पर थानेदार ने सभी का मेडिकल कराने का आदेश दे दिया। जिसके बाद 6 लोगों का मेडिकल किया गया।

क्या कहते हैं पुलिस अफसर?

इस मामले में थाना प्रभारी गुरुबख़्सगंज परवीर गौतम ने द मूकनायक प्रतिनिधि को बताया, "मामले में पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर चार नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दो घण्टे के भीतर आरोपियों को जेल भेज दिया है। लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।"

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