मध्य प्रदेश: पुलिस की प्रताड़ना से परेशान आदिवासी युवक ने की खुदकुशी! थाने का घेराव कर लोगों ने की यह मांग

रतलाम जिले के बाजना में पुलिस की पिटाई से दुखी होकर आदिवासी युवक ने खुदकुशी कर ली जिसके बाद गुस्साए लोगों ने बीते रविवार की शाम थाने में प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन करते ग्रामीण।
प्रदर्शन करते ग्रामीण।

भोपाल। देशभर में आदिवासियों पर सर्वाधिक अत्याचार मध्य प्रदेश में ही होते हैं, एनसीआरबी के आंकड़े भी यह बता रहे हैं। लेकिन इसके अलावा भी आदिवासियों के खिलाफ कई घटनाएं हैं, जो इन एजेंसियों के आंकड़ों में दर्ज नहीं हैं। हाल ही में पुलिस की प्रताड़ना से एक आदिवासी युवक ने आत्महत्या कर ली। यह घटना मध्य प्रदेश के रतलाम जिले की है।

दरअसल, रतलाम जिले के बाजना में पुलिस की पिटाई से दुखी होकर आदिवासी युवक ने खुदकुशी कर ली जिसके बाद गुस्साए लोगों ने बीते रविवार की शाम थाने में प्रदर्शन किया। परिजनों ने थाने में ही टेबल पर युवक का शव रखकर धरना प्रदर्शन किया। आक्रोशित आदिवासी समाज के लोगों ने कहा कि पूरे थाने का स्टाफ बदला जाए, नहीं तो हम थाने में ही शव का अंतिम संस्कार करेंगे।

क्या है पूरा मामला?

मामला रतलाम जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर बाजना थाना क्षेत्र के छावनी झोड़िया गांव का है। 25 जनवरी की रात 1.10 बजे 23 वर्षीय आदिवासी युवक गणेश मईडा अपने दोस्तों के साथ खड़ा था। इस दौरान बाजना थाने से डायल 100 की टीम पेट्रोलिंग पर गांव में आई थी। पुलिस की पेट्रोलिंग टीम ने युवकों से पूछताछ करते हुए पुलिस टीम में शामिल आरक्षक शफीउल्ला खान ने आदिवासी युवक को चांटे मार दिए।

बेवजह पुलिस द्वारा पीटे जाने से दुखी होकर युवक दूसरे दिन 26 जनवरी को थाने पहुंचा। उसने पुलिसकर्मियों से उसे पीटने का कारण पूछा। युवक ने उक्त पुलिस कर्मी पर कार्रवाई किए जाने की मांग भी की थी। मृतक युवक के परिजनों का कहना है कि  बिना किसी कारण के पुलिस कर्मियों द्वारा पीटने से वह दुखी था। घटना के बाद उसने खाना तक नहीं खाया, वह अपने साथ हुई घटना से परेशान था। जिसके बाद उसने 27 जनवरी की दोपहर डेढ़ बजे अपने घर पर फांसी लगा ली। उस समय घर पर उसकी विकलांग बहन थी, उसे कुछ भी पता नहीं चला। पिता बाजार गए थे। मां भी घर पर नहीं थी।

आदिवासी समाज ने किया प्रदर्शन

आदिवासी युवक के द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या करने के बाद, परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उसके साथ बेवजह मारपीट की थी, जिससे दुखी होकर उसने जान दे दी। इसके बाद शनिवार को भी गुस्साए लोगों ने कार्रवाई की मांग को लेकर बाजना थाने पर करीब 8 घंटे से ज्यादा समय तक प्रदर्शन किया था। जिसके बाद आरोपी पुलिसकर्मी को पहले निलंबित और फिर उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

रविवार की शाम आदिवासी समाज के लोग शव के पोस्टमार्टम के बाद, शव लेकर फिर थाने पहुँचे और यहां प्रदर्शन किया। आदिवासी समाज की मांग है कि पुलिस थाने के पूरे स्टाफ को हटा दिया जाए साथ ही मृतक के परिवार को आर्थिक मदद दी जाए। जिसके बाद प्रशासन ने मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता का चेक दिया, जिसके बाद धरना खत्म हुआ।

‘द मूकनायक’ से बातचीत करते हुए सैलाना क्षेत्र के उप पुलिस अधीक्षक (एसडीओपी) इडला मौर्य ने बताया कि छावनी झोड़िया गांव में रात के वक्त 100 डायल पेट्रोलिंग में गई थी। पेट्रोलिंग में शामिल आरक्षक ने युवक को एक-दो थप्पड़ मारे थे। हमने आरक्षक के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज किया है। युवक के द्वारा आत्महत्या के कारण का फिलहाल पता नहीं लगा है। मामले में जांच की जा रही है।

देशभर में एसटी पर अत्याचारों के मामले में एमपी टॉप पर

एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 में आदिवासियों के खिलाफ 2979 मामले सामने आए जो कि पिछले साल के क्राइम के मुकाबले में 13 फीसदी अधिक है। पिछले तीन सालों से मध्य प्रदेश आदिवासी अत्याचारों में टॉप पर बना हुआ है। 2,521 मामलों के साथ राजस्थान दूसरे और 742 मामलों के साथ महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर है।

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