यूपी: महाशिवरात्रि पर कुट्टू के आटे का सेवन करने वाले सैकड़ों लोगों की तबीयत बिगड़ी!

लॉयड लॉ कालेज के आर्यन हॉस्टल में महाशिवरात्रि के अवसर पर व्रत रखने वाले छात्रों के लिए साबूदाने की खीर, कुट्टू के आटे की पूड़ी और आलू की सब्जी बनी थी।
यूपी: महाशिवरात्रि पर कुट्टू के आटे का सेवन करने वाले सैकड़ों लोगों की तबीयत बिगड़ी!

नोएडा: महाशिवरात्रि के अवसर पर कथित रूप से खराब गुणवत्ता के कुट्टू के आटे से बनी सामग्री के सेवन से दो हॉस्टल के 230 छात्रों सहित 350 लोग फूड प्वाइजनिंग के शिकार हो गए। सभी को तेज पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत हुई। इनमें आगरा निवासी श्याम पालिया समेत 15 छात्र अभी भी आईसीयू में हैं। लॉयड लॉ कालेज के आर्यन हॉस्टल में महाशिवरात्रि के अवसर पर व्रत रखने वाले छात्रों के लिए साबूदाने की खीर, कुट्टू के आटे की पूड़ी और आलू की सब्जी बनी थी। कॉलेज की गाड़ियों से छात्रों को पास के निजी अस्पतालों में ले जाया गया।

अभि प्योर नाम से बोरों में पैक यह आटा नोएडा के सेक्टर-73 के मकान में चलने वाले विवेक इंडस्ट्रीज पिसाई प्लांट से आया था। खाद्य विभाग ने प्लांट समेत सुथियाना से मंजू किरन स्टोर और बरौला की शालू आटा चक्की को सील कर दिया है.

बाहरी दिल्ली में 100 से ज्यादा बीमार

बाहरी दिल्ली के रानीबाग क्षेत्र में कुट्टू का आटा खाने से 100 से ज्यादा लोग बीमार हो गए। अबतक भगवान महावीर अस्पताल में करीब 140 लोग पहुंचे हैं। सभी को उल्टी, दस्त की शिकायत है। इमरजेंसी में मरीजों की भीड़ बढ़ती जा रही है।

दिल्ली में दुकानों पर छापे मारकर नमूने एकत्र किए

रानी बाग क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा विभाग ने कई दुकानों पर छापे मारकर कुट्टू के आटे के नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की आयुक्त नेहा बंसल ने बताया कि घटना चिंतित करने वाली है। इसे लेकर बड़े स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, लगातार छापे मारकर नमूने लिए जाएंगे।

क्या है कुट्टू?

टाऊ, ओगला, ब्रेश, फाफड़, पदयात या अंग्रेजी में कह लें बक व्हीट. विज्ञान की भाषा में बोले तो 'फैगोपाइरम एस्कुलेंटा'। इसे ही कुट्टु के नाम से जाना जाता है। अंग्रेजी के इसके नाम में व्हीट है, लेकिन अनाज से इसका कोई लेना देना नहीं होता है। क्योंकि कुट्टू की गिनती फलों में की जाती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी उत्पत्ति का मूल स्थान उत्तरी चीन और साइबेरिया है। हालांकि, इसकी जंगली प्रजाति यूनान में भी पाई जाती है। कुट्टू का पौधा ज्यादा बड़ा नहीं होता है। औसतन इसकी लंबाई दो से चार फीट ही होती है। 

क्या-क्या फायदे हैं?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 100 ग्राम कुट्टू के आटे में 65 से 75 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और 12 से 13 ग्राम प्रोटीन होता है। विटामिन्स और फाइबर की भी अच्छी खासी मात्रा होती है। 7 मिलीग्राम विटामिट B-3, 282 मिलीग्राम फास्फोरस, 231 मिलीग्राम मैग्नीशियम, 114 मिलीग्राम मैग्नीशियम और 13.2 मिलीग्राम आयरन होता है। कुट्टू पथरी के मरीजों को लिए काफी फायदेमंद होता है। साथ ही अगर कोई वजन घटा रहा है तो इसमें भी कुट्टू का आटा काफी फायदेमंद है।

ऐसे पहचानें मिलावटी आटा

कुट्टू के आटे का रंग गहरा भूरा होता है। कुट्टू के आटे में मिलावट या खराब होने पर सबसे पहले उसका रंग बदल जाता है। इस स्थिति में कुट्टू के आटे का रंग ग्रे या हल्का हरा हो सकता है। खराब या मिलावटी कुट्टू का आटा गूंथते समय बिखर जाता है। कुट्टू के आटे को खरीदने से पहले उसे छूकर देखें। अगर आटा खुरदुरा है और इसमें बीच-बीच में काले दाने दिखाई दे रहे हैं तो ये आटा न खरीदें। इस आटे में फंगस लगी होने के कारण खराब हो गया है।

दरअसल कुट्टू एक प्रकार का अनाज है, जो ठंडे इलाकों में पाया जाता है। इसे ज्यादा दिन तक स्टोर करके रखने से इसमें फंगस की समस्या भी पैदा हो सकती हैं। यही वजह है कि इसे लंबे समय तक स्टोर करने की सलाह नहीं दी जाती है।

कुट्टू के आटा एक महीने के अंदर ही खराब हो जाता है। कई बार लोग आटे को बचाकर रख लेते हैं लेकिन पिछले साल का आटा प्रयोग न करें। पुराने आटे में बैक्टीरिया होते हैं जो शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। इनसे फूड प्वायजनिंग हो सकती है। अगर आपने खराब कुट्टू का आटा खा लिया तो कुछ देर बाद शरीर में परेशानी शुरू हो जाएगी। भूख न लगना, फूड प्वाजनिंग से पेट में मारोड़े, उल्टी, दस्त हो सकते हैं। इसके अलावा मूत्र संबंधी समस्या भी पैदा हो सकती है। कई बार दिमाग में खून की नलियों पर भी इसका विपरीत असर हो सकता है।

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