उत्तर प्रदेश: "रिटायरमेंट के बाद बच्चों के सामने क्या मुंह लेकर जाऊंगा, 8 माह से फूटी कौड़ी तक नहीं मिली"- पीड़ित कर्मचारी

नगर पालिका व ग्राम पंचायत कार्मिकों का वेतन कई महीने से बकाया, भुगतान नहीं होने से आर्थिक परेशानी झेल रहे कर्मचारी.
उत्तर प्रदेश: "रिटायरमेंट के बाद बच्चों के सामने क्या मुंह लेकर जाऊंगा, 8 माह से फूटी कौड़ी तक नहीं मिली"- पीड़ित कर्मचारी

लखनऊ। "रिटायरमेंट के बाद बच्चों के सामने क्या मुंह लेकर जाऊंगा, 8 माह से वेतन के नाम पर फूटी कौड़ी तक नहीं मिली है..." यह शब्द फतेहपुर जिले की किशनपुर नगर पंचायत में कार्यरत कर्मचारी के हैं। कर्मचारी का आरोप है कि उन्हें फरवरी 2023 से सैलरी नहीं दी गई। यही नहीं जिन कर्मचारियों ने तीन दशक से अधिक का जीवन विभाग की सेवा में बिता दिया उन्हें रिटायरमेंट के बाद न तो जीपीएफ की राशि मिली न ही सैलरी का भुगतान हुआ। उन्हें खाली हाथ ही घर लौटना पड़ा। अब विभाग में 7 कर्मचारी ही शेष बचे हैं, जिनमें एक का रिटायरमेंट इसी माह की 31 अक्टूबर जबकि अन्य दो का 2024 की शुरुआती दो माह में हो जाएगा। ऐसे में इन कर्मचारियों का पूरा परिवार आर्थिक तंगी की मार झेल रहा है।

क्या है पूरा मामला?

यूपी के फतेहपुर जिले के नगर पंचायत के कर्मचारियों और ग्राम पंचायत के पंचायत सहायकों को कथित तौर पर फरवरी 2023 से सैलरी नहीं दी गई। कर्मचारियों के जेब में फूटी कौड़ी तक नहीं बची है। ऐसे में मोबाइल का रिचार्ज कर ऑनलाइन हाजिरी लगाना भी मुश्किल हो गया है। यह कर्मचारियों के लिए जटिल समस्या है। यह कर्मचारी किसी तरह उधार लेकर अपने घर का खर्च चलाने पर मजबूर हैं। कई त्यौहार बीत गए, लेकिन खातों में पैसा नहीं आया। आरोप है कि जब कोई कर्मचारी शिकायत लेकर जिलाधिकारी के पास जाता है तो उसकी सैलरी रिलीज कर दी जाती है। द मूकनायक ने इस सम्बंध में जिलाधिकारी फतेहपुर से सम्पर्क किया। जिलाधिकारी कार्यालय पर मौजूद कर्मचारी ने डीएम के व्यस्त होने की बात कही।

यूपी के फतेहपुर जिले में 3 तहसीलें हैं, जिनमें खागा, फतेहपुर सदर और बिंदकी आती हैं। इन तहसीलों में 8 नगर पंचायत हैं,दो नगर पालिका है। खागा तहसील में पांच नगर पंचायत खग्गाम नगर पंचायत, खागा नगर पंचायत, किशनपुर नगर पंचायत, खखरेरू, तारिकान धाता नगर पंचायतें आती हैं। इसके अतिरिक्त फतेहपुर सदर में फतेहपुर नगर पालिका, बिंदकी तहसील में बिंदकी नगर पालिका आती हैं। किशनपुर नगर पंचायत में तैनात एक नियमित कर्मचारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, 'हमारी नगर पंचायत में कुल 8 कर्मचारी नियमित थे। इनमें से किसी भी कर्मचारी को फरवरी 2023 से सैलरी ही नहीं दी गई।'

हर महीने समय से तैयार हो जाती है सैलरी नहीं होता भुगतान

कर्मचारी का आरोप है कि माह के अंत में सभी कर्मचारियों की सैलरी समय अनुसार तैयार कर दी जाती है। इसके बावजूद सैलरी नहीं मिल रही है। सैलरी नहीं मिलने के कारण परिवार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारी के मुताबिक कर्मचारियों की सैलरी का भुगतान चेयरमैन और अधिशासी अधिकारी के हस्ताक्षर के बाद होता है। पहले भी कर्मचारियों को देरी से ही भुगतान हुआ है। पंकज कुमार सिंह का मई 2023 में तबादला हो गया। जिसके बाद अधिशासी अधिकारी की अतिरिक्त जिम्मेदारी एसडीएम खागा नन्द प्रकाश मौर्या के पास है। नन्द प्रकाश मौर्य ने जब मई में कार्यभार संभाला तब कर्मचारियों की जनवरी 2023 तक भुगतान हुआ था। नन्द प्रकाश मौर्या के कार्यभार संभालने के बाद कर्मचारियों को मई में ही फरवरी 2023 की सैलरी का भुगतान हुआ। इसके बाद से कर्मचारियों की सैलरी बकाया है।

बिना सैलरी, जीपीएफ, पेंशन, ग्रेच्यूटी के घर लौट रहे कर्मचारी

एक कर्मचारी ने द मूकनायक को बताया, "सितंबर 2023 में 30 साल की नौकरी करने के बाद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भोगदा पुत्र हिसामुद्दीन का रिटायरमेंट हुए थे। रिटायरमेंट के दौरान उन्हें कुछ भी नहीं मिला। फरवरी 2023 से उनकी सैलरी बकाया है। इसके अतिरिक्त उनकी पेंशन,ईपीएफ सहित फंड की राशि अभी भी देय है। वह मायूसी के साथ खाली हाथ ही घर लौट गए।"

इस माह एक और कर्मचारी का होगा सेवानिवृत्त, 2024 में दो अन्य

कर्मचारी आगे बताता है, "31 अक्टूबर 2023 में सुरेश चंद्र अग्निहोत्री का रिटायरमेंट हो जाएगा। जनवरी 2024 में विभाग में तैनात बाबू श्याम प्रकाश जनवरी 2024 में रिटायरमेंट होगा। इसके अतिरिक्त एक अन्य कर्मचारी का फरवरी 2024 सुशील कुमार का रिटायरमेंट हो जाएगा। जिसके बाद विभाग में सिर्फ चार कर्मचारी ही नियमित रह जाएंगे।"

लंबी नौकरी के बाद खाली हाथ मायूसी लेकर लौटना पीड़ाजनक

कर्मचारी बताते हैं इस विभाग में लंबे समय तक नौकरी करने के बाद बिना सैलरी, जीपीएफ, पेंशन, ग्रेच्यूटी और फंड के लौटना हमें बहुत ही पीड़ा देता है। कर्मचारी मायूसी के साथ कहते हैं, "एक लंबे समय तक काम करने के बाद इस वृद्धावस्था में बिना सैलरी और फंड के हम अपने घर क्या मुंह लेकर जाएंगे?"

जानिए क्या कहते हैं अफसर?

इस मामले में अधिशासी अधिकारी के पद की जिम्मेदारी संभाल रहे एसडीएम नन्द कुमार मौर्या का कहना है, "यह एक छोटी नगर पंचायत है। आय का कोई स्रोत नहीं है ऐसे में कर्मचारियों को सैलरी दे पाना मुश्किल हो रहा है। संविदा कर्मचारियों को भी वेतन नहीं मिल सका है। पत्राचार किया जा रहा है। फंड आने पर भुगतान कर दिया जाएगा।"

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