राजस्थान: क्या बीजेपी के निशाने पर हैं दलित और अल्पसंख्यक समाज के शिक्षक?

राजस्थान: क्या बीजेपी के निशाने पर हैं दलित और अल्पसंख्यक समाज के शिक्षक?

सत्ता परिवर्तन के साथ ही दलित व मुस्लिम शिक्षकों के खिलाफ बढ़ी कार्रवाई, कर्मचारी संगठनों ने शिक्षा मंत्री व अधिकारियों पर दुर्भावना से वर्ग विशेष के कार्मिकों को टारगेट कर कार्रवाई के लगाए आरोप.

जयपुर। राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के बाद बीजेपी राज में दलित व मुस्लिम समुदाय के शिक्षकों के निलंबन की कार्रवाई बढ़ी है। मनगढ़ंत शिकायतों के आधार पर बिना किसी जांच के शिक्षकों का निलंबन किया जा रहा है। अब शिक्षा अधिकारियों पर सत्ता के दबाव में एक तरफ कार्रवाई के आरोप भी लगने लगे हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ग विशेष के अधिकारी कर्मचारियों को टारगेट करते हुए लव जिहाद, धर्मांतरण जैसे निराधार आरोपों के आधार पर बिना किसी जांच के कार्रवाई की जा रही है।

राजस्थान में बीते एक महीने में कोटा, बारां, जोधपुर, झालावाड़ जिलों में लगभग आधा दर्जन से अधिक मुस्लिम शिक्षकों पर निलंबन की कार्रवाई की गई है। राजस्थान अधिकारी कर्मचारी माइनॉरिटी एसोसिएशन (रकमा) के प्रदेश अध्यक्ष जाहिद अली ने इन कार्यवाहियों को द्वेषपूर्ण बताया है। द मूकनायक से बात करते हुए अली ने कहा कि एक ही समुदाय के एक साथ इतने कार्मिक तो दोषी नहीं हो सकते। शिक्षा मंत्री के मौखिक आदेश पर अधिकारी मुस्लिमों को प्रताड़ित करने के लिए नियम विरुद्ध कार्रवाई कर रहे हैं।

रकमा प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में प्रदेश पदाधिकारियों ने प्रमुख शासन सचिव नवीन जैन को एक ज्ञापन सौंप कर मनमानी कार्रवाइयों पर रोक लगाने की मांग की है। रकमा ने शिक्षकों के निलंबन को राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियम 1958 के आधार पर बिल्कुल नियम विरुद्ध बताया।

इन पर हुई कार्रवाई

रकमा ने प्रमुख शासन सचिव को बताया कि मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी समग्र शिक्षा कोटा ने ज्ञापन के आधार पर लव जिहाद, धर्मांतरण सहित जिहादी गतिविधियों में लिप्त होने के मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर 29 फरवरी को मुस्लिम महिला शिक्षक शबाना, अध्यापक फिरोज खान, शारीरिक शिक्षक मिर्जा मुजाहिद को निलंबित कर दिया।

इसी तरह जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक बारां ने 23 फरवरी को राउमावि फलदी किशनंगज में कार्यरत मुस्लिम महिला शिक्षक अकलीमा परवीन को मूल पद से दूर लगा दिया। संयुक्त निदेशक स्कूल शिक्षा जोधपुर के 25 जनवरी के आदेशों के अनुसार सीबीईओ व पीईईओ के साथ राउमावि पीपाड़ शहर-2 के व्याख्याता उर्दू चमन नूर को एपीओ कार्रवाई की गई। निदेशक माध्यमिक शिक्षा बीकानेर ने 24 फरवरी को मोहम्मद इस्लाम पुस्तकालय अध्यक्ष ग्रेड-3 राउमावि टोंक को एपीओ कर दिया। जिला शिक्षा अधिकारी झालावाड़ा ने 27 फरवरी को राउमावि गुराडिया कलां भवानी मंडी झालावाड़ा में पीटीआई अकील मोहम्मद को निलंबित कर मुख्यालय बाड़मेर कर दिया।

राजस्थान अधिकारी कर्मचारी माइनॉरिटी एसोसिएशन (रकमा) जैसलमेर जिला अध्यक्ष कासम खान ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री खुद सार्वजनिक रूप से प्रदेश के शिक्षकों में डर पैदा करने के लिए गैर संवैधानिक बयान दे रहे हैं। शिक्षा मंत्री के गैर संवैधानिक बयानों से शिक्षकों में डर का माहौल है। इससे शिक्षा विभाग की छवि भी धूमिल हुई है। साथ ही आरोप लगाया कि शिक्षण संस्थानों को राजनीतिक अखाड़ा बनाकर यहां पढ़ने वाले विभिन्न वर्ग, जाति व धर्म के बालक- बालिकाओं में द्वेष की भावना उत्पन्न कर विद्यालयों का वातावरण खराब किया जा रहा है।

कोटा के खजूरी स्कूल के तीन मुस्लिम शिक्षकों पर यह थे आरोप

आपको बता दें कि गत दिनों शिक्षा मंत्री मदन दिलावर बारां जिले के दौरे पर थे। इस दौरान सांगोद उपखण्ड के खजूरी आलोद गांव के कुछ लोगों ने शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंप कर राजकीय विद्यालय में कार्यरत एक महिला सहित तीन मुस्लिम शिक्षकों पर राजकीय विद्यालय में लव जिहाद, धर्मांतरण सहित इस्लामिक जिहादी, गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोप लगाए थे। ज्ञापन के आधार पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने शारीरिक शिक्षक मिर्जा मुजाहिद, फिरोज खान अध्यापक लेवल-1 व महिला शिक्षक शबाना लेवल-2 के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए।

आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी ने प्रकरण की जांच किए बिना ही तीनों शिक्षकों को निलंबित कर मुख्यालय निदेशालय बीकानेर कर दिया। अध्यापक फिरोज खान ने कहा कि यह कार्रवाई उन पर मुस्लिम होने के कारण की गई है। द मूकनायक से बात करते हुए खान ने कहा- "विद्यालय में 15 शिक्षक है, लेकिन केवल तीन मुस्लिम शिक्षकों को टारगेट कर कार्रवाई की गई।"

शिक्षक ने बताया कि विद्यालय में एक ही नाम की दो छात्राएं थीं। एक हिंदू व दूसरी मुस्लिम समाज से थी। हिंदू छात्रा ने 2019 में कक्षा 10वीं में प्रवेश लिया था। एक नाम की दो अलग अलग धर्मों की छात्रा होने से उस वक्त मानवीय भूल से किसी शिक्षक ने उसके नाम के आगे इस्लाम धर्म लिख दिया। इसके बाद 2022 में उक्त छात्रा कक्षा 12वीं उत्तीर्ण कर चली गई। वर्तमान में छात्रा का स्कूल से कोई लेना देना नहीं है। इसके बावजूद अक्टूबर 2023 में विद्यालय में नियुक्त होने वाली मुस्लिम शिक्षक शबाना सहित तीनों मुस्लिम शिक्षकों को केवल धर्म के कारण निलंबित किया गया।

ग्रामीणों की माने तो जिस छात्रा के धर्म परिवर्तन का आरोप लगाया है वह 5 फरवरी 24 को ही अपने मुस्लिम प्रेमी के साथ चली गई। पुलिस में मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस ने कार्रवाई की। वर्तमान में वह छात्रा कहां इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।

राजकीय माध्यमिक विद्यालय खजूरी आलोद के प्रधानाध्यापक कमलेश बैरवा ने द मूकनायक से कहा कि आरोप 2019 में हुई मानवीय भूल को लेकर लगाए गए हैं। मैं 2021 से पोस्टेड हूं। इतने दिन से हम स्कूल में हैं। कभी कोई धार्मिक गतिविधियां नहीं हुई। किसी को नमाज के पढ़ने के लिए नहीं कहा गया। किसी ने आरोप लगाए है तो अब जांच भी होगी।

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