IIT Bombay: दलित छात्र की मौत के 34 दिन बाद भी नहीं दर्ज हो सकी एफआईआर, एसआईटी गठित

अमृतसर में दलित एमबीबीएस छात्रा की आत्महत्या मामले में एक गिरफ्तार
IIT Bombay: दलित छात्र की मौत के 34 दिन बाद भी नहीं दर्ज हो सकी एफआईआर, एसआईटी गठित

महाराष्ट्र के मुम्बई स्थित आईआईटी में बीते 12 फरवरी 2023 को हॉस्टल की बिल्डिंग से कूदकर दलित छात्र दर्शन सोलंकी ने आत्महत्त्या कर ली थी। इस मामले में 34 दिन बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है। दर्शन के पिता रमेश सोलंकी गत गुरुवार को रिपोर्ट लिखाने के लिए थाने गए थे। पिता का आरोप है कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने की जगह एक बार फिर जांच कराने की बात कहकर एसआईटी गठित कर दी है। इससे पूर्व कालेज स्तर पर भी जांच कमेटी गठित की गई थी। इसमें दर्शन सोलंकी को कॉलेज में खराब प्रदर्शन से आहत होकर घटना होने की बात कही गई थी।

जानिए क्या है पूरा मामला?

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के पवई परिसर में छात्रावास की छत से कूदकर इंजीनियरिंग के छात्र दर्शन सोलंकी (26) ने आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में पिता 34 दिन बाद बीते गुरुवार को मुकदमा दर्ज कराने के लिए पवई थाने गए थे। दर्शन के पिता ने बताया, "पुलिस ने मामले की जांच करने की बात कही है। अभी कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। जांच के लिये थाना स्तर पर एसआईटी गठित की गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मुकदमा दर्ज हो सकेगा।"

IIT Bombay: दलित छात्र की मौत के 34 दिन बाद भी नहीं दर्ज हो सकी एफआईआर, एसआईटी गठित
IIT बॉम्बे में दलित छात्र दर्शन सोलंकी की मौत का मामला; परिजनों ने जांच कमेटी पर उठाए सवाल

गौरतलब है कि इस मामले में छात्र के द्वारा जातीय उत्पीड़न के चलते आत्महत्या किये जाने का आरोप लगाया गया था। इस मामले की जांच के लिए आईआईटी बॉम्बे द्वारा 12 सदस्यों की एक जांच कमेटी 13 फरवरी 2023 को गठित की गई थी।

अंतरिम रिपोर्ट में कहा गया, ''दर्शन सोलंकी का अलग-अलग विषयों की परीक्षा में प्रदर्शन खराब हो रहा था। सबसे ज्यादा दूसरी छमाही के सेमेस्टर में रिजल्ट खराब था। संभव है कि खराब अकादमिक प्रदर्शन का दर्शन पर बहुत बुरा असर पड़ा हो। दर्शन अपने दोस्तों से बातचीत में अक्सर कहते थे कि आईआईटी बॉम्बे से बीटेक की पढ़ाई छोड़ देंगे और अपने गृहनगर में कहीं एडमिशन लेंगे।''

रिपोर्ट में कहा गया है कि दर्शन सोलंकी की बहन ने कैंपस में जातिगत भेदभाव की बात कही थी, लेकिन उनके इस बयान के अलावा इस बात का कोई सीधे तौर पर सबूत नहीं मिला कि दर्शन को जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा था।

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रिपोर्ट के मुताबिक, दर्शन की बहन ने जातिगत भेदभाव से जुड़ा कोई सबूत नहीं दिया था। रिपोर्ट में दर्शन और उनकी बहन की बातचीत का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ''कंप्यूटर्स और अन्य विषयों से जुड़ी दर्शन की जिज्ञासा पर कई बार कुछ स्टूडेंट्स हँस देते थे।'' रिपोर्ट में बताया गया है कि दर्शन पढ़ने में बहुत दिलचस्पी नहीं दिखाते थे और वह हॉस्टल के कमरे में ही रहना पसंद करते थे। दर्शन के एक दोस्त ने बताया है कि सोलंकी को लेक्चर समझने में दिक्कत होती थी। दर्शन की परीक्षा की तैयारी भी पूरी तरह से नहीं हो पाती थी।

रिपोर्ट के अनुसार, दर्शन ने मैथेमैटिक्स विषय को हिन्दी में समझाने के लिए कहा था। दर्शन सोलंकी जातिगत भेदभाव के खिलाफ कभी एससी/एसटी सेल या स्टूडेंट वेलनेस सेंटर नहीं गए और न ही आईआईटी बॉम्बे के मेल पर इससे जुड़ी कोई शिकायत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सोलंकी अन्तर्मुखी स्वभाव के थे। ''दर्शन शुरुआत में शायद अलग-थलग महसूस करते थे। इसके कई कारण हो सकते हैं। इनमें जी-रैंक में अंतर, कंप्यूटर ज्ञान और भाषा का अभाव आदि है। उनके अन्य छात्रों से अलग रहने का कोई सटीक कारण नहीं मिला है।''

कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, ''12 फरवरी को दोपहर बाद दर्शन अपने हॉस्टल के विंग-मेट्स के साथ शॉपिंग करने जाने वाले थे। दर्शन के पिता ने अकाउंट में कुछ पैसे भी ट्रांसफर किए थे। हालांकि कमेटी को इस बात की सूचना नहीं है कि छत से छलांग लगाने से पहले परिवार के साथ फोन पर क्या बात हुई थी। कॉल डिटेल के अलावा फोन और लैपटॉप की फॉरेंसिक जाँच का इंतजार है और इसके बाद ही फाइनल रिपोर्ट आएगी।''

रिपोर्ट पर एपीपीएससी ने उठाये थे सवाल

इस मामले में एपीपीएससी (अम्बेडकर पेरियार फुले स्टडी सर्किल) ने जांच कमेटी की रिपोर्ट पर सवाल उठाए थे। कमेटी ने कहा था, ''आईआईटी बॉम्बे की 12 सदस्यीय जांच कमेटी के सारे लोग कैंपस के ही थे। इनमें से सात सदस्य प्रोफेसर हैं। 5 लोग एससी एसटी जाति समाज से थे, उनमें भी दो प्रोफेसर कम स्टूडेंट ज्यादा थे।"

दर्शन सोलंकी की बहन ने दावा किया था कि उनके भाई ने आईआईटी बॉम्बे में कुछ छात्रों से जातिगत भेदभाव की बात कही थी और इसमें उनका भाई भी शामिल था। रिपोर्ट में कहा गया है कि उनकी बहन के अलावा किसी ने जातिगत भेदभाव की बात नहीं कही।

आम्बेडकर पेरियार फुले स्टडी सर्किल और आम्बेडकराइट स्टूडेंट्स कलेक्टिव ने भी कैंपस में जातिगत भेदभाव का दावा किया था। लेकिन जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि दर्शन सोलंकी की मुलाकात में इनमें से किसी की नहीं हुई थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दर्शन ने अपने पिता और चाचा से भी कभी जातिगत भेदभाव की बात नहीं कही थी।

दर्शन की बहन जाह्नवी और पिता से भी जांच कमेटी ने बात की थी। रमेशभाई सोलंकी का कहना है कि उनके बेटे ने कभी जातिगत भेदभाव की बात डर से नहीं कही होगी।

रमेशभाई ने कहा है, ''वह इस बात से डर गया होगा कि अगर जातिगत भेदभाव की बात बताई तो कहीं मैं कॉलेज बदलने के लिए ना कह दूं।''

पूर्व में भी एक अन्य दलित छात्र कर चुका है आत्महत्या, कमेटी ने ऐसी ही रिपोर्ट तैयार की थी। आईआईटी बॉम्बे में यह पहला मामला नहीं है जब एक दलित छात्र ने आत्महत्या की है। 4 सितम्बर 2014 को छात्रावास की बालकनी से कूदकर आईआईटी बॉम्बे के छात्र अनिकेत अंभोरे ने आत्महत्या कर ली थी। उस समय भी छात्र के पिता ने कालेज में जातीय उत्पीड़न किये जाने के आरोप लगाए थे। अनिकेत के पिता का आरोप था अनुसूचित कोटे से एडमिशन लेने के कारण अन्य छात्र उसे परेशान करते थे। छात्र कोटे से एडमिशन लेने की बात करके हमेशा उसे नीचा दिखाने की कोशिश करते थे।

दलित एमबीबीएस छात्रा की आत्महत्या के मामले में एक युवक गिरफ्तार

पंजाब के अमृतसर के एक मेडिकल कालेज में दलित छात्रा द्वारा आत्महत्या के मामले में पुलिस खाक छानती नजर आ रही है। मुकदमा दर्ज होने के सप्ताह भर बाद भी सिर्फ एक ही आरोपी को गिरफ्तार कर सकी है। इस मामले में अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के अध्यक्ष ने संज्ञान लेते हुए अमृतसर प्रशासन को नोटिस जारी कर कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने को कहा था।

पंजाब के अमृतसर स्थित श्री गुरु रामदास मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस छात्रा ने बीते 9 मार्च 2023 की रात को अपने हॉस्टल के कमरे में फंदा लगाकर अपनी जान दे दी थी। परिवार की शिकायत पर मकबूलपूरा पुलिस ने डॉक्टर प्रतिभा समेत 10 के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में केस दर्ज किया था। परिवार ने आरोप लगाया था कि आरोपी उनकी बेटी को धमकाते थे कि वह भविष्य में उसे कभी डॉक्टर नहीं बनने देंगे। इस मामले की जांच एसीपी ईस्ट फेज-2 गुरु प्रताप सिंह कर रहे हैं।

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पंजाब: जातिगत उत्पीड़न से परेशान दलित एमबीबीएस छात्रा ने की आत्महत्या

पुलिस ने बताया जालंधर स्थित रामा मंडी निवासी कमलेश रानी की शिकायत पर वल्ला पुलिस ने श्री गुरु रामदास अस्पताल की गाइनी वार्ड की एचओडी डॉ. प्रतिभा, डॉ. बीर दविंदर सिंह, सीआर गगनदीप कौर, प्रभ मेहमत, प्रियंका, सीआर नमिशा, करणबीर सिंह, प्रोफेसर स्वाति, जिम्मी स्टेनो और डॉ. पीयूष को नामजद किया था। पुलिस ने बताया कि आरोपियों की प्रकरण में भूमिका की जांच की जा रही है।

इकलौती बेटी को पढ़ा लिखाकर डॉक्टर बनाना चाहती थी मां

मृतक छात्रा की मां कमलेश रानी ने बताया, "मैं किसी तरह अपनी इकलौती बेटी को डॉक्टरी करवा रही थी। बेटी पंपोशा ने कड़ी मेहनत कर एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और इसी कॉलेज में वह अपनी इंटर्नशिप कर रही थी। बेटी ने कुछ दिन पहले उन्हें बताया था कि नामजद आरोपी उसे परेशान करते हैं कि वह उसे (पंपोशा) डॉक्टर नहीं बनने देंगे।"

एक आरोपी की हुई गिरफ्तारी

इस मामले में थाना प्रभारी मकबूलपूरा ने बताया, "बीते 13 मार्च 2023 को नामजद आरोपियों में से एक डॉक्टर प्रभ मेहमत को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। बाकी पूरे मामले में जांच एसीपी कर रहे हैं।"

एससी एसटी आयोग के अध्यक्ष ने मामले को संज्ञान लिया

हॉस्टल में दलित छात्रा द्वारा आत्महत्या के मामले में बीते 13 मार्च 2023 को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) अध्यक्ष विजय सांपला ने संज्ञान लेते हुए अमृतसर प्रशासन को नोटिस जारी कर कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने को भी कहा था।

आयोग ने जालंधर के डिविजनल कमिश्नर, अमृतसर बॉर्डर रेंज के आईजीपी, उपायुक्त और पुलिस आयुक्त को मामले की जांच करके रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था। विजय सांपला ने कहा, "अगर कार्रवाई की रिपोर्ट समय पर नहीं मिलती है तो आयोग अधिकारियों को तलब कर सकता है।"

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