किसान-मजदूर महापंचायत.
किसान-मजदूर महापंचायत.राकेश टिकैत एक्स हैंडल.

200 किसानों पर मुकदमे के बाद भी, 23 मार्च को लोकतंत्र बचाने को भरेंगे हुंकार

दैनिक अखबार जनसत्ता में प्रकाशित समाचार के मुताबिक, दिल्ली की रामलीला मैदान में आयोजित किसान महापंचायत में गुरुवार को शामिल हुए 200 किसानों पर मुकदमा दर्ज किया गया है।

नई दिल्ली. संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने गुरुवार, 14 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में किसान-मजदूर महापंचायत की। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने यूपी, हरियाणा, पंजाब और देश के अलग-अलग राज्यों से हज़ारों किसान दिल्ली के रामलीला मैदान पहुंचे। इस महापंचायत में किसानों ने प्रमुख रूप से पांच मांगें सरकार से की। वहीं, किसानों के दिल्ली की तरफ कूच को देखते हुए गाजीपुर बार्डर पर 3 कंपनी PAC तैनात की गई थी।

200 किसानों के खिलाफ पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

दैनिक अखबार जनसत्ता में प्रकाशित समाचार के मुताबिक, दिल्ली की रामलीला मैदान में आयोजित किसान महापंचायत में गुरुवार को शामिल हुए 200 किसानों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। आरपीएफ द्वारा 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे में डासना रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों को रोकने का आरोप है। रेलवे पुलिस थाने में चौकी प्रभारी डासना कुलदीप कुमार की तहरीर पर किसानों पर यातायात प्रभावित करने का मुकदमा दर्ज हुआ है।

हापुड़ रेलवे स्टेशन पर तैनात आरपीएफ इंस्पेक्टर सुभाष यादव ने बताया कि वीडियो के माध्यम से ट्रेन रोकने वालों की पहचान कर गिरफ्तारी की जाएगी। गुरुवार को वरिष्ठ किसान नेता सरनजीत गुर्जर को सीओ आशुतोष शिवम ने गढ़ में नजरबंद कर दिया। इसी कड़ी में बरेली-दिल्ली पैसेंजर से दिल्ली जा रहे सैकड़ों किसानों ने डासना रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के 1 घंटा 45 मिनट खड़े रहने पर हापुड की ओर से आई रानीखेत एक्सप्रेस को रोक लिया।

महापंचायत में किसानों ने ये माँगें रखी

महापंचायत में किसानों ने ये माँगें रखी। सभी फसलों के लिए गारंटीशुदा खरीद के साथ एमएसपी मिले। सर्वसमावेशी कर्ज माफ़ी योजना लागू हो। बिजली का निजीकरण बंद हो और प्रीपेड स्मार्ट मीटर हटाए जाएं। लखीमपुर खीरी किसान नरसंहार के मुख्य साजिशकर्ता और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी को बर्खास्त किया जाए। बता दें कि यह वहीं माँगें हैं जिसको लेकर किसान पिछले 13 फ़रवरी से पंजाब-हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

इस महापंचायत में राकेश टिकैत, जोगिंदर सिंह उगराहां, मेधा पाटेकर, गुरनाम चढूनी समेत कई और किसान नेता पहुंचे। यहां कई संकल्प भी लिए गए, जिसमें चुनावों के मद्देनजर मुख्य संकल्प भाजपा के विरोध में देशव्यापी जन प्रतिरोध खड़ा करने का रहा। इसके लिए किसान अभी अपने-अपने गांवों में भाजपा नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।

भगतसिंह के शहीदी दिवस पर किसान मनाएंगे लोकतंत्र बचाओ दिवस

हालांकि, शंभू पर जारी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे किसान मज़दूर मोर्चा संगठन इस महापंचायत में शामिल नहीं थे। दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित इस महापंचायत में खनौरी बॉर्डर पर मारे गए किसान शुभकरण सिंह के मामले में केंद्रीय मंत्री अमित शाह से इस्तीफे की भी मांग की गई। आगामी 23 मार्च यानी शहीद भगत सिंह के फांसी वाले दिन पर देश के सभी गांवों में ‘लोकतंत्र बचाओ‘ दिवस मनाने की भी घोषणा की गई।

बता दें कि दिल्ली में किसान महापंचायत के लिए संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) को सरकार ने सशर्त मंजूरी दी थी। वहीं, किसान मजदूर मोर्चा (KKM) ने भी दिल्ली में प्रदर्शन करने की अनुमति माँगी थी लेकिन उसको सरकार ने आधिकारिक तौर पर ख़ारिज कर दिया था। ऐसे में यह एक बड़ा सवाल है कि सरकार ऐसा क्यों कर रही है, क्या सरकार ऐसा करके किसान संगठनों में फूट डालना चाहती है या फिर यह आंदोलन को कमजोर करने का एक चाल है?

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) 37 कृषि संघों का एक समूह है। संगठन ने 22 फरवरी को चंडीगढ़ में एक बैठक में 'महापंचायत' का आह्वान किया था। इसके बाद उन्हें दिल्ली पुलिस और नगर निगम से 11 मार्च को सभा के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र मिल गया है।

पुलिस ने शर्तों के साथ दी महापंचायत की मंजूरी

दिल्ली पुलिस ने किसानों को 5,000 से अधिक इकट्ठा नहीं होने, ट्रैक्टर ट्रॉली नहीं लाने, रामलीला मैदान में मार्च नहीं करने की शर्त के साथ 'महापंचायत' आयोजित करने की अनुमति दी थी। दिल्ली पुलिस अधिकारियों ने यह भी कहा कि उन्होंने एसकेएम से महापंचायत में किसानों की संख्या 5,000 तक सीमित रखने के लिए कहा था।

रामलीला मैदान में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा था, "यहां एक बैठक हुई और सरकार को संदेश मिला कि देश के किसान एकजुट हैं। सरकार को बातचीत के जरिए मुद्दा सुलझाना चाहिए, यह आंदोलन खत्म नहीं होने वाला है।"

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