
तेलंगाना के निजामाबाद जिले में मंगलवार (19 मई) को एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। प्रशासन ने आर्मूर मंडल स्थित ईंट भट्ठों पर छापेमारी कर 400 से अधिक मजदूरों को बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराया है। बचाए गए इन लोगों में करीब 100 मासूम बच्चे भी शामिल हैं।
यह कार्रवाई डेगाम (जिसे डेगांव भी कहा जाता है) गांव के चार ईंट भट्ठों पर की गई। यहां तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और ओडिशा के प्रवासी मजदूरों से बेहद अमानवीय और शोषणकारी परिस्थितियों में काम लिया जा रहा था।
अधिकारियों के अनुसार, मुख्य रूप से बीटीआर (BTR) ईंट भट्ठे के दो ठिकानों और उससे जुड़े एसएसवी (SSV) ईंट भट्ठे पर छापे मारे गए। इस अभियान को आर्मूर डिवीजन की तीन विशेष पुलिस टीमों ने अंजाम दिया, जिसमें लगभग 30 जवान शामिल थे।
द हिन्दू की रिपोर्ट के हवाले से, आर्मूर के पुलिस इंस्पेक्टर सत्यनारायण ने बताया कि मंगलवार रात आठ बजे तक करीब 200 लोगों की औपचारिक गिनती हो चुकी थी। बाकी मजदूरों की पहचान और सत्यापन का काम देर रात तक जारी रहा। मुक्त कराए गए लोगों में कई महिलाएं और बच्चे कुपोषण का शिकार नजर आ रहे थे।
शुरुआती जांच में यह खौफनाक सच सामने आया है कि इन मजदूरों को बंधकों की तरह रखा गया था। उन्हें नियमित वेतन नहीं मिलता था। इसके बजाय उन्हें सिर्फ ऐसे 'वाउचर' दिए जाते थे जिनसे वे केवल अपनी जरूरत का कुछ सामान खरीद सकें।
तमिलनाडु के एक मजदूर ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह पिछले चार साल से बिना किसी नकद वेतन के यहां काम कर रहा था। उसके परिवार का गुजारा हफ्ते में एक बार मिलने वाले 200 रुपये के किराना वाउचर से ही होता था।
भट्ठा मालिकों ने मजदूरों की आवाजाही पर पूरी तरह से पाबंदी लगा रखी थी। न्यूनतम मजदूरी न देने के साथ ही उन्हें काम बदलने या पैसों को लेकर मोलभाव करने की कोई आजादी नहीं थी। मजदूरों ने डराने-धमकाने, शारीरिक हिंसा और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
इस पूरी कार्रवाई की शुरुआत एक मजदूर के रिश्तेदारों की गुप्त सूचना के बाद हुई। उन्होंने अधिकारियों को भट्ठों पर बंधक बनाकर रखे गए लोगों के शोषण की जानकारी दी थी। इसी सूचना के आधार पर जिला प्रशासन और पुलिस ने मिलकर इस छापेमारी की योजना बनाई।
रेस्क्यू के बाद कई मजदूर अपने अस्थायी शेड से सामान समेटकर हाथगाड़ियों के जरिए बचाव वाहनों तक पहुंचते दिखे। इन सभी को एक निर्धारित सुरक्षित स्थान पर भेजा गया है, जहां उनके लिए भोजन और अस्थायी आवास का इंतजाम किया गया है। इसी दौरान अधिकारी अपने दस्तावेज और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं।
इंस्पेक्टर सत्यनारायण ने बताया कि पुलिस टीमें पीड़ितों के बयान दर्ज कर रही हैं और शोषण के स्तर का आकलन कर रही हैं। भट्ठा मालिकों के रिकॉर्ड खंगालने और औपचारिक शिकायत दर्ज होने के बाद कड़े कानूनों के तहत मामले दर्ज किए जाएंगे।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो चुका है और अब पीड़ितों की पहचान की जा रही है। पुलिस पंचनामा कर रही है और इन सुविधाओं का संचालन करने वाले दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। भट्ठों के वेतन रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की जा रही है।
इन मामलों में बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम 1976, बाल एवं किशोर श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम और मानव तस्करी से जुड़े प्रासंगिक कानूनों के तहत एफआईआर दर्ज होगी।
फिलहाल प्रशासन पीड़ितों की गवाही दर्ज करने और उन्हें रिहाई प्रमाण पत्र जारी करने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही इन अंतरराज्यीय प्रवासी मजदूरों को आर्थिक सहायता देने और सुरक्षित उनके गृह राज्य भेजने के लिए पुनर्वास के कदम भी उठाए जा रहे हैं।
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