![राजस्थान में अल्प मानदेय में मदरसों के पैरा टीचर्स कर रहे हैं काम [फोटो- अब्दुल माहिर, द मूकनायक]](http://media.assettype.com/mooknayak-hindi-prod%2Fimport%2Fwp-content%2Fuploads%2F2022%2F08%2Fbc24baf2-8748-4e04-aa4b-d51d5efb5beb.jpeg?w=480&auto=format%2Ccompress&fit=max)
रिपोर्ट- अब्दुल माहिर
बोर्ड से पंजीकृत मदरसों के पैरा टीचर्स बेहाल, शिक्षक कर रहे आर्थिक तंगी का सामना।
सवाईमाधोपुर। राजस्थान में मदरसा बोर्ड से पंजीकृत मदरसों में 6 हजार से अधिक पैरा टीचर्स भी उतनी ही शिद्दत से बच्चों को तालीम दे रहे हैं, जितनी मेहनत से सरकारी स्कूलों में अध्यापक पढ़ा रहे हैं। जब काम एक समान है तो फिर सरकार मानदेय में भेद क्यों कर रही है। यह एक बड़ा सवाल है। कम मानदेय में मदरसा पैरा टीचर्स के लिए परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल हो रहा है। मदरसा पैरा टीचर्स को वेतन के रूप में प्रतिमाह 11,547 रुपए का भुगतान किया जाता है। इधर, मामले में कोई भी मुस्लिम विधायक बात करने को तैयार नहीं है।
घर का खर्च चलाना मुश्किल
गंगापुर सिटी के रहने वाले रियाजुद्दीन भरतपुर जिले के एक मदरसे में पैराटीचर हैं। पत्नी व बच्चों के साथ बीमार मां गांव में रहती है। जितना मानदेय मिल रहा उससे मां की दवा भी नहीं खरीद पा रहे हैं। कर्ज बढ़ता जा रहा है।
भरतपुर के ही मदरसा अब्दुल कलाम आजाद में कार्यरत पैराटीचर जमशेद खान को 2013 के बाद से मानदेय नहीं मिला। सवाई माधोपुर शहर निवासी रईस, घर से 150 किलोमीटर दूर जयपुर में पैरा टीचर हैं। कैंसर रोग से ग्रसित हैं। शिक्षण कार्य को एवज में मिले मानदेय से इलाज भी नहीं करवा सके।
भीलवाड़ा जिले के गंगापुर में मदरसा पैरा टीचर आसमा बताती हैं कि, "16 साल से अल्प मानदेय में मदरसे में पढ़ा रही हूं, लेकिन अब मेरे बच्चों को किताब खरीदने के लिए भी पैसे नहीं बचते। सरकार अपना वादा पूरा करे तो हमारे घरों में भी खुशी आए।" टोंक जिले के मदरसे में पैरा टीचर परवीन भी इतने कम मानदेय में घर नही चला पा रही हैं।
राज्य सरकार ने किया धोखा!
राजस्थान मदरसा पैरा टीचर्स को नियमित करने के वादे के साथ चुनाव जीत कर सत्ता हासिल करने वाली कांग्रेस सरकार अपने चुनावी वादे से मुकर गई है। पैरा टीचर्स ने आंदोलन किया। लम्बे संघर्ष के बाद सरकार ने राजनीतिक रणनीति के तहत अलग से संविदा कैडर बनाने के वादे के साथ आंदोलन को दबा दिया गया।
मदरसा पैरा टीचर्स के आंदोलन का अहम हिस्सा रहे जुल्फिकार अहमद बताते है कि, उस समय राज्य के आधा दर्जन से अधिक मुस्लिम विधायकों ने विश्वास दिलाया कि सरकार आपके हित में काम कर रही है। आप सब्र रखें। मदरसा पैरा टीचर्स सरकारी तरफदारी कर रहे इन विधायकों के भरोसे का शिकार हुए। आज तक न तो संविदा कैडर बना, न मानदेय में मांग के अनुरूप बढ़ोतरी की गई। इस संबंध में द मूकनायक ने सवाईमाधोपुर विधानसभा क्षेत्र से मुस्लिम विधायक दानिश अबरार से लेकर मुस्लिम समाज से आने वाले अन्य विधायकों से सम्पर्क किया, लेकिन किसी ने भी इस मुद्दे पर वाजिब जवाब नहीं दिया।
अपने समाज के जनप्रतिनिधि भी नहीं दे रहे साथ
मदरसा पैरा टीचर संघ सवाईमाधोपुर के जिलाध्यक्ष दिलशाद खान बताते हैं कि, राज्य में तीन सौ से अधिक पैराटीचर्स अल्प मानदेय में घर परिवार छोड़ कर दूसरे जिलों में काम कर रहे हैं। इनकी पारिवारिक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। सरकार इन पैरा टीचरों को गृह जिले में भेजने को तैयार नहीं है। ना ही कोई मुस्लिम विधायक मदरसा पैराटीचर्स की पीड़ा को लेकर सरकार से बात कर रहा है।
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