मध्य प्रदेश हाई कोर्ट: लापता हुए रिटायर्ड निगम कर्मचारी की पत्नी को तुरंत पेंशन जारी करने के आदेश

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट
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भोपाल। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एक मामले में नगर निगम अधिकारियों को फटकार लगाते हुए तीन सालों से लापता हुए एक कर्मचारी की पत्नी को पेंशन जारी करने का आदेश दिया है। गुमशुदा कर्मचारी की पत्नी ने हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत की थी।

कोर्ट ने अधिकारियों के रवैये को लेकर भी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा लापता सेवानिवृत्त कर्मचारी की पत्नी को फिलहाल तुरंत पेंशन शुरू की जाए एरियल की राशि भले ही सात वर्ष पूरे होने के बाद दे दें।

ये है मामला

दरअसल मामला इंदौर निवासी याचिकाकर्ता रशीदा बी का है। उनके पति फिरोज अंसारी नगर निगम इंदौर में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे और सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें पेंशन भी मिल रही थी। जून 2020 में कोरोनाकाल के दौरान फिरोज अंसारी अचानक लापता हो गए। स्वजन ने सदर बाजार पुलिस थाने में उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई लेकिन उनका कोई पता नहीं चल सका। फिरोज अंसारी की पत्नी रशीदा बी ने इंदौर नगर निगम के अधिकारियों से उनके पति की पेंशन खुद के नाम पर फिर से चालू करने की गुहार लगाई। कई बार आवेदन दिए लेकिन निगम ने नियमों का हवाला देकर पेंशन शुरू करने की कार्यवाही नहीं की।

निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारी की पत्नी ने इस संबंध में नगर निगम में आवेदन भी प्रस्तुत किया। लंबे समय तक आवेदन लंबित रहा। जब रशीदा बी ने अधिकारियों से मिलकर आवेदन निराकृत करने की मांग की तो अधिकारियों ने यह कहकर आवेदन निरस्त कर दिया कि आपको अपने पति के सिविल डेथ यानी 7 साल तक गुम रहने पर मिलने वाला प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। इसके बगैर आपके पक्ष में पेंशन जारी नहीं की जा सकती।

कोर्ट से मिली राहत

निगम के कई चक्कर काटने के बाद जब किसी ने नहीं सुनी तब रशीदा बी ने हाई कोर्ट में निगम के खिलाफ याचिका दायर कर दी। न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने याचिका पर सुनवाई करते हुए नगर निगम के अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई और रशीदा बी के पक्ष में तुरंत पेंशन जारी करने के आदेश दे दिए। कोर्ट ने फैसले में कहा है कि एरियर की राशि भले ही गुमशुदगी की तारीख से सात वर्ष बाद दी जाए लेकिन पेंशन तो तत्काल प्रदान की जाना चाहिए।

यह है नियम

शासकीय सेवक के गुमशुदगी दर्ज होने के बाद 7 वर्ष बाद ही उसे मृत मानकर डेथ सर्टिफिकेट जारी होता है। जिसके बाद ही पेंशन शुरू की जाती है। रशीदा बी के मामले में उनका पति नगर निगम की चतुर्थ श्रेणी नौकरी से सेवानिवृत्त हो गया था। 2020 कोरोना काल  से वह लापता है। पुलिस को किसी भी तरह का सुराग भी नहीं लगा है। पति के गायब होने से पहले उसे पेंशन मिल रही थी। लेकिन गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद निगम ने पेंशन पर रोक लगा दी थी। रशीदा बी के पति की पेंशन उन्हें मिले इसके लिए वह निगम अधिकारियों के चक्कर काट रहीं थी मगर नियमों के कारण आवेदन निरस्त कर दिया गया था।

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