
नई दिल्ली: बुधवार को नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए हंगामे को लेकर पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। इस प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला करने, बाधा डालने और निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के गंभीर आरोपों में कई प्राथमिकियां (FIR) दर्ज की गई हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पहली एफआईआर पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डालने और उन पर हमले से संबंधित है।
वहीं, दूसरी एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत दर्ज की गई है, जो एक लोक सेवक के आदेश की विधिवत अवहेलना से जुड़ी है। तीसरी एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है, लेकिन उसके विस्तृत विवरण का अभी इंतजार है।
अधिकारियों ने बताया कि पुलिस मोबाइल फोन से बनाए गए वीडियो और फुटेज की बारीकी से जांच कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य उन लोगों की पहचान करना है जो महिला अधिकारियों और कांस्टेबलों सहित अन्य पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट में शामिल थे।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी सांसदों को चुनाव आयोग (EC) मुख्यालय की ओर मार्च करने से विंडसर प्लेस के पास रोक दिया गया।
सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में पुलिस अधिकारी प्रदर्शनकारियों को वहां से जाने के लिए समझाते हुए नजर आ रहे हैं, जिसमें यातायात और यात्रियों को हो रही परेशानी का हवाला दिया गया।
इसके विपरीत, कुछ अन्य वीडियो में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और हाथापाई साफ दिखाई दे रही है। पुलिस का आरोप है कि जब भीड़ को तितर-बितर करने का प्रयास किया गया, तो कुछ प्रदर्शनकारियों ने उनके जवानों के साथ हाथापाई की।
सांसदों को धरना स्थल से हटाने की कोशिश के दौरान दोनों पक्षों में भारी खींचतान हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने 91 लोगों को हिरासत में लिया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नई दिल्ली इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू थे।
इसी बीच, प्रदर्शन से जुड़े एक अन्य मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) की उस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई है। इस याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी गई है।
यह मामला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ के समक्ष तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए पेश किया गया था। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को निर्देश दिया है कि यदि शुक्रवार को सुनवाई नहीं हो पाती है, तो वे इस मामले को फिर से मेंशन कर सकते हैं।
भारतीय युवा कांग्रेस ने 25 सितंबर को दिल्ली पुलिस को एक आवेदन दिया था, जिसमें 1 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक जंतर-मंतर पर 100 से 150 लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगी गई थी। हालांकि, 1 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने एक संचार के माध्यम से इस मांग को खारिज कर दिया।
इसके बाद, 3 अक्टूबर को संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने पुलिस के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस याचिका में सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत नागरिकों को मिले मौलिक अधिकारों का हवाला दिया गया है।
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