मध्य प्रदेश के अंतरिम बजट पर आदिवासी विधायकों ने क्या कहा?

सरकार की गलत नीतियों के कारण आदिवासी अपनी पहचान से खोकर मजदूर हो रहा है। बीजेपी सरकार के बजट ने पहले भी आदिवासियों को छला है, और आज भी छला है:- फुन्देलाल मार्को, विधायक
मध्य प्रदेश के अंतरिम बजट पर आदिवासी विधायकों ने क्या कहा?

भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकार के अंतरिम बजट पेश होने के बाद आदिवासी विधायकों की नाराजगी सामने आ रही है। विपक्ष के आदिवासी विधायकों का कहना है कि सरकार आदिवासी बहुल इलाकों पर ध्यान नहीं दे रही। विधानसभा में आदिवासी विधायक कमलेश्वर डोडियार ने आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य, रोजगार जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा है। 

सोमवार को विधानसभा में डॉ. मोहन सरकार का अंतरिम बजट (लेखानुदान) पेश किया गया। डिप्टी सीएम (वित्त) जगदीश देवड़ा ने विधानसभा के पटल पर वर्ष 2024-25 के लिए एक लाख 45 हजार करोड़ रुपए का लेखानुदान पेश किया। 

वर्तमान वित्तीय वर्ष के अंतरिम बजट में आदिवासी कल्याण के लिए 4287 करोड़ रुपए, लेखानुदान के माध्यम से विभागों को अप्रैल से जुलाई 2024 तक विभिन्न योजनाओं में खर्च के लिए राशि आवंटित की गई है।

सरकार का ध्यान आदिवासियों की ओर नहीं है: कमलेश्वर डोडियार, विधायक

विधानसभा में विधायक डोडियार ने गरीब आदिवासियों के लगातार पलायन, मज़दूरी की समस्या पर विशेष ज़ोर देने को कहा। डोडियार ने कहा कि, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर और धार सहित अन्य आदिवासी जिलों में शासकीय योजनाओं जैसे नल जल, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास, किसान निधि, लाड़ली बहना, संबल, आयुष्मान आदि योजनाओं में बेहिसाब भ्रष्टाचार हुआ है। 

आपको बता दें कि, लेखानुदान में नए प्रस्ताव और खर्च की नई मद शामिल नहीं है। वित्त मंत्री ने कहा कि, 'प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी पर काम कर रही है। लेखानुदान की प्राप्त राशि जुलाई में पेश होने वाले पूर्ण बजट में शामिल की जाएगी।'

आदिवासी विधायक केदार डावर ने आदिवासी इलाकों में तालाबों की केनाल पक्का करने के विषय को विधानसभा में उठाया. उन्होंने कहा कि, पानी की कमी के कारण आदिवासी किसान परेशान है। इसकी चिंता सरकार को करना चाहिए। फसलों में सिंचाई और पानी की व्यवस्था के लिए अतरिक्त बजट का प्रावधान होना चाहिए था। 

विधायक डावर ने कहा कि जनजातीय कार्य विभाग में अतिरिक्त बजट बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा आदिवासी छात्रों की छात्रवृत्ति बढ़ाने की मांग छात्रावासों की सीटें की मांग, स्कूल जर्जर हो गए उनकी मरम्मत के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान हो। 

द मूकनायक से बातचीत करते हुए आदिवासी विधायक फुन्देलाल मार्को ने बताया कि, "भाजपा सरकार आदिवासियों के मामले में कभी गंभीर नहीं रही है। लगातार आदिवासियों के खिलाफ आपराधिक घटनाएं सामने आ रहीं है। सरकार की गलत नीतियों के कारण आदिवासी अपनी पहचान खोकर मजदूर हो रहा है। बीजेपी सरकार के बजट ने पहले भी आदिवासियों को छला है और आज भी छला है।"

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