द्रमुक लंबे समय से तमिलनाडु को सामाजिक न्याय के शासन का मॉडल बताती रही है। लेकिन नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और नेशनल कैंपेन ऑन दलित ह्यूमन राइट्स (NCDHR) के आंकड़े एक अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं। इन रिपोर्टों का गहराई से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि राज्य में दलितों और आदिवासियों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों में 67 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है। गौर करने वाली बात यह है कि इस अवधि के दौरान अन्नाद्रमुक और द्रमुक, दोनों ही सत्ता में रहे हैं।
एनसीडीएचआर की रिपोर्ट 'फाइव इयर्स ऑफ कास्ट-बेस्ड एट्रोसिटी' के अनुसार, 2019 से 2023 के बीच तमिलनाडु में दलितों के खिलाफ अपराधों में 67.9 प्रतिशत का इजाफा हुआ, जो पूरे देश में सबसे अधिक है। इसके बाद मध्य प्रदेश 55.3 प्रतिशत और ओडिशा 42.9 प्रतिशत के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य में सामाजिक न्याय की भाषा और दलितों के वास्तविक जीवन के बीच एक बड़ी खाई है।
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