
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का तीसरा दिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप, विरोध-प्रदर्शन और कई महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने के बीच बेहद हंगामेदार रहा। सदन के भीतर जहां दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई और कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की, वहीं सत्ता पक्ष ने इसे प्रदेश के अधिकार क्षेत्र से बाहर का विषय बताते हुए चर्चा से इनकार कर दिया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कांग्रेस विधायक काली पट्टी बांधकर विधानसभा पहुंचे और स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की। चर्चा की अनुमति नहीं मिलने पर कांग्रेस विधायकों ने जोरदार नारेबाजी की, जिसके चलते विधानसभा की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। पूरे दिन सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक का माहौल बना रहा।
सदन ने पांच महत्वपूर्ण विधेयकों पर लगाई मुहर
राजनीतिक हंगामे के बीच विधानसभा ने पांच महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित किया। इनमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) संशोधन विधेयक, मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक-2026, मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक-2026, मध्य प्रदेश माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक-2026 तथा मध्य प्रदेश निरसन विधेयक-2026 शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन विधेयकों से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी, जबकि विपक्ष ने कुछ संशोधनों पर गंभीर आपत्तियां भी दर्ज कराईं।
दिल्ली लाठीचार्ज पर चर्चा की मांग, सरकार ने कहा- यह प्रदेश का विषय नहीं
दिन की शुरुआत ही राजनीतिक टकराव से हुई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई और कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाते हुए सदन में तत्काल चर्चा कराने की मांग की। कांग्रेस विधायकों का कहना था कि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला हुआ है और विधानसभा को इस पर अपनी राय रखनी चाहिए। हालांकि संसदीय कार्य मंत्री राकेश सिंह ने स्पष्ट किया कि यह मामला मध्य प्रदेश सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, इसलिए इस पर विधानसभा में चर्चा उचित नहीं है। सरकार के इस रुख से नाराज कांग्रेस विधायकों ने सदन में विरोध प्रदर्शन किया, जिसके कारण कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।
केन-बेतवा परियोजना पर मुख्यमंत्री का बड़ा आश्वासन
विधानसभा में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। विपक्षी विधायकों ने आरोप लगाया कि परियोजना से प्रभावित लोगों को मुआवजा वितरण में अनियमितताएं हुई हैं और कई लोगों को उचित मुआवजा नहीं मिला। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि यदि कहीं भी अनियमितता या शिकायत सामने आई है तो सरकार पूरे मामले की दोबारा जांच कराएगी और पात्र लोगों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री के इस आश्वासन को परियोजना प्रभावित क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने
निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक पर सदन में लंबी बहस हुई। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने आरोप लगाया कि सरकार निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए 25 एकड़ भूमि और 5 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी अनिवार्य शर्तों को हटाकर शिक्षा के क्षेत्र का निजीकरण बढ़ावा दे रही है। उन्होंने इसे "काली नीति" बताते हुए कहा कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी। जवाब में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि संशोधन का उद्देश्य निवेश को प्रोत्साहित करना है और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक प्रावधान यथावत रहेंगे। उन्होंने दावा किया कि गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
चंबल सिंचाई परियोजना पर भ्रष्टाचार के आरोप
कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने चंबल क्षेत्र की 167 करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजना में गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि परियोजना का लाभ किसानों तक नहीं पहुंचा है और यदि सरकार यह साबित कर दे कि 12 हेक्टेयर क्षेत्र में भी प्रभावी सिंचाई हुई है तो वे विधायक पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं। सरकार ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि परियोजना के सभी कार्य निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किए गए हैं और यदि किसी प्रकार की शिकायत होगी तो उसकी जांच कराई जाएगी।
शिक्षकों की ई-अटेंडेंस पर सरकार की सफाई
विधानसभा में शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने बताया कि प्रदेश के लगभग 95.9 प्रतिशत शिक्षक नियमित रूप से ई-अटेंडेंस प्रणाली के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था में डेटा सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीकी उपाय अपनाए गए हैं और किसी भी शिक्षक की निजी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित है। सरकार का दावा है कि इससे विद्यालयों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हुई है।
मेडिकल यूनिवर्सिटी के बंटवारे पर जबलपुर और उज्जैन को लेकर तीखी बहस
मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने कहा कि जबलपुर स्थित लगभग 15 वर्ष पुरानी मेडिकल यूनिवर्सिटी का विभाजन करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उनका तर्क था कि देश के बड़े राज्यों में एक ही मेडिकल विश्वविद्यालय की व्यवस्था है और उज्जैन में पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण वहां मुख्यालय स्थापित करने के लिए निजी भूमि खरीदनी पड़ेगी, जिससे सरकारी खर्च बढ़ेगा। सरकार ने अपने फैसले को प्रशासनिक दृष्टि से आवश्यक बताते हुए कहा कि इससे चिकित्सा शिक्षा के विस्तार में मदद मिलेगी।
मंदसौर के किसानों के लंबित मुआवजे पर सरकार घिरी
कांग्रेस विधायक विपिन जैन ने मंदसौर जिले के करीब 15 हजार किसानों के 27.47 करोड़ रुपये के लंबित मुआवजे का मुद्दा सदन में उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से किसान अपने भुगतान का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार समाधान नहीं निकाल पा रही है। सरकार के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने विरोधस्वरूप सदन से वॉकआउट किया। विपक्ष ने इसे किसानों के साथ अन्याय बताया।
आदिवासी जमीनों के नामांतरण पर सरकार का बड़ा फैसला
विधायक हीरालाल अलावा ने आदिवासी समुदाय की जमीनों के अवैध नामांतरण का मुद्दा उठाया। इसके जवाब में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने सदन को भरोसा दिलाया कि जिन मामलों में बिना वैधानिक अनुमति के आदिवासी जमीन गैर-आदिवासियों के नाम दर्ज की गई है, ऐसे सभी नामांतरण निरस्त किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पात्र आदिवासी परिवारों को उनकी जमीन का कब्जा वापस दिलाने की कार्रवाई प्राथमिकता से की जाएगी।
पंचायत भवन निर्माण और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार की घोषणाएं
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने घोषणा की कि प्रदेश के जिन गांवों में अभी तक पंचायत भवन या सामुदायिक भवन नहीं हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर नए भवन बनाए जाएंगे। वहीं उच्च शिक्षा मंत्री ने विश्वविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा प्रणाली को लेकर कहा कि प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय से पेपर लीक की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि परीक्षा परिणाम समय पर घोषित करने के लिए डिजिटल वैल्यूएशन प्रणाली लागू की जा रही है, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी।
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