मध्य प्रदेश: चार साल से परीक्षा का इंतजार कर रहे नर्सिंग छात्र, अब जनरल प्रमोशन की मांग पर अड़े

पिछले चार सालों से यह छात्र एक ही क्लास में अटके हैं, क्योंकि परीक्षा पर हाईकोर्ट की रोक है। यह छात्र अब जनरल प्रमोशन की मांग कर रहे हैं।
छात्रों ने जनरल प्रमोशन की मांग करते हुए और परीक्षा संबंधी समस्याओं को लेकर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
छात्रों ने जनरल प्रमोशन की मांग करते हुए और परीक्षा संबंधी समस्याओं को लेकर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

भोपाल। कोर्ट के आदेश और सीबीआई जांच के बीच मध्य प्रदेश के डेढ़ लाख नर्सिंग स्टूडेंट्स का भविष्य अधर में है। नर्सिग कॉलेज फर्जीवाड़े मामले में नर्सिंग स्टूडेंट्स जिन्होंने वर्ष 2020-21 में नर्सिंग कॉलेजों में फर्स्ट ईयर में एडमिशन लिया था, उन सभी छात्रों के चार साल बाद भी फर्स्ट ईयर के एग्जाम नहीं हो पाए हैं। पिछले चार सालों से यह छात्र एक ही क्लास में अटके हैं, क्योंकि परीक्षा पर हाईकोर्ट की रोक है। यह छात्र अब जनरल प्रमोशन की मांग कर रहे हैं।

सोमवार को नर्सिंग छात्रों ने जनरल प्रमोशन की मांग करते हुए और परीक्षा संबंधी समस्याओं को लेकर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। छात्रों ने लगातार 4 सालों से नर्सिंग छात्रों की परीक्षाएं नहीं होने पर जनरल प्रमोशन दिए जाने की मांग की है। छात्रों ने कहा कि पिछले सालों में परीक्षा नहीं होने से उनके भविष्य पर संकट है। इसलिए परीक्षा और कोर्ट के फैसले का इंतजार अब नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा यदि उनके कॉलेजों ने गलती की है तो इसकी सजा उन्हें क्यों मिल रही है? छात्रों ने सात सूत्रीए मांग पत्र मुख्यमंत्री के नाम से जिला प्रशासन के अधिकारियों को सौंपा है।

यह हैं मांगे-

1. सत्र - 2020-21 एवं 2021-22 Bs.c Nursing, पैरामेडिकल के प्रथम वर्ष के सभी छात्रों को जनरल प्रमोशन दिया जाये।

2. प्रमोशन उपरान्त B.Sc.(N), PB Bsc, M.sc Nursing आदि  छात्रों की जल्द परीक्षा ली जाएं एवं 45 दिनों के भीतर परीक्षा परिणाम घोषित किया जाए। इस शैक्षणिक सत्र को सही करने के लिए हर 6 माह में परीक्षा करवाई जाए एवं परीक्षा परिणाम भी परीक्षा के 45 दिन में घोषित किए जाए।

3. विश्व विद्यालय मे अनियमितताओं को तुरंत दुरुस्त किया जाये।

4. विश्वविद्यालय मे रिक्त पदो पर स्थाई भर्ती की जाए।

5. यूनिवर्सिटी के सभी एग्जाम प्राइवेट एजेंसी से ना करा कर यूनिवर्सिटी के द्वारा कराए जाएं।

6. सभी संभाग स्तर पर यूनिवर्सिटी के द्वारा स्टूडेंट की मदद के लिए रीजनल सेंटर खोले जाएं।

7. मध्य प्रदेश के सभी जिलों मे शासकीय नर्सिंग कॉलेज खोले जाये।       

सीबीआई कर रही जांच

नर्सिंग फर्जीवाड़े की जांच सीबीआई कर रही है और बावजूद इसके सरकार न केवल पुराने कॉलेजों की मान्यता रिन्यू कर रही है, बल्कि नए नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता भी दे रही है। इससे हर साल नए एडमिशन हो रहे हैं। इसका नतीजा ये है कि 2021 के स्टूडेंट्स भी आज फर्स्ट ईयर में है और 2022-23 के भी। जो स्टूडेंट्स 2021 में सेकंड, थर्ड या फाइनल ईयर में थे, उनके भी एग्जाम रुके हुए हैं। मेडिकल यूनिवर्सिटी और नर्सिंग काउंसिल के मुताबिक प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में हर साल करीब 30 हजार बच्चे एडमिशन लेते हैं। परीक्षाओं पर रोक के कारण अब नए नर्स बनना भी बंद हो गए हैं।

द मूकनायक से बातचीत करते हुए नर्सिंग छात्र समर्थ पाल ने कहा कि, "लगातार हाईकोर्ट कोर्ट में सुनवाई आगे बढ़ रही है, हम परेशान हैं। सरकार के सिस्टम से हमारा भविष्य खतरे में है। सरकार चाहे तो हमे जनरल प्रमोशन मिल जाएगा। पूर्व की सरकार से भी हमने मांग की पर किसी ने नहीं सुना। हम तो परीक्षा कराने की मांग करते चले आ रहे थे लेकिन अब चार साल में भी कुछ नहीं हुआ। प्रदेश में नई सरकार बन चुकी है, हम मुख्यमंत्री से यही मांग कर रहें हैं कि अब वर्ष 2021-22 में प्रवेश लेने वाले नर्सिंग छात्रों को जनरल प्रमोशन दिया जाए।"

नर्सिंग छात्रों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

प्रदेशभर के नर्सिंग,पैरामेडिकल के छात्रों ने जनरल प्रमोशन और रुके हुए रिजल्ट को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। फिलहाल सभी जिलों में सात सूत्रीए मांग पत्र सौंपा गया है। नर्सिंग छात्र अब राजधानी भोपाल में जुटने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। पिछले साल भी हजारों की संख्या में छात्र भोपाल पहुँचे थे लेकिन निराकरण नहीं हो सका। अब यह जनरल प्रमोशन की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन करने की तैयारी कर रहे हैं। 

ऐसे सामने आया नर्सिंग घोटाला!

साल 2020-21 में कोरोना काल के दौरान कुछ अस्पताल खोले गए थे। इसकी आड़ में कई नर्सिंग कॉलेज भी खोल दिए गए। कॉलेज खोलने के लिए मेडिकल यूनिवर्सिटी और चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा बनाए नियमों के मुताबिक नर्सिंग कॉलेज खोलने के लिए 40 हजार स्क्वेयर फीट जमीन का होना जरूरी होता है। साथ ही 100 बिस्तर का अस्पताल भी होना आवश्यक है। इसके बावजूद प्रदेश में दर्जनों ऐसे नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता दी गई, जो इन नियमों के अंर्तगत नहीं थे। इसके बाद भी इन्हें मान्यता दे दी गई।

याचिकाकर्ता और जबलपुर हाई कोर्ट में वकील विशाल बघेल ने ऐसे कई कॉलेज की तस्वीरें और जानकारी कोर्ट को सौंपी थी। इसमें बताया कि कैसे कॉलेज के नाम पर घोटाला चल रहा है। हाई कोर्ट ने इस मामले को देखते हुए नर्सिंग कॉलेज में होने वाली परीक्षाओं पर रोक लगा दी थी। इसके बाद, बीते चार वर्षों से नर्सिंग कॉलेजों में परीक्षा नहीं हुई है। परीक्षा नहीं होने की वजह से छात्र परेशान हैं। अब यही छात्र आंदोलन कर सरकार से जनरल प्रमोशन की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि यदि कॉलेजों ने गलत किया है तो इसकी सजा छात्रों को क्यों मिल रही है।

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