यूपी: घर में घुसकर दलित महिलाओं की पिटाई के मामले में एक महीने बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, सीएम से शिकायत

डीएसपी बोले पुलिस अपना काम कर रही है.
सांकेतिक फोटो।
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उत्तर प्रदेश। यूपी के कानपुर जिले के सेन पश्चिम पारा में एक दलित परिवार को कथित रूप से उच्च जाति वालों के घर के बाहर से गुजरने पर उनके पैर न छूना बहुत भारी पड़ा। ऐसा ना करने पर उक्त लोगों ने उस दलित व्यक्ति के घर में घुसकर महिला और बच्चों की पिटाई की थी। महिला के बाल पकड़कर घसीटने, और पीटने का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

इसके साथ ही आरोप था कि कथित उच्च जाति के लोगों ने पीड़ित के घर मे आग भी लगा दी थी। इससे दो बकरियां ज़िंदा जल गईं थी। इस मामले में पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने आईपीसी और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में एक महीना बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की है। इस कारण आरोपी लगातार जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। पीड़ित ने सीएम को एक पत्र लिखकर मामले की शिकायत की है। इस मामले में एसीपी घाटमपुर का कहना है कि पीड़ितों का रविवार को 164 का बयान दर्ज कराया गया है। इस मामले में जल्दी ही चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।

पूरा मामला कानपुर नगर के थाना सेन पश्चिम पारा के सेन पूरब पारा का है। यह घटना बीते 11 फरवरी की है। घटना का जिक्र करते हुए बाबू पासवान ने द मूकनायक को बताया था कि, "गांव के रहने वाले दयालू सिंह पुत्र छुटकन, राम पुत्र दयालू सिंह, राघव पुत्र दयालू सिंह चाहते थे कि हम जब भी उनके घर के बाहर से गुजरे तब हमारे परिवार के सदस्य उनके पैर छूए। लेकिन हमने न तो कभी ऐसा किया है और न ही करेंगे। बस इसी बात को लेकर विवाद हुआ। जब हमने इसका विरोध किया तो वह हमारे घर में घुस आये और मारपीट की थी। मेरी मां लक्ष्मी देवी के बाल पकड़कर पिटाई की। घर के बच्चों और बहुओं की भी पिटाई की थी।"

पीड़ित बाबू पासवान बताता था कि, "11 फरवरी को शाम 8 बजे मेरी मां लक्ष्मी देवी और बहुएं घर पर थी। हम सब काम पर गए हुए थे। इस दौरान दयालू सिंह, राम, राघव के अलावा 3 अज्ञात लोग अंधेरे में घर में घुस आये। उन्होंने मेरी परिवार की महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और दुष्कर्म की कोशिश की। जब मेरे परिवार की महिलाओं ने इसका विरोध किया तो उन्होंने जाति सूचक शब्दों से अपमानित किया था। उन्होंने मेरी मां के बाल पकड़कर पिटाई की। जब घर की बहुओं ने बचाया तो लात घूसों से पिटाई की। मां की आवाज सुनकर मेरा भाई रमेश चीख-पुकार सुनकर बचाने आया तो उसे भी लात घूंसों से पीटा था।"

बाबू ने बताया था कि "उन लोगों ने मेरे घर के एक हिस्से में आग लगा दी थी। फूस का होने के कारण घर का वह हिस्सा तेजी से जलने लगा। परिवार के सदस्यों ने खुद को आग से बचा लिया, लेकिन दो बकरियाँ जल गयी थी। इस मामले में पुलिस ने आईपीसी की धारा -147, 452, 354(ख), 323, 308, 504, 436, 428 सहित एससी एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था।"

पुलिस ने एक माह बाद भी नहीं की कार्रवाई

पीड़ित परिवार ने पुलिस पर गम्भीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित परिवार ने द मूकनायक को बताया कि, "पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के बाद कोई कार्रवाई नहीं की है। एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की है। एक महीना बीत गया है। कार्रवाई न होने के कारण आरोपी लगातार जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। हमने इसकी शिकायत सीएम योगी से की है।"

इस मामले में द मूकनायक ने जांच अधिकारी से सम्पर्क किया। कानपुर कमिशनरेट के घाटमपुर के एसीपी (डीएसपी) रणजीत कुमार मामले की जांच कर रहे हैं। उन्बहोंने बताया कि, "मामले में जांच की गई है। पीड़ित पक्ष ने खुद अपने घर मे आग लगाई थी। इस बात की पुष्टि पीड़ित परिवार के पड़ोस में रहने वाले उन्हीं के समाज के लोगों ने की है। इसके साथ ही यह घटना मामूली मारपीट की है। रविवार को पीड़ित परिवार को बुलाकर 164 का बयान दर्ज कराया गया है। जल्दी ही इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।

गिरफ्तारी न किये जाने के प्रश्न पर रणजीत कहते हैं, "इसमें कोई भी ऐसी धारा नहीं है जिसमें तत्काल गिरफ्तारी की जाए। पुलिस नियमानुसार अपना काम कर रही है।"

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