उत्तर प्रदेश: ट्रांसजेंडर समुदाय को नहीं पता उनके लिए है कोई पुलिस हेल्प डेस्क!

2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में अनुमानित ट्रांसजेंडर आबादी 4.88 लाख है, जिसमें कुल आबादी का एक चौथाई से अधिक उत्तर प्रदेश देश में करीब 1,37,465 ट्रांसजेंडर निवास करते हैं।
23 जून 2022 में ट्रांसजेंडर हेल्प डेस्क के उद्घाटन के दौरान तत्कालीन पुलिस उपायुक्त पश्चिमी सोमेन वर्मा
23 जून 2022 में ट्रांसजेंडर हेल्प डेस्क के उद्घाटन के दौरान तत्कालीन पुलिस उपायुक्त पश्चिमी सोमेन वर्मा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 22 जून, 2022 को एक महत्वपूर्ण पहल हुई। शहर के कैसरबाग पुलिस स्टेशन में ट्रांसजेंडर समुदाय को समर्पित पहली पुलिस डेस्क स्थापित की गई। ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की सिफारिश पर प्रदेश के सभी पुलिस स्टेशनों में ऐसे डेस्क स्थापित करने का लक्ष्य था जो कि लखनऊ के अधिकांश पुलिस स्टेशनों में पहले से मौजूद महिला हेल्प डेस्क के समान थी। द मूकनायक ने अपनी पड़ताल में पाया कि सिर्फ कैसरबाग पुलिस स्टेशन में सहायता डेस्क संचालित हो रही है। अन्य किसी थाने में अब तक डेस्क की शुरूआत नहीं की गई है।

यहां डीसीपी कार्यालय परिसर स्थित कैसरबाग पुलिस स्टेशन में भी 02/11/2023 तक पिछले दस महीनों में केवल एक मामला दर्ज किया गया था, जबकि पिछले वर्ष तीन मामले दर्ज किए गए थे। एसएचओं सुधाकर सिंह ने द मूकनायक को बताया, "जुलाई में मारपीट का एक मामला दर्ज किया गया था, और जांच जारी है।" लखनऊ के कैसरबाग पुलिस थाने में ट्रांसजेंडर डेस्क तेलंगाना के साइबराबाद में गावचोली पुलिस स्टेशन के बाद दूसरी ऐसी पहल है।

उस समय इस पहल को सामाजिक बाधाओं को दूर करने और ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया। हालाँकि, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से जुड़ी सामाजिक धाराणाएं उन्हें शिकायत दर्ज करने से रोकती हैं। डेस्क स्थापना का उद्देश्य इस अंतर को पाटना और समुदाय को सशक्त बनाना था।

शिकायत दर्ज करने में झिझक की एक अहम वजह आवश्यक दस्तावेज की कमी है। ट्रांसजेंडर प्रीति ने समुदाय के लिए संचालित हेल्प डेस्क के बारे में अनभिज्ञता प्रकट की। उन्होंने शिकायतें दर्ज करने के समय आने वाली परेशानियों को बताते हुए कहा, "पुलिस अधिकारी हमारी शिकायतों का दर्ज करने में झिझकते हैं। वे आधार कार्ड अन्य पहचान के कागजात की मांग करते हैं। केवल जब हम एकजुट होकर दबाव बनाते है तभी वो हमारी रिपोर्ट दर्ज करते है।"

एक अन्य ट्रांसजेंडर सुधा तिवारी ने बताया कि कैसरबाग पुलिस स्टेशन के अलावा अन्य किसी थाने में हेल्प डेस्क संचालित है। इसकी उनको जानकारी नहीं है।

थर्ड जेंडर के खिलाफ अपराध की रिपोर्ट दर्ज करने में पुलिस के भेदभावपूर्ण रवैये के मामले बढ़ रहे है। ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं जहां ट्रांसजेंडर व्यक्तियों पर अधिकारियों द्वारा वेश्यावृत्ति में शामिल होने का झूठा आरोप लगाया गया या उन पर संदेह किया गया।

कुछ ट्रांसजेंडर व्यक्तियों द्वारा शैक्षिक अवसर प्राप्त करने और विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति करने के बावजूद, उनके खिलाफ भेदभाव और उत्पीड़न जारी है। 2020 में, पूरे देश में ट्रांसजेंडर पर हुई प्रताड़ना के केवल 236 अपराध दर्ज किए गए जहां पीड़ितों ने खुद को ट्रांसजेंडर के रूप में पहचाना।

हिंसा के उदाहरण एवं चुनौतियाँ

2014 में, एक परेशान करने वाली घटना सामने आई थी जहां मुंबई स्थित एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि उसे अजमेर में दो पुलिस कांस्टेबलों और एक पुलिस अधिकारी द्वारा ओरल सेक्स के लिए मजबूर किया गया था। द डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के अनुसार, दुखद बात यह है कि घटना की रिपोर्ट करने के बाद, पीडि़त को एक अधिकारी पर हमला करने के आरोप में पुलिस ने पकड़ लिया।

आगे भी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं घटीं। जुलाई 2022 में, नई दिल्ली के रोहिणी इलाके में जापानी पार्क के पास एक 25 वर्षीय ट्रांसजेंडर व्यक्ति का शव मिला, जिस पर चाकू से वार किया गया था।

जुलाई 2023 में, दो ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, जिनकी पहचान यूसुफ और सोफिया के रूप में हुई, की हैदराबाद में हत्या कर दी गई। इसके अलावा, अक्टूबर 2023 में, असम के गुवाहाटी जिले में एक और ट्रांसजेंडर व्यक्ति का शव एक बोरे में भरा हुआ मिला था।

2017 में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हुआ जब के पृथिका यशिनी ने 25 साल की उम्र में चेन्नई में उप-निरीक्षक के रूप में भारतीय पुलिस बल में शामिल होने वाली पहली ट्रांसजेंडर महिला के रूप में इतिहास रचा।

हालाँकि, ट्रांसजेंडर डेस्क स्थापित करने की पहल को ट्रांसजेंडर समुदाय से पर्याप्त उम्मीदवारों की भर्ती में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, यह सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठाए जा सकते हैं कि कानून प्रवर्तन अधिकारी ट्रांसजेंडर व्यक्तियों द्वारा सामना किए जाने वाले मुद्दों के प्रति संवेदनशील हों। यह दृष्टिकोण लॉ एण्ड आर्डर मेंटेन करने वाली एजेंसियों के भीतर ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अधिक समावेशी और सहायक वातावरण बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।

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