आम बजट 2024: करीब 50 हजार किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य

बुंदेलखंड के बाद अब पूर्वाचल सहित अन्य जिलों तक होगा विस्तार.
आम बजट 2024: करीब 50 हजार किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य
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उत्तर प्रदेश: बजट में दो वर्षों में एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए मदद की घोषणा से यूपी में भी इस विधा की खेती को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जगी है। अभी तक प्राकृतिक खेती बुंदेलखंड तक सीमित है, लेकिन अब इसका पूर्वाचल और मध्य क्षेत्र में भी विस्तार किया जा सकेगा।

प्रदेश में अभी बुंदेलखंड के सात जिलों में प्राकृतिक खेती के 470 क्लस्टर हैं। इसमें 235 को पिछले वर्ष और 235 को इस वर्ष चुना गया है। 47 ब्लॉक के 21854 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया है। उन्हें जैविक खाद और बीज की सुविधा मुहैया कराई जाती है।

वित्त वर्ष 2022-23 में बुंदेलखंड को 4.30 करोड़ रुपये दिए गए हैं। अब केंद्र सरकार की ओर से इस योजना को बढ़ावा देने की बात कही गई है। कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब पूर्वाचल के किसानों को भी इसके दायरे में लाया जाएगा। अगले चरण में मध्य क्षेत्र के किसानों को जोड़ा जाएगा।

विभाग की रणनीति है कि अगले दो साल में करीब 50 हजार किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाए। रणनीति के तहत प्रदेश के 700 किसानों को गुरुकुल कुरुक्षेत्र भेजकर प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ये किसान अन्य किसानों को प्रशिक्षित करेंगे। कृषि विभाग की टीम प्राकृतिक खेती करने का प्रमाणपत्र भी देगी।

प्रदेश में 40 प्रजातियों पर चल रहा है शोध

केंद्र की ओर से बजट प्रावधान किए जाने से नई प्रजाति की खोज को बढ़ावा देने पर जोर है। ऐसे में प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों में गेहूं, धान, गन्ने, आलू की 40 प्रजातियों पर शोध कार्य चल रहा है। अब इन्हें बढ़ावा मिलेगा।

हर साल करीब पांच से 10 नई प्रजातियां विकसित हो सकेंगी। पिछले दिनों धान की एनडीआर-9730018 एनडीआर 8029, एनडीआर-9407 और एनडीआर 8028 प्रभाति को शोध सलाहकार समिति ने मंजूरी दी थी। इसी तरह बुंदेलखंड के किसानों के लिए प्याज की एल 883 प्रजाति को विकसित किया गया था।

बजट में किए गए प्रावधान से कृषि क्षेत्र को नया आयाम मिलेगा। किसान, कृषि उत्पादन संगठनों को सीधा फायदा मिलेगा।
कृषि मंत्री, सूर्य प्रताप शाही

प्रदेश में हैं नौ कृषि जलवायु क्षेत्र

प्रदेश में 9 तरह के कृषि जलवायु क्षेत्र हैं। ऐसे में अलग-अलग क्षेत्रों में हर तरह के फल, सब्जियों और फूलों की खेती होती है। प्रदेश के करीब 80 फीसदी किसान लघु एवं सीमांत हैं। ये गेहूं, धान, गन्ना के रूप में परंपरागत खेती करते हैं। अब इन्हें जलवायु आधारित खेती करने को प्रेरित किया जा रहा है।

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