Dalit History Month: मुंबई के राजगृह को रोजाना हजारों लोग क्यों देखने आते हैं, क्या है खास बात राजगृह में?

मुंबई का राजगृह / फोटो - अविनाश, द मूकनायक
मुंबई का राजगृह / फोटो - अविनाश, द मूकनायक
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अब मैं मुंबई पहुंच चुका हूं। मैने हमेशा से "राजगृह" का नाम सुना था।
मैं गांव देहात से हूं, मैं भी मेरे पुराने (पैतृक) घर में रहता हूं, राजगृह को लेकर मेरी उत्सुकता बढ़ रही थी, क्योंकि यहां बाबा साहेब ने अपने जीवन का कुछ महत्वपूर्ण वक्त यहां व्यतीत किया था। मैं इन सबको नजदीक से जानना चाह रहा था। अंततः अब मैं राजगृह पहुंच चुका हूं।

राजगृह मुम्बई (अब महाराष्ट्र) का बेहद आकर्षक जगह है। मैं सोच रहा था कि, यह एक आलीशान शानदार बिल्डिंग उस वक्त उस माहौल में तैयार कर पाना कितना मुश्किल हुआ होगा। वो अकेले व्यक्ति कैसे अपने हक के लिए खड़े रहे होंगे। उस समय हक लेना आसान तो बिल्कुल नहीं रहा होगा। भवन की ये तस्वीर देखिए कितना खूबसूरत है।

इसको देखने के लिए आतुर था। चारों ओर पुलिस की कड़ी पहरेदारी थी। मुख्य रास्ता बंद है, आगे की तरफ एक संकरा रास्ता है अंदर जाने का। सभी कमरों को सुरक्षित तरीके से बंद किया गया है।

मुंबई का राजगृह / फोटो – अविनाश, द मूकनायक
मुंबई का राजगृह / फोटो – अविनाश, द मूकनायक

यहां रह रहे एक ऐसे व्यक्ति (गाइडर) के बारे में पता चला, जो यहां पर आने वाले हर व्यक्ति से अपने परिवार की तरह मिलता है। वह अब हमें यहां की चीजें दिखाने के लिए ले चलते हैं। हमारे साथ कुछ लोग और हैं। साथ के लोग पहला कमरा खोलते हैं, वहां मौजूद एक पंखा दिखाई देता है जो बाबासाहेब के कमरे में लगा था। एक तरफ हीटर (गर्म पानी करने हेतु) और एक तरफ ड्रेसिंग (जिसमें सीसा लगा है और कपड़े लटकाने के लिए सुविधा है) और एक ओर एक पत्थर का बना हुआ टब है (जिसको नहाने के दौरान उपयोग लिया जाता था,) मौजूद है।

दूसरी तरफ बढ़ा तो, देखा कि वहां सोफ़ा रखा गया था जहां पर बाबा साहेब सभी लोगों से मिलते थे। देखने में बहुत ही खूबसूरत था। एक तरफ कुछ बर्तन रखे गए थे जिसका उपयोग बाबा साहेब करते थे। यहां मौजूद बर्तनों के संख्या की बात करें तो वह तकरीबन सैकड़ों मे थे। यहां मौजूद लगभग सभी बर्तन एकदम साफ और सुसज्जित लग रहे थे जिनमें कई कांसा धातु के बने थे।

बाबा साहेब के पिताजी का पहला तस्वीर जो सोशल मीडिया पर देखने को मिलता है, उसका पहला स्कैच यहीं बनाया गया था जिसे किसी कैमरे या फोन से नहीं बल्कि स्केच आर्टिस्ट ने बनाया था। दूसरे एक कमरे में महात्मा बुद्ध की मूर्ति है जो कुछ साल पहले थाईलैंड से आयी थी, वह बेहद रोमांचित करने वाली कर रही थी।

यहां के हाल में हर तरफ उनके जीवनकल के संघर्ष की तस्वीरें लगी दिखाई दे रहीं हैं। यहां एक कमरे में छोटी सी लाइब्रेरी है, जिसमें सैकड़ों से ज्यादा पुस्तकें हैं। आगे हमें वो बेड दिखाई दिया जिस पर बाबासाहेब को अंतिम शैय्या के वक्त सुलाया गया था, और अनगिनत जनता सड़कों पर उमड़ पड़ी थी। देखकर मन में कुछ दर्द और आंखें जैसे नम सी हो गई। वैसे मैं बेहद मजबूत हूं मगर एक बात जो लाखों करोड़ों बार हर बार कहने को दिल करता है, वह है:

बाबा साहेब – "आप थे तो हम हैं"।
शुक्रिया बाबा साहेब, आप सदियों तक अमर रहेंगे।

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