अखिल भारतीय फोरम फॉर इक्विटी ने दिल्ली से लांच किया UGC रेगुलेशंस समता आंदोलन, 13 को मनेगा विरोध दिवस

100 से अधिक विश्वविद्यालय परिसरों में विरोध प्रदर्शन और सभाएं होंगी
यह मंच UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 को मजबूत करने और रोहित वेमुला एक्ट के आधार पर सामाजिक समता सुनिश्चित करने की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी संघर्ष का केंद्र बनेगा।
यह मंच UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 को मजबूत करने और रोहित वेमुला एक्ट के आधार पर सामाजिक समता सुनिश्चित करने की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी संघर्ष का केंद्र बनेगा।
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दिल्ली- विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के खिलाफ एक मजबूत आवाज बनते हुए, छात्र संगठनों, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और विभिन्न सामाजिक आंदोलनों ने 8 फरवरी 2026 को दिल्ली के एचकेएस सुरजीत भवन में एकत्र होकर अखिल भारतीय फोरम फॉर इक्विटी – UGC रेगुलेशंस समता आंदोलन का शुभारंभ किया। यह मंच UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 को मजबूत करने और रोहित वेमुला एक्ट के आधार पर सामाजिक समता सुनिश्चित करने की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी संघर्ष का केंद्र बनेगा।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा 29 जनवरी को इन रेगुलेशंस पर अंतरिम रोक लगाने के बाद, जहां इन्हें "अस्पष्ट" और "दुरुपयोग की संभावना" वाला बताया गया, वहीं SC/ST/OBC समुदायों के छात्रों ने इसे जातिगत न्याय के खिलाफ कदम करार दिया। फोरम का कहना है कि ये रेगुलेशंस विश्वविद्यालयों में जातिगत उत्पीड़न रोकने के लिए जरूरी थे, खासकर रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों के बाद, लेकिन ब्राह्मणवादी ताकतों और मीडिया द्वारा फैलाई गई भ्रामक कहानियों ने इन्हें "सामान्य वर्ग के खिलाफ खतरा" के रूप में पेश किया।

बैठक की अध्यक्षता डॉ. जितेंद्र मीणा ने की। उन्होंने कहा, "विश्वविद्यालयों में सैकड़ों SC/ST/OBC छात्रों ने जातिगत उत्पीड़न के कारण अपनी जान गंवाई है। UGC ने भेदभाव विरोधी दिशानिर्देश जारी किए थे, लेकिन अनावश्यक भय का माहौल बनाकर अदालत से रोक लगवा दी गई।"

JNUSU की अदिति ने मीडिया और ब्राह्मणवादी ताकतों द्वारा गढ़ी गई झूठी नैरेटिव की आलोचना की। उन्होंने कहा, "यह महज सकारात्मक कार्रवाई का कदम था, लेकिन इसे एक समुदाय के लिए खतरे के रूप में पेश किया गया। रोहित एक्ट के आधार पर इन दिशानिर्देशों को और मजबूत करने की जरूरत है, और JNUSU इस संघर्ष में सबसे आगे रहेगा।"

डॉ. लक्ष्मण यादव ने मंडल आंदोलन से तुलना करते हुए कहा कि अदालतें सकारात्मक कार्रवाई को रोक रही हैं, जबकि EWS आरक्षण जैसे मामलों को आसानी से मंजूरी मिल जाती है। उन्होंने मीडिया की पक्षपातपूर्ण भूमिका पर सवाल उठाया कि "चंद लोगों के विरोध को बड़ा आंदोलन दिखाया जाता है, लेकिन इलाहाबाद, पटना, दिल्ली में हजारों छात्र सड़कों पर हैं और मीडिया चुप है।"

अखिल भारतीय दलित लेखिका मंच की डॉ. हेमलता महेश्वर ने कहा, "जाति उन्मूलन भारत के संवैधानिक प्रोजेक्ट की नींव है, और विश्वविद्यालयों को इसमें मार्गदर्शक की भूमिका निभानी चाहिए।"

फोरम में JNUSU, AISA, SFI, NSUI, AISF, MSF, BAPSA, ASA, RYA, DSF, सामाजिक न्याय आंदोलन बिहार, रिहाई मंच, सोशल जस्टिस आर्मी, FTII छात्र संघ, OBC आरक्षण संघर्ष समिति, गोण्डवाना स्टूडेंट यूनियन, भील प्रदेश विद्यार्थी मंच, जय आदिवासी युवा शक्ति जैसे दर्जनों संगठन शामिल हैं। अन्य वक्ताओं में महेश चौधरी (अरावली बचाओ मंच), नेहा (AISA), सूरज एलामन (SFI), विराज (AISF), अखिलेश कुमार (NSUI), क्रांति कुमार (BAPSA), JNUSU सचिव सुनील यादव, हार्दिक (DSF), प्रियम (कलेक्टिव), अहमद साजू (MSF), शरण्या (AUDSC), राजेंद्र (OBC आरक्षण संघर्ष समिति) आदि शामिल रहे।

फोरम ने JNUSU के निलंबित पदाधिकारियों और पूर्व अध्यक्ष पर हुए कार्रवाई की निंदा की और कैंपस लोकतंत्र पर हमलों की आलोचना की।

13 फरवरी को अखिल भारतीय विरोध दिवस घोषित किया गया है, जिसमें 100 से अधिक विश्वविद्यालय परिसरों में विरोध प्रदर्शन और सभाएं होंगी। फोरम की मुख्य मांग है – रोहित वेमुला एक्ट के आधार पर UGC सामाजिक समता विनियमों को मजबूत किया जाए और अदालती रोक हटाई जाए।

यह आंदोलन उच्च शिक्षा में समानता, समावेश और जाति-उन्मूलन के संवैधानिक लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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