यूपी: 5 मदरसा शिक्षकों को मानव तस्कर बता जेल भेजा, 10 महीने बाद पुलिस ने कहा- "गलती हुई"

बीते वर्ष 30 मई 2023 को गोपनीय सूचना पर पुलिस ने की थी कार्रवाई, अब मांगी माफ़ी.

बिहार से महाराष्ट्र 59 छात्रों के साथ जा रहे शिक्षकों को रेलवे पुलिस ने बना दिया था मानव तस्कर.
बिहार से महाराष्ट्र 59 छात्रों के साथ जा रहे शिक्षकों को रेलवे पुलिस ने बना दिया था मानव तस्कर. तस्वीर- फ़ाइल फोटो

दिल्ली। बिहार के अररिया से महाराष्ट के पुणे और सांगली ले जाए जा रहे 59 बच्चों सहित 5 शिक्षकों को गिरफ्तार कर लिया था। आरोप था कि पांच शिक्षक बिना माता-पिता की अनुमति के इन सभी बच्चों को ले जा रहे थे। शिक्षकों के खिलाफ मानव तस्करी का मुकदमा दर्ज किया गया। बच्चों को चाइल्ड लाइन भेज दिया गया था। वहीं एक माह जेल में रहने के बाद शिक्षकों को भी जमानत मिल गई। इस मामले में जब जांच शुरू हुई तो मामला उल्टा निकला। यह सभी बच्चे मदरसे में पढ़ाई के लिए जा रहे थे। अब पुलिस ने इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट लगाते हुए अपनी गलती मानी है।

दरअसल, पूरा मामला 30 मई, 2023 का है। बिहार के अररिया जिले के आठ से 17 साल की उम्र के 59 बच्चे अपने पांच शिक्षकों के साथ मदरसों में पढ़ने के लिए पुणे और सांगली जा रहे थे। ये सभी शिक्षक दानापुर-पुणे एक्सप्रेस में सवार थे। बच्चों को मजदूरी के लिए सप्लाई करने के शक में महाराष्ट्र के मनमाड और भुसावल रेलवे स्टेशनों पर राजकीय रेलवे पुलिस ने हिरासत में लिया था। दिल्ली में किशोर न्याय बोर्ड और रेलवे बोर्ड से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कार्रवाई करते हुए रेलवे सुरक्षा बल ने एक एनजीओ के साथ मिलकर इन बच्चों को ‘बचाया’ और शिक्षकों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ़्तारी के वक्त आरपीएफ अधिकारियों ने दावा किया था कि पांचों व्यक्ति अपनी यात्रा से जुड़े दस्तावेज़ नहीं दिखा पा रहे थे, जिसके रहते भारतीय दंड संहिता की धारा 370 (व्यक्तियों की तस्करी) और 34 (सामान्य इरादे) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। बच्चों को 12 दिनों के लिए नासिक और भुसावल के आश्रय गृहों में ले जाया गया। अधिकारियों को संदेह था कि उन्हें तस्करी के लिए ले जाया जा रहा है। जब उनके नाराज़ माता-पिता ने उनकी वापसी की मांग की तो बच्चों को नासिक जिला प्रशासन द्वारा बिहार वापस भेज दिया गया।

इस मामले में जब जांच शुरू हुई तो मामला उल्टा हो गया। जांच में पुलिस का कहना है शिक्षकों पर हुई एफआईआर एक गलतफहमी के कारण दर्ज की गई थी। मनमाड जीआरपी के इंस्पेक्टर शरद जोगदंड ने कहा कि हमने पाया कि बच्चों की तस्करी जैसा कोई मामला नहीं था और अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दायर कर दी गई थी।

शिक्षक अंजार आलम का दावा है कि उन्होंने तीन महीने जेल में बिताए। जबकि उनके साथी शिक्षक सद्दाम हुसैन सिद्दीकी, नोमान आलम सिद्दीकी, एजाज जियाबुल सिद्दीकी,और मोहम्मद शाहनवाज हारून ने 12 दिन पुलिस हिरासत में और 16 दिन नासिक जेल में बिताए।


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