राजस्थानः नागौर के दर्जनों दलित किसान क्यों नहीं कर पा रहे है खरीफ फसल की बुवाई?

खेतों को जाने वाले रास्ते पर जातिवादियों का कब्जा, रात में बुवाई करने गए दलित किसान को पीटा, पुलिस ने पीड़ित किसान को ही कर दिया हवालात में बंद।
नागौर। एसडीएम को ज्ञापन देने पहुंचे पीड़ित दलित परिवार।
नागौर। एसडीएम को ज्ञापन देने पहुंचे पीड़ित दलित परिवार।The Mooknayak

जयपुर. राजस्थान में दलित, आदिवासी और मुसलमानों पर अत्याचार के मामले लगातार बढ़ते जा रहे है। प्रताड़ना का ताजा मामला नागौर जिले के लाडनूं थाना इलाके से सामने आया है। जहां धूडि़याल गांव के दर्जनों दलित परिवार अपने खेतों में खरीफ फसल की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। जिस किसी ने रात के अंधेरे में जाकर फसल की बुवाई का प्रयास किया तो उसकी पिटाई की गई। इतना ही नहीं आरोपियों ने दलितों के खेतों को जाने वाला रास्ता ही बंद कर दिया है। इधर, पुलिस भी पीड़ितों की सुनवाई नहीं कर रही है।

वर्षों से प्रयोग में है रास्ता

नागौर जिले के लाडनूं थाना इलाके के धूडि़याल गांव में मेघवाल समाज के 70 सें अधिक लोगों की कृषि खातेदारी भूमि गांव के एक तरफ है। इन खेतों के लिए बीते 70 सालों से कदीमी रास्ता चला आ रहा है। मेघवाल समाज के लोग इसी रास्ते का उपयोग कर अपने खेतों पर जाते रहे हैं। खेतों की बुवाई व फसल कटाई के लिए इसी रास्ते से वाहनों का आवागम होता रहा है। बीते दिनों गांव के प्रभावशाली लोगों ने इस रास्ते को बंद कर दिया। दलित किसानों ने जब खेतों की बुवाई के लिए इस रास्ते से जाने का प्रयास किया तो, उनको जबरन रोक दिया गया। एक दलित किसान ने रात के अंधेरे में बंटाई के खेत पर जाकर बुवाई की तो उसकी पिटाई की गई। पीड़ित जब पुलिस थाने पहुंचा तो, लाडनूं थाना पुलिस ने पीड़ित को ही हवालात में बंद कर दिया।

श्री आनंद परिवार को बताई पीड़ा

किसानों को जब पुलिस प्रशासन से न्याय नहीं मिला तो वे आनंद परिवार (श्री आनंद परिवार सेवा समिति लाडनूं) के पास न्याय की गुहार लेकर पहुंचे। समिति संयोजक एवं अध्यक्ष मंजीतपाल सिंह सांवरदा के नेतृत्व में सामजिक कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के नाम लाडनूं तहसीलदार को ज्ञापन सौंप कर दलितों के साथ हुए अत्याचार और मारपीट के आरोपियों की गिरफ्तारी करने तथा उनके खेतों में जाने के रास्ते को पुनः बहाल करने की मांग की है। इस दौरान अधिवक्ता हरींश महेरड़ा, समिति महासचिव नंदकिशोर स्वामी, उपाध्यक्ष मुराद खान कायमखानी, सदस्य धर्मेंद्र वाल्मिकी, हाजी आसिफ कायमखानी, आजाद सिंह, भैराराम शर्मा, दुर्गा दान चारण, लालाराम वाल्मिकी, अमजद मीर, राजेश सोनी, इमरान फौजी, असलम खान सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे।

एसडीएम को ज्ञापन देते पीड़ित  दलित परिवार।
एसडीएम को ज्ञापन देते पीड़ित दलित परिवार।The Mooknayak

इनके खेतों का रास्ता हुआ बंद

दलित किसान भंवराराम पुत्र पुरखाराम मेघवाल ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि नागौर जिले की लाडनूं तहसील के धूडि़ला गांव में सुगना देवी, खेताराम पुत्र कुम्भाराम मेघवाल, बिरमाराम पुत्र केशराम मेघवाल, जयरामाराम पुत्र केलाराम मेघवाल, बिड़दाराम पुत्र सुखाराम मेघवाल, पूरणाराम पुत्र लालाराम मेघवाल, चेनाराम पुत्र नारायणराम मेघवाल, भूराराम पुत्र हजारीराम मेघवाल, सुगनाराम पुत्र भानूराम मेघवाल, रेसूड़ी पत्नी रामलाल मेघवाल, रत्नाराम पुत्र दानाराम मेघवाल, पुरखाराम पुत्र भंवराराम मेघवाल, बुधाराम पुत्र जेठाराम मेघवाल, भंवराराम पुत्र छोटूराम, हड़मान पुत्र लच्छाराम मेघवाल, दीनाराम पुत्र नारायणराम मेघवाल सहित लगभग 70 से अधिक किसानों के खेतों के लिए धूडि़ला से सलनवाद की तरफ पीढियों से कदीमी रास्ता चला रहा है।

किसानों ने बताया कि हम और हमारे पूर्वज पुरातन से इस रास्ते का उपयोग व आवागमन बिना किसी रोक टोक और बाधा के करते आ रहे हैं। इस रास्ते से जाकर खेतों में काश्त करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मदनलाल पुत्र दूदाराम जाट निवासी ढींगसरी का बीच में खेत पड़ता है। कैलाश पुत्र चेनाराम व चेनाराम निवासी ढडेल हाल निवासी धूडिला, अर्जुन पुत्र जेठाराम जाट व अन्य ने मिलकर जातीय प्रभाव और राजनीतिक पहुंच के कारण हमारे कदीमी रास्ते को रोक दिया है। इससे मेघवाल सामज के दर्जनों किसान चौमासे की फसल की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं।

रात के अंधेरे में फसल बोने गया तो कर दी पिटाई

भंवराराम पुत्र पुरखाराम मेघवाल ने गांव के खेताराम पुत्र कुम्भाराम का खेत बुवाई के लिए बांटे पर ले रखा है। भंवराराम गत 24 जून को रात 9 बजे पत्नी मंजू देवी व परिवार के सदस्य बिड़वाराम के साथ खेत में बिजाई कर रहा था। इस दौरान आरोपी जेठाराम पुत्र रामरखाराम जाट, अर्जुनराम पुत्र जेठाराम जाट, राधाकिशन पुत्र जेठाराम जाट निवासी धूडिला, चेनाराम पुत्र रामरखाराम निवासी ढाका की ढाणी, डसाणा कला तहसील डीडवाना, कैलाश पुत्र चेनाराम जाट निवासी धूडिला सहित अन्य लोग हाथ में लाठी व कस्सी लेकर अनाधिकृत रूप से खेत में प्रवेश कर गए। ट्रैक्टर ड्राइवर को इशारा कर रुकवाया।

भंवराराम ने बताया कि इस दौरान आरोपी जेठाराम ने जातिसूचक शब्दों का उपयोग करते हुए कहा कि खेत क्यों बो रहा है। मेरा धन भैंस, गाय आदि कंहा चरेंगी। नाराज जेठाराम ने कस्सी से मारपीट करना शुरू कर दिया। कैलाश जाट ने लाठी से मारपीट की। भंवराराम की पत्नी ने बीच बचाव किया तो राधाकिशन व अर्जुनराम ने उसके साथ भी मारपीट की। दम्पति को पिटता देख ट्रैक्टर पर बीज की बुआई कर रहा बिड़दाराम पड़ोसियों को बुला कर लाया तो बिरममाराम, चेनाराम पुत्र नारायणराम आए और बीच बचाव कर आरोपियों के चंगुल से र्प्रार्थी व पत्नी को छुड़ाया। पीडि़त ने 25 जून को सुबह 10 बजे लाडनूं पुलिस थाने में रिपोर्ट दी, लेकिन थानाधिकारी लाडनूं ने प्रार्थी की कोई सुनवाई नहीं की। न्याय देने की बजाय पुलिस पीडि़त पक्ष को ही 151 में बंद कर पाबंद करवा रही है। किसानों ने कहा कि उक्त प्रकरण में आज तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। ना ही आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पीड़ित पक्ष के बयान तक नहीं लिए गए हैं।

इस मामले में श्री आनन्द सेवा समिति लाडनंू संस्थापक एवं अध्यक्ष मंजीत पाल सिंह सांवरदा ने बताया कि धूडिला में मेघवाल समाज के किसानों के खेतों की और से जाने वाला 70 साल पुराना रास्ता बंद कर दिया गया। दलित किसान दम्पत्ति के साथ मारपीट की गई। समिति से जुड़े नन्द किशोर स्वामी ने कहा कि लाडनूं की कानून व्यवस्था चौपट है। दलितों को न्याय दिलाने की बजाय बैरंग लौटा दिया गया।

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